9 जुलाई : पिताओं के लिए एक वचन

Alethia4India
Alethia4India
9 जुलाई : पिताओं के लिए एक वचन
Loading
/

“हे बच्चे वालो, अपने बच्चों को रिस न दिलाओ, परन्तु प्रभु की शिक्षा और चेतावनी देते हुए उनका पालन–पोषण करो।” इफिसियों 6:4

रोमन समाज में एक पिता का अधिकार सर्वोपरि होता था। जैसा कि विलियम बार्कले ने लिखा, “एक रोमन पिता को अपने परिवार पर पूर्ण अधिकार प्राप्त होता था . . . वह अपने बेटे को बांध सकता था या पीट सकता था; वह उसे गुलाम के तौर पर बेच सकता था; और उसके पास उसे मृत्युदण्ड देने का अधिकार भी था . . . यदि कभी किसी ने पारिवारिक अनुशासन का अर्थ समझा है, तो वह रोम के लोगों ने किया।”[1]

इसलिए ध्यान दें कि यहाँ पौलुस केवल माता-पिता के अधिकार का प्रयोग करने का बुलावा नहीं दे रहा है। बल्कि वह इसकी वैधता को स्वीकार कर रहा है और इसे सन्तुलित भी कर रहा है। उसका पहला निर्देश नकारात्मक है: “अपने बच्चों को रिस न दिलाओ।” वह पिताओं से आग्रह करता है कि वे अपने बच्चों को अनुशासित करते समय संयम का प्रयोग करें, ताकि वे उन्हें हताश, निराश, या क्रोधित करके ज्यादा नुकसान न कर बैठें।

हम अपने बच्चों को किस प्रकार रिस दिला सकते हैं अर्थात क्रोधित कर सकते हैं? स्वार्थ, कठोरता, असंगति, अनुपयुक्तता, पक्षपात, चिढ़ाने, दोषारोपण करने, प्रगति की सराहना न करने के द्वारा . . . फिर भी ऐसी लम्बी सूची से हमें हतोत्साहित नहीं हो जाना चाहिए; इसके बजाय, हमें यह याद रखना चाहिए कि यह जिम्मेदारी केवल परमेश्वर के अनुग्रह से ही पूरी की जा सकती है।

और फिर भी पौलुस के निर्देश केवल नकारात्मक नहीं बल्कि सकारात्मक भी हैं। “उनका पालन–पोषण करो,” क्रिया का अर्थ कुछ-कुछ बागवानी जैसा है—यह हमें याद दिलाता है कि हमें अपने बच्चों को कोमलता से पालना है, और यह भी कि यह कोई तात्कालिक कार्य नहीं है; बल्कि यह कई वर्षों का एक सफर है। साथ ही, इस पालन-पोषण “अनुशासन” शामिल है—विशेष रूप से पवित्रशास्त्र का अनुशासन, जिसके द्वारा पिता स्वयं मसीह के स्वरूप में ढलता है—और “शिक्षा” शामिल है, जिसमें हम अपने बच्चों के मन पर परमेश्वर के वचनों की धीरे-धीरे छाप डालते हैं, ताकि उनका चरित्र सच में परिवर्तित हो जाए।

यदि आप माता-पिता हैं, तो आप इस कार्य को कैसे पूरा कर सकते हैं? इसके लिए अनुग्रह की आवश्यकता है। इसके साथ ही, इसके लिए धैर्य भी चाहिए। स्टॉक मार्केट की भाषा में, माता-पिता होना एक दिन भर में किया जाने वाला व्यापार नहीं है; यह दीर्घकालिक निवेश है। यह अद्‌भुत है कि एक चार साल का बच्चा, जिसे लगातार परमेश्वर के प्रेम और अनुशासन से सम्भाला जाता है, किशोरावस्था के अन्त तक एक विचारशील और प्रेमपूर्ण युवा वयस्क बन सकता है। यदि आप माता-पिता नहीं हैं, तो उन लोगों के लिए प्रार्थना करें, जो हैं। उन्हें इसकी आवश्यकता है! और यदि आप माता-पिता हैं, तो अपनी स्वयं की पद्धति पर विचार करें।

आप अपने घर में माता-पिता के अधिकार को कैसे स्थापित कर रहे हैं? आप इसे करते समय किस तरह से अपने बच्चों को क्रोधित करने के सबसे अधिक खतरे में हैं? आप अपने बच्चों को परमेश्वर के वचन में कैसे शिक्षा देंगे, और आप माता-पिता होने के अनुभव से अपने चरित्र को मसीह के समान बनाने में किस तरह से देख सकते हैं? इस सब में, याद रखें कि माता-पिता होना एक अनुग्रह का कार्य है। हमें अपनी जिम्मेदारियाँ विश्वासयोग्यता से निभानी हैं। लेकिन यदि आप यह नहीं याद रखते कि हर एक गलती को माफ करने के लिए अनुग्रह पर्याप्त है, तो आप हताश हो जाएँगे—यह एक ऐसा सत्य है जो आपको सशक्त करेगा और आपको घुटनों पर बनाए रखेगा!

  व्यवस्थाविवरण 6:1-15

पूरे वर्ष में सम्पूर्ण बाइबल पढ़ने के लिए: ओबद्याह; प्रेरितों 8:1-25 ◊


[1] द लैटर टू द हिब्रूज़, द न्यू डेली स्टडी बाइबल (वैस्टमिंस्टर जॉन नॉक्स, 2002), पृ. 208.

Leave A Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *