6 अप्रैल : ग्रहण करने योग्य बलिदान

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6 अप्रैल : ग्रहण करने योग्य बलिदान
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मेरे पास सब कुछ है, वरन् बहुतायत से भी है; जो वस्तुएँ तुम ने इपफ्रुदीतुस के हाथ से भेजी थीं उन्हें पाकर मैं तृप्त हो गया हूँ, वह तो सुखदायक सुगन्ध, ग्रहण करने योग्य बलिदान है, जो परमेश्‍वर को भाता है।” फिलिप्पियों 4:18

यह आपके सोचने के लिए एक अद्‌भुत विचार है: आप परमेश्वर को प्रसन्न करने में सक्षम हैं।

यह एक चौंकाने वाला विचार है: कि हमारा सृष्टिकर्ता हमारे कार्यों से प्रसन्न होगा। फिर भी पवित्रशास्त्र हमें इस वास्तविकता को देखने के लिए प्रोत्साहित करता है। मसीही होने के नाते, हम अपने स्वर्गिक पिता की मुस्कान के तहत जीने का प्रयास करते हैं। परमेश्वर के प्रति आज्ञाकारिता के लिए एक बाइबल में दी गई यह प्रेरणा एक बड़ा प्रोत्साहन है, “जैसे तुमने . . . परमेश्वर को प्रसन्न करना सीखा है . . . वैसे ही और भी बढ़ते जाओ” (1 थिस्सलुनीकियों 4:1)—और इसे करने का एक तरीका हमारा उदारता से दिया जाने वाला दान है, जो परमेश्वर के समक्ष “ग्रहण करने योग्य बलिदान” है। पौलुस ने फिलिप्पी की कलीसिया के दान को पुराने नियम के पशु बलिदान के अभ्यास की शब्दावली में व्यक्त किया। जब पुराने नियम में परमेश्वर के लोग अपने होमबलि लाते थे, तो उन बलिदानों के साथ धूप भी जलाया जाता था। इसलिए इस बलिदान से एक आकर्षक सुगन्ध आती थी। एक भाव में, यह परमेश्वर की दृष्टि में बलिदान की मिठास और स्वीकृति का प्रतीक था। उसी तरह, परमेश्वर पहली शताब्दी में और अब इक्कीसवीं शताब्दी में अपने लोगों कहता है, जब तुम्हारा दान मेरे साथ मेल खाते हुए दिल से आता है, तो यह एक मधुर सुगन्ध उत्पन्न करता है, और तुम्हारा बलिदान मुझे प्रसन्न करता है।”

जब हम इस प्रकार के दान पर विचार करते हैं, तो हमें “बलिदान” शब्द को जल्दी से अनदेखा नहीं कर देना चाहिए। बलिदानी दान हमेशा उदार दान के समान नहीं होता। हमारे लिए यह सम्भव है कि हम उदार हों—जैसा कि सच में कई विश्वासियों होते हैं—बिना इसके कि हमारे जीवन या परिस्थितियों पर इसका कोई वास्तविक प्रभाव पड़े।

इसी बिन्दु को स्पष्ट करते हुए, यीशु ने अपने शिष्यों का ध्यान एक गरीब विधवा की ओर आकर्षित किया, जो मन्दिर में अपनी दशमाँश राशि दे रही थी। जब उसने देखा कि यह महिला ताम्बे के दो सिक्के, जो कुछ भी मूल्य नहीं रखते थे, खजाने में डाल रही थी तो उसने उसके आस-पास खड़े अमीर लोगों के उपहारों से उसकी तुलना करते हुए कहा, “इस कंगाल विधवा ने सबसे बढ़कर डाला है। क्योंकि उन सबने अपनी-अपनी बढ़ती में से दान में कुछ डाला है, परन्तु इसने अपनी घटी में से अपनी सारी जीविका डाल दी है” (लूका 21:2-4)। अमीर लोगों का दान उदार था; परन्तु विधवा का दान बलिदानी था। उसने दान देने के लिए अपना सब कुछ त्याग दिया। और उसके प्रभु ने देखा और जो उसने देखा उससे प्रसन्न हुआ।

हम स्वभाव से बलिदानी दाता नहीं हैं। लेकिन पूरी मसीही यात्रा—प्राप्ति और दान में, देखभाल और साझेदारी में—आरम्भ से लेकर अन्त तक कृपा से भरी हुई है। जब हम एक ऐसे दिल से बलिदानी रूप में देते हैं, जो परमेश्वर को प्रसन्न करने की इच्छा करता है, तो वह वचन देता है कि वह “अपने उस धन के अनुसार जो महिमा सहित मसीह यीशु में है, तुम्हारी हर एक घटी को पूरी करेगा” (फिलिप्पियों 4:19)। इसका भाव यह है कि हम मनन करें कि परमेश्वर ने हमें क्या दिया है, और परमेश्वर हमें क्या दे रहा है, और परमेश्वर हमें क्या देगा। जब हम ऐसा करते हैं, तो इससे हमारे दिल खुल जाते हैं और हम बलिदानी रूप से और खुशी से देने की शक्ति पाते हैं। और जब हम ऐसा करते हैं, तो हम परमेश्वर को प्रसन्न करते हैं।

फिलिप्पियों का व्यवहार, और उनके खाते का विवरण, यह दिखाता है कि वे वास्तव में इस पर विश्वास करते थे। आपके विवरण कितने हद तक इस विश्वास को दर्शाते हैं?

1 थिस्सलुनीकियों 4:1-12

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