20 मई : अकल्पनीय अनुग्रह

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20 मई : अकल्पनीय अनुग्रह
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“हमको उसमें उसके लहू के द्वारा छुटकारा, अर्थात् अपराधों की क्षमा, उसके उस अनुग्रह के धन के अनुसार मिला है, जिसे उसने सारे ज्ञान और समझ सहित हम पर बहुतायत से किया।” इफिसियों 1:7-8

परमेश्वर की कृपा अपने लोगों के लिए कोई सीमा नहीं जानती और न ही किसी सीमा में बँधी रहती है। इस सत्य को जानने के लिए हमें कहीं और नहीं, बल्कि मसीह के क्रूस की ओर देखना होगा, जहाँ “हमको उसमें उसके लहू के द्वारा छुटकारा मिला है।”

निर्गमन की पुस्तक में, परमेश्वर ने फसह का नियम दिया, जिसने एक कीमत पर खरीदी गई स्वतन्त्रता का चित्र प्रस्तुत किया। उसने इस्राएलियों से कहा कि वे एक परिवार के लिए एक मेमना बलि करें और उसके लहू को अपने दरवाजे की चौखटों पर पोतें, ताकि मृत्यु का दूत उनके घर में न आने पाए जब वह मिस्र से गुज़रे। उन विश्वासियों के घरों के निवासी केवल इसलिए परमेश्वर के न्याय, अर्थात पहले पुत्र की मृत्यु होने से बच गए, क्योंकि उनके स्थान पर एक मेमने की मृत्यु हुई थी (निर्गमन 12:3-13)।

इस्राएली फिरौन के दास थे। इसी तरह, हम सभी इस संसार में पाप और मृत्यु के दास के रूप में आते हैं। हमारे उद्धार की कीमत मसीह का लहू था, जिसने विश्वास करने वाले सभी लोगों के लिए महान फसह के मेमने के रूप में उद्धार के कार्य को पूरा किया। उसका लहू हमें शाश्वत रूप से मृत्यु से निकाल कर जीवन में ले आता है। मसीह पृथ्वी पर यह बताने के लिए नहीं आया था कि हम अपने आप को मसीही कैसे बनाएँ। वह यह बताने के लिए भी नहीं आया था कि हमें अपने आप को बचाने के लिए क्या करना होगा। वह इसलिए आया था ताकि वह उस काम को करे, जो हम अपने आप को बचाने के लिए नहीं कर सकते थे। उसने हमारे बदले में कुछ किया और हमें वह क्षमा प्रदान की जो हमें तो मुफ्त में मिलती है, लेकिन जिसके लिए परमेश्वर ने बहुत बड़ी कीमत चुकाई है। हमें यह नहीं सोचना चाहिए कि परमेश्वर ने हमारे पापों को बस नजरअंदाज कर दिया; बल्कि क्रूस पर मसीह की मृत्यु ने उस न्याय को सोख लिया जो आपको और मुझे प्राप्त होना चाहिए था। परमेश्वर की पवित्रता माँगती है कि पाप का दण्ड चुकाया जाए और उसके पुत्र ने वह भुगतान किया।

जब पौलुस इस पर विचार करता है, तो वह यह कहने के लिए अभिप्रेरित होता है, “हमारे प्रभु यीशु मसीह के परमेश्‍वर और पिता का धन्यवाद हो!” (इफिसियों 1:3)। परमेश्वर की कृपा पर विचार करते हुए हमें हमेशा हमें स्तुति की ओर प्रेरित होना चाहिए। लेकिन ध्यान दें कि 7-8 पद में पौलुस किस वाक्यांश का प्रयोग करता है, “उसके उस अनुग्रह के धन के अनुसार . . . जिसे उसने . . . हम पर बहुतायत से किया ।” परमेश्वर की कृपा प्रचण्ड है। यह अत्यधिक है। उसने इसे अपने प्रत्येक सन्तान पर उण्डेला है, और कुछ भी पीछे नहीं रख छोड़ा है। और वह इसे शाश्वत रूप से जारी रखेगा।

कल्पना करें कि आपने एक उच्चतम दर्जे के रेस्तरां में अपना भोजन समाप्त कर लिया है और कोई व्यक्ति आपका बिल उठाता है, और कहता है, “तुम्हारा बिल मैं अदा करूँगा—मैं भुगतान करूँगा।” यही वह है जो परमेश्वर ने आपके लिए सबसे बड़े स्तर पर कहा है। वह यह नहीं कह रहा है कि कोई भुगतान नहीं किया जाना है। वह यह कह रहा है कि उसने पहले ही भुगतान कर दिया है। परमेश्वर की कृपा सभी सीमाओं से परे है, ये सीमाएँ हमारी आँखों की दृष्टि से और हमारे दिलों की कल्पना से बहुत परे हैं। इसलिए, हालाँकि आप पिछले दिन या सप्ताह को देखेंगे, आप पाएँगे कि आप पापी हैं, फिर भी आप यह भी जान सकते हैं: आप उतना पाप नहीं कर सकते जितना परमेश्वर क्षमा कर सकता है, और आप आश्वस्त हो सकते हैं कि जिसने आप में अच्छा काम आरम्भ किया है, वही उसे यीशु मसीह के दिन तक पूरा करेगा (फिलिप्पियों 1:6)। आप अनुग्रह पर अनुग्रह पर अनुग्रह का अनुभव शाश्वत रूप से करेंगे।

यह अनुग्रह ही था जिसने मुझे अब तक सुरक्षित रखा,

और वही अनुग्रह मुझे घर तक ले जाएगा।”[1]

होशे 3

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