21 सितम्बर : उसके वचन का विशेषाधिकार

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21 सितम्बर : उसके वचन का विशेषाधिकार
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“क्योंकि उसकी ईश्वरीय सामर्थ्य ने सब कुछ जो जीवन और भक्ति से सम्बन्ध रखता है, हमें उसी की पहचान के द्वारा दिया है, जिसने हमें अपनी ही महिमा और सद्‌गुण के अनुसार बुलाया है।” 2 पतरस 1:3

आखरी बार कब आपने ठहरकर इस बात पर विचार किया कि परमेश्वर के वचन तक लगभग असीमित पहुँच होना कितना बड़ा विशेषाधिकार है? आज के दिनों में हम उसे अपनी जेब में लिए फिरते हैं और कुछ ही क्षणों में किसी भी अध्याय और पद को खोल सकते हैं, या यहाँ तक कि पूरी बाइबल में खोज कर सकते हैं।

सम्पूर्ण पवित्रशास्त्र तक त्वरित पहुँच हमें बहुत सामान्य लग सकती है। और फिर भी, हमें इस सम्मान पर अचम्भित होना चाहिए! इसके लेखक ने अपनी अंगुलियों से आकाश को रचा (भजन 8:3)। उसने स्वयं पवित्रशास्त्र को प्रेरित किया (2 तीमुथियुस 3:16)। इसकी सामग्री उत्तम सोने से भी अधिक अनमोल है (भजन 19:10), और इसकी सच्चाई सदा बनी रहेगी (1 पतरस 1:24)। बाइबल में हमें जीवन और भक्ति के लिए आवश्यक सब कुछ मिलता है—और वह कुछ भी नहीं जो हमें नहीं चाहिए। प्रत्येक अनुच्छेद सम्पूर्ण कथा में अपनी विशिष्ट भूमिका निभाता है, और फिर भी हर भाग उस एक महान कहानी में योगदान देता है। सबसे बढ़कर, यही वह साधन है जिसके द्वारा पवित्र आत्मा हमें परमेश्वर की “पहचान” में और गहराई से ले जाता है—जिसे हम “सम्बन्ध” भी कह सकते हैं, क्योंकि जिस यूनानी शब्द epignosis का पतरस उपयोग करता है, उसमें केवल बौद्धिक ज्ञान नहीं, बल्कि सम्बन्धात्मक ज्ञान का भाव निहित है। वचन के द्वारा ही हम अपने सृष्टिकर्ता को और अधिक निकटता से जान पाते हैं, जिसे महिमा देने और सदा आनन्दित होने के लिए हमें रचा गया है।[1]

हमारे प्रभु यीशु की सबसे लम्बी प्रार्थना में, जो पवित्रशास्त्र में दर्ज है, वह अपने लोगों के लिए बहुत समय तक प्रार्थना करता है। एक विशेष विनती में वह कहता है: “सत्य के द्वारा उन्हें पवित्र कर : तेरा वचन सत्य है” (यूहन्ना 17:17)। स्वयं यीशु परमेश्वर के वचन के सामर्थ्य को जानता था। जब शैतान ने उसे मरुभूमि में परखा, तो उसने पवित्रशास्त्र के सत्य से उत्तर दिया। एक स्थान पर उसने व्यवस्थाविवरण 8:3 से उद्धरण देकर हमें यह स्मरण दिलाया कि “मनुष्य केवल रोटी ही से नहीं, परन्तु हर एक वचन से जो परमेश्‍वर के मुख से निकलता है, जीवित रहेगा” (मत्ती 4:4)। यदि यीशु मसीह ने अपनी आत्मा को परमेश्वर के वचन से पोषित किया, तो हमें इसकी आवश्यकता कितनी अधिक है!

कभी-कभी किसी वस्तु तक निरन्तर और सहज पहुँच होने से हम उसके विशेषाधिकार को समझ नहीं पाते—जैसे पानी या बिजली। जब नल और बत्तियाँ ठीक से काम कर रही होती हैं, तो हम शायद ही उन्हें ध्यान में लाते हैं। परन्तु जब वे नहीं होतीं, तब हमें उनका मूल्य समझ में आता है! आइए हम परमेश्वर के वचन के साथ ऐसा व्यवहार न करें। परमेश्वर ने हमें अपने सत्य तक इतनी स्वतन्त्र पहुँच दी है। क्यों न हम उसे उठाएँ और पढ़ें? आप पवित्रशास्त्र में कैसे डूबेंगे और सत्य की उन किरणों में कैसे स्नान करेंगे, जिनमें जीवन और भक्ति के लिए आवश्यक सब कुछ समाहित है?

  भजन 119:33–40

पूरे वर्ष में सम्पूर्ण बाइबल पढ़ने के लिए: यहेजकेल 3–4; यूहन्ना 9:1-23 ◊


[1] वेस्टमिंस्टर शॉर्टर कैटेकिज़्म, उत्तर 1.

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