25 दिसम्बर : आओ, घुटने टेककर आराधना करो

Alethia4India
Alethia4India
25 दिसम्बर : आओ, घुटने टेककर आराधना करो
Loading
/

“‘आओ, हम बैतलहम जाकर यह बात जो हुई है, और जिसे प्रभु ने हमें बताया है, देखें।’ और उन्होंने तुरन्त जाकर मरियम और यूसुफ को, और चरनी में उस बालक को पड़ा देखा।” लूका 2:15-16

बैतलहम आओ और देखो

जिसका जन्म स्वर्गदूत गाते हैं;

आओ, घुटने टेककर आराधना करो,

मसीह प्रभु की—नवजात राजा की।[1]

जब हम क्रिसमस के गीतों में ऐसे शब्द गाते हैं, तो हममें से अधिकतर लोग वास्तव में घुटने नहीं टेकते। हम जानते हैं कि यह निमन्त्रण एक रूपक है। फिर भी, यदि हम सचमुच मसीह को देखना चाहते हैं, तो हमें अपने हृदय की स्थिति में झुके हुए घुटनों के साथ आना पड़ेगा। इसका अर्थ क्या है? इसका अर्थ है—विनम्रता और प्रत्याशा के साथ आना, और इस पहचान के साथ कि यह व्यक्ति—यीशु—ऐसी आराधना के योग्य है।

चरवाहों की तरह ही, हम भी परमेश्वर की ओर आकर्षित होते हैं क्योंकि वह एक खोजने वाला परमेश्वर है। जन्म-कथा में हम देखते हैं कि परमेश्वर ने अद्‌भुत पहल की—उसने अपने पुत्र को एक असहाय बालक के रूप में संसार में भेजा और स्वर्गदूत के माध्यम से चरवाहों से बोला: “मत डरो; क्योंकि देखो, मैं तुम्हें बड़े आनन्द का सुसमाचार सुनाता हूँ जो सब लोगों के लिए होगा, कि आज दाऊद के नगर में तुम्हारे लिए एक उद्धारकर्ता जन्मा है, और यही मसीह प्रभु है” (लूका 2:10–11)।

परमेश्वर ने अनुग्रह में पहल की, और चरवाहों ने विश्वास में प्रत्युत्तर दिया। उन्होंने स्वर्गदूत के सन्देश पर विश्वास किया और आत्मीय उत्साह के साथ उस चरनी की ओर निकल पड़े। उन्होंने अपनी जीविका और परिचित संसार की बातों से ऊपर उद्धारकर्ता को जानने की लालसा रखी। यह हमारे लिए एक सुन्दर उदाहरण है कि हम परमेश्वर के सन्देश पर किस प्रकार प्रतिक्रिया करें।

कुछ लोग इन चरवाहों को मूर्ख समझ सकते हैं और उनके साधारण से विश्वास और प्रत्युत्तर को तुच्छ जान सकते हैं। लेकिन जो बात मनुष्य को परमेश्वर पर भरोसा करने से रोकती है, वह केवल यह है: अहंकार। यही अहंकार चरवाहों को खेत में ही रोके रख सकता था—लेकिन ऐसा होने पर स्वर्गदूत का सन्देश तो उनके पास होता, परन्तु मसीह के साथ सम्बन्ध नहीं। यही अहंकार हमें भी मसीह के पास आकर घुटने टेकने से रोकता है और इस सच्चाई से अन्धा कर देता है कि परमेश्वर को जानने के लिए एक टूटे और नम्र हृदय की आवश्यकता होती है (भजन 51:17)।

बैतलहम के “चर्च ऑफ द नेटिविटी” में आप सीधे नहीं चल सकते। उसका द्वार इतना नीचा है कि प्रवेश करने के लिए आपको झुकना ही पड़ता है। यदि आप उस स्थान में प्रवेश करना चाहते हैं जो प्रभु यीशु के जन्म का प्रतिनिधित्व करता है, तो एक ही तरीका है: झुकिए, नीचे आइए, और घुटनों के बल आइए। यह एक सुन्दर चित्र है—और हमें आत्म-जाँच के लिए प्रेरित करता है: क्या मैं मसीह के सामने स्वयं को दीन करने के लिए तैयार हूँ? क्या मैं उन चरवाहों की तरह अपने पूर्व विचारों और योजनाओं को त्यागने को तैयार हूँ ताकि इस उद्धारकर्ता को जान सकूँ और उसका अनुसरण कर सकूँ?

इस क्रिसमस दिवस पर अपने हृदय को जाँचें: क्या इसका झुकाव परमेश्वर की महिमा के सामने झुकने का है? क्या यह उस बालक राजा की आराधना करता है, जिसने पहले स्वयं को नम्र किया और हमारे पास आया?

  लूका 2:1-20

◊ पूरे वर्ष में सम्पूर्ण बाइबल पढ़ने के लिए: मीका 4–5; लूका 22:1-20


[1] जेम्स चैडविक, “एंजल्स व्ही हैव हर्ड ऑन हाई” (1862), पारम्परिक फ्रेंच क्रिसमस गीत “लेस एंजेस डैंस नोस कैम्पेनेस” का अनुवाद।

Leave A Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *