2 अगस्त : परमेश्वर के सिवा भलाई कहीं नहीं

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2 अगस्त : परमेश्वर के सिवा भलाई कहीं नहीं
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“हे ईश्वर मेरी रक्षा कर, क्योंकि मैं तेरा ही शरणागत हूँ। मैंने परमेश्‍वर से कहा, ‘तू ही मेरा प्रभु है; तेरे सिवा मेरी भलाई कहीं नहीं।’” भजन 16:1-2

इस जीवन में आप किस वस्तु को अनमोल समझते हैं? हम सबके पास कुछ न कुछ ऐसा होता है जो हमें बहुत आनन्द देता है, या कोई ऐसा स्थान जो हमें विश्रामदायक और ठीक प्रतीत होता है। परन्तु कभी-कभी हमें सांसारिक सुखों के बिना जीवन की एक झलक मिल जाती है। शायद बीमारी के द्वारा, या यहाँ तक कि किसी प्रिय के निधन के द्वारा, बातें हमारे लिए स्पष्ट हो जाती हैं। जब आपको यह पता चलता है कि आपके किसी प्रिय को घातक कैंसर का निदान हुआ है, तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि अस्पताल से बाहर निकलते समय आप कौन-सी गाड़ी चला रहे होते हैं—क्या उससे कोई फर्क पड़ता है? आपके वस्त्र, आपके आभूषण, आपके उपकरण, आपका घर—अचानक वे सब उतने महत्त्वपूर्ण नहीं रह जाते जितने पहले प्रतीत होते थे।

परमेश्वर द्वारा अनुग्रह से दी गई वस्तुओं का हम आनन्द ले सकते हैं और हमें लेना भी चाहिए। वह “हमारे सुख के लिए सब कुछ बहुतायत से देता है” (1 तीमुथियुस 6:17)। ऐसा नहीं है कि पृथ्वी की अच्छी वस्तुएँ बुरी हैं। परन्तु जो हमें परमेश्वर में प्राप्त होता है, वह इतना मधुर, इतना समृद्ध है कि उसे जान लेना उस छिपे हुए खजाने को पाने के समान है जो किसी खेत में छिपा हो। वह खजाना हमें ऐसा मग्न कर देता है कि अपने आनन्द में हम वह खेत और उसमें निहित सब कुछ प्राप्त करने के लिए जो कुछ आवश्यक हो, कर डालते हैं (मत्ती 13:44)।

परमेश्वर में जो खजाना हमें प्राप्त है उसके बिना, जैसा कि भजन 16 हमें बताता है, अन्ततः हमारे पास कोई और भलाई नहीं रहती। जब हम रोटी या दलिया या जो भी हमारा नाश्ता हो, उसे लेकर बैठते हैं, तो हमें अपने मन में कहना चाहिए, हे प्रभु, तेरे सिवा मेरी भलाई कहीं नहीं। तू ही है जिसने अन्न को उगने दिया। तू ही है जो मुझे भोजन देता है। जब हम उठते हैं और द्वार से बाहर निकलते हैं, और हमारे पास ऐसा करने के लिए स्वास्थ्य और सामर्थ्य होता है, तो वह किसके द्वारा सम्भव होता है? जब हम रात को अपने बिस्तर पर लेटते हैं और सन्ध्या के विश्राम में प्रवेश करते हैं, तो यह किसके कारण सम्भव होता है?

परमेश्वर के समर्थ करने वाले अनुग्रह के बिना, आपके पास इन अक्षरों को देखने, इस पुस्तक को पकड़ने, या जो आप पढ़ रहे हैं उसे समझने का भी कोई सामर्थ्य नहीं है। केवल वही हमें सुरक्षित रख सकता है और सम्भाल सकता है। केवल परमेश्वर ही हमें “जीवन और श्वास और सब कुछ” देता है (प्रेरितों 17:25)। अन्त में, उससे अलग हमारे पास कोई भलाई नहीं—परन्तु उसमें इतनी भलाई है जो सबके लिए पर्याप्त है। वही हमारे सब खजानों का स्रोत है—और वही स्वयं हमारा सबसे बड़ा खजाना है। जब आप उसे वैसा ही देखते हैं जैसा वह वास्तव में है, तो आपकी स्वाभाविक प्रतिक्रिया यही होगी कि आप उसे अपने जीवन का केन्द्र बना लें, जिसके चारों ओर आपके विचार, निर्णय, भावनाएँ और कार्य घूमते रहें। अर्थात्, आप उससे यह कहेंगे, “तू ही मेरा प्रभु है,” क्योंकि उसकी उपस्थिति में “आनन्द की भरपूरी है,” और उसके दाहिने हाथ में “सुख सर्वदा बना रहता है” (भजन 16:11)। फिर आप और कहाँ शरण लेना चाहेंगे, और उससे बढ़कर किसे अनमोल ठहराएँगे?

मत्ती 13:44-46
पूरे वर्ष में सम्पूर्ण बाइबल पढ़ने के लिए: भजन 60– 62; प्रेरितों 22 ◊

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