18 सितम्बर : महान उलटफेरों का परमेश्वर

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18 सितम्बर : महान उलटफेरों का परमेश्वर
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“जिस दिन राजा की आज्ञा और नियम पूरे होने को थे, और यहूदियों के शत्रु उन पर प्रबल होने की आशा रखते थे, परन्तु इसके विपरीत यहूदी अपने बैरियों पर प्रबल हुए।” एस्तेर 9:1

हामान और उसके साथियों को पूरा विश्वास था कि बारहवें महीने के तेरहवें दिन यहूदी जाति का विनाश अवश्यम्भावी है। यह आज्ञा सारे राज्य में घोषित हो चुकी थी। यहूदियों का सर्वनाश होना तय समझा जा रहा था। परन्तु जब वह दिन आया, तो यहूदियों ने अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त की। हामान और उसके मित्रों ने लगभग एक वर्ष यह ठहराने में लगाया था कि उनके शत्रुओं को मारने के लिए कौन सा दिन सबसे उपयुक्त होगा (एस्तेर 3:7)। इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि लेखक उस दिन को विशेष रूप से चिह्नित करता है, जब बड़ा उलटफेर हुआ—“जिस दिन” को हामान ने चुना था!

यह एस्तेर की पुस्तक में कई बड़े उलटफेरों में से केवल एक है। इससे पहले हामान अभी राजा और रानी एस्तेर के साथ भोज से निकलकर ऐसा अनुभव कर रहा था मानो वह संसार की चोटी पर हो। वह अपने घर गया और अपनी पत्नी और मित्रों से “अपने धन के वैभव, और अपने बाल–बच्चों की बढ़ती” का वर्णन किया (एस्तेर 5:11)। परन्तु उसी दिन, जिस दिन को हामान ने चुना था, उसके दसों पुत्र—जो उसकी शान थे—मार डाले गए (9:7–10)। उसका घराना वैभव से गिरकर विनाश में पहुँच गया।

मौर्दकै का अनुभव इसके ठीक विपरीत था। वह गुमनामी और स्पष्ट महत्त्वहीनता से उठकर राजा के अधीन सबसे शक्तिशाली व्यक्ति बन गया। उसका आरम्भ इस साधारण रीति से हुआ था, “शूशन गढ़ में मोर्दकै नामक एक यहूदी रहता था” (एस्तेर 2:5), जो राजा के फाटक पर बैठता था—जो कुछ खास नहीं लगता! परन्तु पुस्तक के अन्त तक वह ऐसा हो गया कि “मोर्दकै तो राजा के यहाँ बहुत प्रतिष्ठित था, और उसकी कीर्ति सब प्रान्तों में फैल गई; वरन् उस पुरुष मोर्दकै की महिमा बढ़ती चली गई” (9:4)।

मौर्दकै और एस्तेर ने अपने शत्रुओं के विनाश पर घमण्ड नहीं किया। परन्तु उन्होंने अपने यहूदी समाज के साथ नृत्य किया और आनन्द मनाया (एस्तेर 9:18), क्योंकि उन्होंने पहचाना कि ये उलटफेर परमेश्वर की ओर से थे, और इसलिए वे उनकी दृष्टि में अद्‌भुत थे (भजन 118:23)। हम उन्हें मानो उद्धार का यह गीत गाते हुए सुन सकते हैं:

तू ने मेरे लिए विलाप को नृत्य में बदल डाला;

तू ने मेरा टाट उतरवाकर मेरी कमर में आनन्द का पटुका बाँधा है,

ताकि मेरी आत्मा तेरा भजन गाती रहे और कभी चुप न हो।

हे मेरे परमेश्‍वर यहोवा, मैं सर्वदा तेरा धन्यवाद करता रहूँगा!” (भजन 30:11–12)

परमेश्वर महान उलटफेरों का परमेश्वर है। वह शाप को आशीष में बदल सकता है। वह असम्भव को सिद्ध करता है; “अपरिवर्तनीय” शब्द उसके लिए अर्थहीन है, और कोई भी परिस्थिति उसके लिए अजेय नहीं है। कलवरी का क्रूस इसका सर्वोच्च और अनन्त प्रमाण है।

यदि आप ऐसी परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं जो निराशाजनक प्रतीत होती हैं, तो सहायता के लिए परमेश्वर को पुकारें। चाहे आपको अपनी सारी सांसारिक यात्रा में प्रतीक्षा ही क्यों न करनी पड़े, वह आपको छुड़ाने की प्रतिज्ञा करता है। और यदि आप अपने जीवन में पहले ही परमेश्वर के किसी उलटफेर का अनुभव कर चुके हैं, तो समय निकालकर उसका धन्यवाद करें और उसकी स्तुति गाएँ। वह निश्चय ही भला है!

  एस्तेर 9:1–19

◊ पूरे वर्ष में सम्पूर्ण बाइबल पढ़ने के लिए: आमोस 4– 6; यूहन्ना 7:28-53

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