19 फरवरी : कुड़कुड़ाने की कीमत

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19 फरवरी : कुड़कुड़ाने की कीमत
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“फिर वे लोग बुड़बुड़ाने और यहोवा के सुनते बुरा कहने लगे; अतः यहोवा ने सुना, और उसका कोप भड़क उठा।”  गिनती 11:1

मसीही जीवन में कुड़कुड़ाने के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए।

यह एक ऐसी सीख थी जिसे इस्राएल ने कठिन रीति से सीखा (और धीरे-धीरे सीखा)। परमेश्वर द्वारा उन्हें मिस्र की बँधुआई से मुक्त कराए जाने के बाद इस्राएलियों को परमेश्वर का व्यवस्था-विधान मिला, उन्हें उसकी आज्ञाएँ दी गईं और उन्हें अपना गन्तव्य स्थान पता लगा। वे उत्सुकता से प्रतिज्ञा किए गए देश तक पहुँचने के लिए निकल पड़े, किन्तु अभी वे बहुत दूर भी नहीं जा पाए थे—शायद सड़क के पहले मोड़ के आस-पास ही पहुँचे थे—कि वे कुड़कुड़ाने लगे। वे मन्ना नहीं मांस खाना चाहते थे, और यहाँ तक कि वे चाहते थे कि वे वापस मिस्र लौट जाएँ (गिनती 11:4-6)। जबकि एक बार उन्होंने सोचा था कि परमेश्वर द्वारा मन्ना का दैनिक प्रावधान उनके लिए उसके प्रेम का एक अद्‌भुत संकेत था, परन्तु अब वे वही पुरानी वस्तु खाने के बारे में कुड़कुड़ाने लगे थे।

कुड़कुड़ाना एक छोटी सी बात लगती है, किन्तु यह आभार की कमी की ओर संकेत करती है। जब भी आभार की कमी और अविश्वास परमेश्वर की सन्तानों के जीवन में दिखाई देती है, तो निश्चित रूप से उसके परिणाम सामने आते हैं। हो सकता है कि हमारा अन्त उन इस्राएलियों की तरह न हो, जो 40 साल तक मरुभूमि में भटकते रहे, परन्तु हमें भी हमारे कुड़कुड़ाने की कीमत चुकानी पड़ती है।

क्या आपको स्मरण है कि आपने पहली बार अपने नए विश्वास की उत्तेजना कब महसूस की थी? हो सकता है कि आपने नए नियम की अपनी पहली प्रति मोल ली हो और सोचा हो कि जो कुछ भी आपको मिलता जा रहा है, वह बहुत अच्छा है। आप उसे हर जगह पढ़ा करते थे। फिर संयोग से, चलते-चलते कुछ ऐसा हुआ कि अब वह केवल “वही पुरानी बाइबल” लगती है और आप चाहते हैं कि परमेश्वर कुछ और प्रभावशाली, कुछ बड़ा करे? क्या आपको वह समय याद है, जब आपको अपने विश्वास के बारे में दूसरों को बताना एक रोमांचक विशेषाधिकार लगता था, परन्तु अब यह एक बोझ और दायित्व की तरह लगता है? क्या आपको वह समय याद है जब आप क्रूस के लिए आभार से भरे हुए थे, परन्तु अब आप सोचते रहते हैं कि परमेश्वर आपको उन मार्गों या स्थानों पर से क्यों नहीं लेकर गया, जहाँ से आप जाना चाहते थे?

जब प्रेरित पौलुस ने प्रारम्भिक कलीसिया को लिखा तब उसने उन्हें चेतावनी के रूप में इस्राएल की कहानी स्मरण कराते हुए कहा, “न हम प्रभु को परखें, जैसा उनमें से कितनों ने किया, और साँपों के द्वारा नष्ट किए गए। और न तुम कुड़कुड़ाओ, जिस रीति से उनमें से कितने कुड़कुड़ाए और नष्ट करने वाले के द्वारा नष्ट किए गए। परन्तु ये सब बातें, जो उन पर पड़ीं, दृष्टान्त की रीति पर थीं; और वे हमारी चेतावनी के लिए जो जगत के अन्तिम समय में रहते हैं लिखी गईं हैं” (1 कुरिन्थियों 10:9-11)।

यदि हमें मसीह पर विश्वास है, तो हम पाप के दासत्व के मुक्त करा दिए गए हैं, यहाँ तक कि हमारी कुड़कुड़ाहट से भी! हम एक बलिदान द्वारा, अर्थात् क्रूस पर मसीह के लहू बहाए जाने के कारण मुक्त किए गए हैं। और हम भी एक यात्रा पर निकल पड़े हैं, जो कनान की ओर नहीं परन्तु स्वर्ग की है। उसे ध्यान में रखते हुए परमेश्वर ने हमें अद्‌भुत प्रतिज्ञाएँ और आवश्यक चेतावनियाँ दी हैं। उसके प्रावधान को कम महत्त्व का न समझें और न ही उस मार्ग के बारे में कुड़कुड़ाएँ जिस पर वह आपको ले जाता है, बल्कि उसके द्वारा भौतिक और आत्मिक रूप से प्रदान की गई सभी वस्तुओं के लिए आभार से भरे रहें। क्रूस आपके पीछे है, स्वर्ग आपके सामने है और पवित्र आत्मा आपके भीतर वास करता है। कुड़कुड़ाने की न तो कोई आवश्यकता है और न ही ऐसा करने के लिए कोई बहाना है।      भजन संहिता 95

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