22 फरवरी : परमेश्वर को जानना

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22 फरवरी : परमेश्वर को जानना
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“तब उन्हें फिर एक दूसरे से यह न कहना पड़ेगा कि यहोवा को जानो, क्योंकि, यहोवा की यह वाणी है, छोटे से लेकर बड़े तक, सब के सब मेरा ज्ञान रखेंगे।”  यिर्मयाह 31:34

यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता के दिनों में परमेश्वर ने अपने लोगों के साथ की गई वाचा को तोड़ने से इनकार कर दिया। यद्यपि उसकी महा करुणा के होने पर भी परमेश्वर के लोग पाप करते रहे। इससे एक समस्या उत्पन्न हो गई कि परमेश्वर अपने लोगों को आशीषित करने की अपनी प्रतिज्ञाओं को कैसे पूरा कर सकता था, जब कि वे लगातार उसके साथ विश्वासघात करते जा रहे थे?

अपनी महान योजना के एक भाग के रूप में परमेश्वर ने एक नई वाचा की प्रतिज्ञा की कि वह आन्तरिक पुनर्निर्माण का कार्य करेगा। जैसा कि थियोलॉजियन ऐलेक मौटियर लिखते हैं, “जब उसके लोग उसके मानकों की ऊँचाई तक नहीं पहुँच पाते हैं, तो प्रभु उनकी क्षमता के अनुरूप अपने मानकों को कम नहीं कर देता, बल्कि वह अपने लोगों को ही पूरी तरह से बदल देता है।”[1]

यह नई वाचा प्रभु यीशु के लहू के द्वारा हृदयों को नया जीवन प्रदान करने की परमेश्वर की योजना और प्रतिज्ञा है। जैसे किसी पहेली में एक टुकड़ा बिठाना हो, वैसे ही वह हमारे हृदयों को लेता है और उन्हें ऐसा सिद्ध आकार देता है कि उसकी व्यवस्था हमारे लिए हर्ष की बात बन जाती है।

परमेश्वर द्वारा इस नई वाचा का वर्णन किए जाने में क्रिया शब्द “जानना” ही कुंजी है। मूल इब्रानी भाषा में उत्पत्ति की पुस्तक के आरम्भ में ही इसका अर्थ स्पष्ट है। यह स्पष्ट वक्तव्य कि आदम ने अपनी पत्नी को “जाना” और उनके बच्चे हुए (उत्पत्ति 4:1), यह दर्शाता है कि यह कितनी निकटता व्यक्त करता है। परमेश्वर कह रहा है कि जब उसके लोग उसके प्रेम को समझ जाएँगे, तो वे केवल दूर से बाइबल अध्ययन नहीं करेंगे; वे ऐसे लोग बन जाएँगे जो वास्तव में उसे जानते होंगे।

यिर्मयाह जिस बात को भविष्य काल में कह रहा था, हम वर्तमान में उसका आनन्द लेने में सक्षम हैं, क्योंकि उसकी भविष्यद्वाणी और हमारे समय के बीच प्रभु यीशु ने मरने से एक रात पहले कटोरा लिया और कहा, “यह कटोरा मेरे उस लहू में, जो तुम्हारे लिए बहाया जाता है, नई वाचा है” (लूका 22:20)। परमेश्वर के अनुग्रह से आप और मैं राजाओं के राजा और प्रभुओं के प्रभु को जान सकते हैं। इतना ही नहीं, बल्कि वह हम में से प्रत्येक को व्यक्तिगत रूप से नाम से जानता है और हमारी आवश्यकताओं को भी जानता है तथा हमारी भलाई के लिए प्रतिबद्ध है। यीशु पिता के समक्ष हमारे नाम की साक्षी देता है, और वह जो कुछ भी है और उसने जो कुछ भी किया है उसके कारण हमारे नाम जीवन की पुस्तक में लिखे गए हैं।

यह किस तरह का राजा है? इसका उत्तर पूरी तरह से समझ पाना हमारी क्षमता से परे है। एक दिन हम उसे आमने-सामने देखेंगे और आज की तुलना में कहीं अधिक समझ सकेंगे। परन्तु फिर भी, आज आप उस हियाव के साथ आगे बढ़ सकते हैं, जो इस बात को जानने से आता है कि आप उस परमेश्वर को जानते हैं, जिसने आपको अपने पुत्र के द्वारा छुटकारा दिलाया है, जो अपने आत्मा के द्वारा आप में वास करता है और कार्य करता है, और जिसके सिंहासन के कक्ष में एक दिन आप खड़े होंगे।

यिर्मयाह 31:31-40

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