24 जनवरी : दाता को लौटाना

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24 जनवरी : दाता को लौटाना
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मैं क्या हूँ और मेरी प्रजा क्या है कि हम को इस रीति से अपनी इच्छा से तुझे भेंट देने की शक्ति मिले? तुझी से तो सब कुछ मिलता है, और हम ने तेरे हाथ से पाकर तुझे दिया है।”  1 इतिहास 29:14

कुछ समय पहले हमारी कलीसिया के कुछ कर्मचारियों ने कलीसिया के भवन की प्रत्येक वस्तु पर एक स्टिकर लगाने का निर्णय लिया, जिसमें लिखा था, “यह पार्कसाइड चर्च की सम्पत्ति है।” पहले तो मैंने सोचा कि क्या हम यह आशा कर रहे हैं कि कोई व्यक्ति जो कचरे का डिब्बा चुराना चाहता होगा वह रुकेगा, स्टिकर पढ़ेगा और अनायास ही उसे वापस करने का निर्णय ले लेगा। यह बहुत ही बेकार का काम लग रहा था। तथापि मुझे जल्द ही पता चल गया कि मुझे सच में वस्तुओं पर इन छोटे स्टिकरों को देखकर आनन्द आने लगा था, जिन पर लिखा था, “यह कलीसिया की सम्पत्ति है”!

परमेश्वर के स्वामित्व और अनुग्रहपूर्ण प्रावधान के स्मृति चिह्न पूरे पवित्रशास्त्र में गूंजते हैं। जब राजा दाऊद मन्दिर के लिए योजना बनाने में लगा था तब उसने परमेश्वर के प्रावधान के बारे में स्पष्टता और दीनता के साथ स्वीकारा; वह जानता था कि एक सृजित संसार में सृजित प्राणियों के रूप में हम अपने सृष्टिकर्ता को केवल वही दे सकते हैं, जो हमें हमारे सृष्टिकर्ता ने पहले से हमें दिया है। नए नियम में भी प्रेरित पौलुस यह लिखता है, “तेरे पास क्या है जो तू ने (दूसरे से) नहीं पाया? और जब कि तू ने (दूसरे से) पाया है, तो ऐसा घमण्ड क्यों करता है कि मानो नहीं पाया?” (1 कुरिन्थियों 4:7)।

दाऊद के शब्द परमेश्वर के लोगों के लिए कोई नई अन्तर्दृष्टि प्रदान नहीं कर रहे थे। पीढ़ियों पहले जब इस्राएली परमेश्वर का निवास-स्थान बनाने की तैयारी कर रहे थे, तब मूसा ने इस्राएलियों को निर्देश दिया था, “तुम्हारे पास से यहोवा के लिए भेंट ली जाए” (निर्गमन 35:5)। और उनके पास था क्या? केवल वही तो था जो सृष्टिकर्ता द्वारा दिया गया था। केवल वही, जो उनको छुटकारा दिलाने वाले ने मिस्र से उनके निकलने के समय उन्हें दिया था (निर्गमन 12:35-36)। केवल वही था जो उनके जीवन के पालनहार ने उनके लिए सम्भव बनाया था (निर्गमन 35:30-35)।

कलीसिया की सम्पत्ति की तरह ही, जिस पर अब उसके नाम की परची लगी थी, हम कह सकते हैं कि हमारे पास जो कुछ भी है, निस्सन्देह सृष्टि की प्रत्येक वस्तु परमेश्वर के नाम की परची के साथ मुहरबन्द है। एक प्रभावशाली ईश्वर-विज्ञानी अब्राहम काइपर ने, जिन्होंने 20वीं सदी के आरम्भ में नीदरलैंड के प्रधानमंत्री के रूप में भी काम किया, कहा, “हमारे मानव अस्तित्व के पूरे शासन-क्षेत्र में एक भी इंच ऐसा नहीं है जिसके विषय में मसीह, जो सब  पर सम्प्रभु है, चीखकर यह न कहता हो कि यह ‘मेरा’ है।”[1]

यह दृष्टिकोण हमारी समकालीन संस्कृति से बहुत अलग है, जिसका झुकाव इन दो गलत धारणाओं की ओर जाता है कि या तो हम स्व-निर्मित लोग हैं या फिर पृथ्वी पर सब कुछ, जिसमें हम स्वयं भी हैं, ईश्वर है। बाइबल इसका विरोध करती है और कहती है, “पृथ्वी और जो कुछ उस में है यहोवा ही का है, जगत और उसमें निवास करने वाले भी” (भजन संहिता 24:1)।

जबकि हम यह स्मरण रखते हैं कि हमारे पास जो कुछ भी है वह सब उसी से आया है, इस कारण परमेश्वर हमें दीनता के साथ चलने का बुलावा दे रहा है। हमारे जीवनों से यह घोषणा होनी चाहिए, “मैं परमेश्वर का हूँ!” आपके पास परमेश्वर को देने के लिए ऐसा कुछ भी नहीं है, जो पहले से ही उसका नहीं है। इसलिए जैसे भी परमेश्वर आपको निर्देश देता है, उसके अनुग्रह के प्रत्युत्तर स्वरूप स्वेच्छा से और उदारता से दें,  चाहे वह आपका धन हो, आपका समय हो या आपके कौशल।

     2 कुरिन्थियों 8:1-15

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