2 जुलाई : विश्वास की विरासत

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2 जुलाई : विश्वास की विरासत
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“अब विश्‍वास आशा की हुई वस्तुओं का निश्चय, और अनदेखी वस्तुओं का प्रमाण है। क्योंकि इसी के विषय में प्राचीनों की अच्छी गवाही दी गई।” इब्रानियों 11:1-2

विश्वास कैसा दिखता है? इब्रानियों का लेखक अपनी पत्री के ग्यारहवें अध्याय में इस प्रश्न को सम्बोधित करते हुए हमें पुराने समय के संतों की एक सूची प्रस्तुत करता है—जो ऐसे पुरुष और महिलाएँ थे, जिन्हें उनके विश्वास के कारण सराहा गया। बाइबल में दर्ज प्रशंसा का यह विवरण इन व्यक्तियों को किसी महाशक्तिशाली स्तर पर उठाने के लिए नहीं है। इसके विपरीत, हमें नूह, मूसा और अन्य लोगों को सामान्य मनुष्यों के रूप में देखना चाहिए, जिनसे हम यह प्रेरणा और बल प्राप्त कर सकते हैं कि परमेश्वर ने उनकी सहायता कैसे की और उनके विश्वास का सम्मान कैसे किया।

यदि हम उनके जीवन्त और क्रियाशील विश्वास का अनुसरण करना चाहते हैं, तो सबसे पहले हमें यह समझना होगा कि उनका विश्वास क्या नहीं था। यह कोई भावनात्मक या परिस्थितियों से उत्पन्न होने वाली गर्मजोशी भरी भावना नहीं थी, और न ही यह एक अस्पष्ट धारणा थी कि अन्त में सब कुछ अपने आप ठीक हो जाएगा। नहीं, इन पुरुषों और महिलाओं के लिए विश्वास का अर्थ था—परमेश्वर ने जो कहा है, उस पर विश्वास करना, उसके वचन को स्वीकार करना और फिर अपने जीवन को उसी के अनुसार संचालित करना। दूसरे शब्दों में, जैसा कि इन वचनों में लिखा है, उनका विश्वास यह सुनिश्चित करने वाली दृढ़ निष्ठा थी कि परमेश्वर की प्रतिज्ञाएँ निश्चित रूप से पूरी होंगी।

इसके अतिरिक्त, पुराने समय के इन संतों ने अपने भविष्य की वास्तविकता को ऐसे देखा, मानो वह वर्तमान में ही घट रही हो, और जो अदृश्य था उसे उन्होंने ऐसे देखा, मानो वह सब अपनी आँखों से देख रहे हों। भले ही उन्होंने अपने जीवनकाल में परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं को पूरा होते न देखा हो, फिर भी उन्होंने अनन्तकाल के दृष्टिकोण से उसके वचन की विश्वासयोग्यता पर भरोसा किया। उनका विश्वास उनकी वर्तमान परिस्थितियों पर आधारित नहीं था, बल्कि उस पर आधारित था जिसने उनके भविष्य के लिए प्रतिज्ञाएँ दी थीं।

अपने विश्वास को इतने स्पष्ट रूप से जीकर, इन संतों ने अपने समय में एक क्रान्तिकारी प्रभाव डाला—और हम भी अपने समय में ऐसा ही कर सकते हैं। जब कोई व्यक्ति, दम्पत्ति, परिवार, या कलीसिया परमेश्वर के वचन पर विश्वास करके उसके अनुसार कार्य करने के लिए तैयार होता है, तो जीवन बदल जाते हैं। यदि हम ऐसा करेंगे, तो हम परमेश्वर को और अधिक स्पष्ट रूप से समझ पाएँगे, उसके कार्यों को पहचानेंगे और इस संसार में तथा अनन्तकाल के लिए प्रभाव डालने के लिए बेहतर रूप से तैयार होंगे।

इब्रानियों 11 में प्रस्तुत सभी संतों के जीवन की एक विशेष समानता थी, एक ऐसा गुण जो उन्हें इन विशिष्ट लोगों की सूची में ले आया, वह जीवित परमेश्वर पर उनका विश्वास था—ऐसा आश्वासन कि परमेश्वर की प्रतिज्ञाएँ उनकी आशाओं के बोझ को उठा सकती थीं और ऐसी कायलता कि परमेश्वर ने जो कहा था, वह इतना वास्तविक था कि मानो वे उसे अपनी आँखों से देख सकते थे। क्या आपका विश्वास भी ऐसा ही है? मसीह में परमेश्वर की उन सभी प्रतिज्ञाओं पर ध्यान करें जो आपकी हैं। इतिहास में परमेश्वर द्वारा पूरी की गई सभी प्रतिज्ञाओं पर मनन करें, विशेष रूप से उसके पुत्र की मृत्यु और पुनरुत्थान पर मनन करें। तब आप आनन्द और दृढ़ संकल्प के साथ अपने जीवन की प्राथमिकताएँ निर्धारित कर सकेंगे और अपने निर्णय अपनी परिस्थितियों के आधार पर लेने के बजाय उसकी प्रतिज्ञाओं के आधार पर लेंगे।

इब्रानियों 11

◊ पूरे वर्ष में सम्पूर्ण बाइबल पढ़ने के लिए: व्यवस्थाविवरण 16–18; प्रेरितों 4:23-37

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