6 जनवरी: परमेश्वर के वचन को संजोना

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6 जनवरी: परमेश्वर के वचन को संजोना
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“हे मेरे पुत्र, मेरी बातों को माना कर, और मेरी आज्ञाओं को अपने मन में रख छोड़। मेरी आज्ञाओं को मान, इससे तू जीवित रहेगा, और मेरी शिक्षा को अपनी आँख की पुतली जान; उनको अपनी उँगलियों में बाँध, और अपने हृदय की पटिया पर लिख ले।”  नीतिवचन 7:1-3

जब मुझे भूख लग रही हो तब खाने के सामान की खरीदारी करना मेरे लिए जोखिम भरी बात होती है। मुझे लगता है कि मैं खाने की ऐसी चीजें खरीदने के लिए प्रलोभित हो जाता हूँ, जो सामान्य परिस्थितियों में मुझे कदापि पसन्द न आएँ। परन्तु मैं अकेला ऐसा व्यक्ति नहीं हूँ, राजा सुलैमान के अनुसार: “सन्तुष्ट होने पर मधु का छत्ता भी फीका लगता है, परन्तु भूखे को सब कड़वी वस्तुएँ भी मीठी जान पड़ती हैं” (नीतिवचन 27:7)।

यही सिद्धान्त पवित्रता की हमारी खोज पर भी लागू हो सकता है। आत्मिक रूप से भूखे रहकर अपने दिन बिताना एक वास्तविक संकट है, क्योंकि हमने परमेश्वर के वचन को भोजन के रूप में अच्छे से खाया नहीं है।

यदि हम अपनी पवित्रता बनाए रखने के लिए कोई सार्थक प्रयास करने जा रहे हैं, तो यह आवश्यक है कि हम न केवल परमेश्वर के वचन को पढ़ें; किन्तु उसे संजो कर भी रखें।  जब सुलैमान, इस्राएल का वह राजा जिसे परमेश्वर ने ऐसी बुद्धि दी जो सबसे बढ़कर थी (1 राजाओं 3:3-14), अपने बेटे से कहता है कि उसके वचनों को “माना कर,” उन्हें “मन में रख छोड़,” उन्हें “अपनी आँख की पुतली जान,” उन्हें “बाँध” रख, और उन्हें अपने हृदय पर “लिख ले,” तो वह ऐसी भाषा का प्रयोग करता है, जो परमेश्वर के वचन को संजोने के भाव तक पहुँचा देती है।

परमेश्वर के वचन को इस तरह से समझने के लिए हमें बाइबल का उपयोग अध्ययन किए जाने वाली किसी पाठ्यपुस्तक, या तर्कों के लिए प्रमाण-पत्रों की किसी पुस्तक, या फिर एक प्रतिज्ञा की किसी पुस्तक से कहीं बढ़ कर करना होगा, जिन्हें हम कभी-कभार ही देखते हैं। परमेश्वर के वचन को संजोने के लिए हमें भजनकार के उस दृष्टिकोण की खोज करने की आवश्यकता है, जो अपने समय के घमण्डियों और ठट्ठा करने वालों से अपने आप को दूर रखते हुए परमेश्वर के साथ चलने वाले व्यक्ति के बारे में यों कहता है, “वह तो यहोवा की व्यवस्था से प्रसन्न रहता; और उसकी व्यवस्था पर रात दिन ध्यान करता रहता है” (भजन संहिता 1:2)।

 परमेश्वर के वचन से प्रसन्न रहने, अर्थात उसे अपने जीवन को चलाने और मार्गदर्शन करने देने, तथा पवित्रता के लिए सरगर्मी रखने के बीच एक सीधा सम्बन्ध है। यदि हम पवित्रशास्त्र को संजोने में विफल रहते हैं, तो प्रश्न यह नहीं है कि क्या  हम पवित्रता के सन्दर्भ में ठोकर खाएँगे या नहीं,  परन्तु प्रश्न यह है कि ऐसा कब  होगा।

हममें से प्रत्येक व्यक्ति परमेश्वर के वचन को अपने हृदय में छिपे रहने का स्थान देकर अपनी चाल को शुद्ध रख सकता है (भजन संहिता 119:9)। क्या आपने पवित्रशास्त्र को कण्ठस्थ करने की कोई योजना बनाई है? मैं आपको प्रोत्साहित करना चाहता हूँ कि आप बाइबल के किसी एक पद को स्मरण करने का संकल्प लें, चाहे आप हर दूसरे दिन, प्रतिदिन, साप्ताहिक रूप से या जैसे भी ऐसा करना चाहें। एक योजना बनाएँ और उस पर टिके रहें।

परमेश्वर के वचन का आनन्द लें और सन्तुष्ट रहें। पवित्रशास्त्र को संजोएँ और पवित्र बनें।

     भजन संहिता 119:1-16

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