18 जुलाई : परमेश्वर का राजा

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18 जुलाई : परमेश्वर का राजा
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“फिर परमेश्‍वर ने उससे (याकूब से) कहा, ‘मैं सर्वशक्तिमान परमेश्वर हूँ। तू फूले–फले और बढ़े; और तुझ से एक जाति वरन् जातियों की एक मण्डली भी उत्पन्न होगी, और तेरे वंश में राजा उत्पन्न होंगे।’” उत्पत्ति 35:11

न्यायियों की पुस्तक इस्राएलियों की कहानी बताती है, जब उनके नेता यहोशू के निधन के बाद वे प्रतिज्ञा के देश में निवास करने लगे। यह एक निराशाजनक कहानी है क्योंकि लोग बहुत जल्दी बगावत करने लगे, और एक ऐसा चक्र आरम्भ हुआ जो इस पुस्तक में बार-बार दोहराया जाता है। पहला, लोग पाप करते; दूसरा, परमेश्वर उन्हें पराजित और उत्पीड़ित होने देता; तीसरा, वे मदद के लिए रोते; और चौथा, परमेश्वर एक न्यायाधीश या नेता को उठाकर इस्राएल के शत्रुओं को हराता और देश में शान्ति स्थापित करता। लेकिन शान्ति कभी लम्बे समय तक नहीं रहती थी और यह चक्र फिर से दोहराया जाता था।

न्यायियों की अवधि के दौरान, इस्राएल धार्मिक, सामाजिक, नैतिक और आर्थिक दृष्टि से ढह रहा था। इसके परिणामस्वरूप, लोग सोचने लगे कि यदि एक राजा नियुक्त किया जाए तो जीवन बहुत बेहतर हो जाएगा, जैसा कि परमेश्वर ने याकूब से कहा था कि एक राजा का उदय होगा। फिर भी, अपने आस-पास के राष्ट्रों के समान बनने की इच्छा में उन्होंने परमेश्वर के राजत्व को नकार दिया और इस प्रकार उस अवस्था को त्याग दिया जो उन्हें अद्वितीय बनाती थी। उन्होंने परमेश्वर-तन्त्र के स्थान पर एक राज-तन्त्र की मांग की। और ऐसे राजा की तलाश करने के बजाय जो परमेश्वर की अधीनता में रहकर शासन करता और उन्हें परमेश्वर के नियमों के आज्ञापालन में स्थापित रखता, वे ऐसे राजा की तलाश करने लगे जो परमेश्वर के बजाय स्वयं उनपर शासन करे।

अद्‌भुत बात यह है कि इस्राएलियों की पापपूर्ण इच्छाओं के बावजूद परमेश्वर ने उनकी मांग को पूरा किया। इस्राएल के बहुत से राजा हुए, लेकिन कभी वह राजा नहीं आया जिसकी उन्हें सचमुच जरूरत थी। अभी एक और महान राजा आने वाला था।

इसमें भी परमेश्वर ने अपनी योजना को पूरा किया। उसने लोगों की संकीर्ण दृष्टि और दूसरे राष्ट्रों के राजा जैसे राजा की मांग को अपने परम उद्देश्य को पूरा करने के लिए इस्तेमाल किया, जिसके माध्यम से ऐसा राजा आने पर था जो अन्ततः सब राष्ट्रों पर शासन करेगा। आग चलकर इस्राएल के राजवंश में यीशु का जन्म हुआ—वह आने वाला राजा जिसकी प्रतिज्ञा परमेश्वर ने की थी—वह जिसका “न तो यहूदा से राजदण्ड छूटेगा, न उसके वंश से व्यवस्था देने वाला अलग होगा; और राज्य-राज्य के लोग उसके अधीन हो जाएँगे।” (उत्पत्ति 49:10)। सच्चा राज्य मसीह द्वारा स्थापित किया जाएगा, जो परमेश्वर के अधिकार के तहत शासन करेगा और जो अयोग्य लोगों के लिए परमेश्वर का सर्वोत्तम उपहार होगा।

देखिए कितना महान है परमेश्वर, जो अपनी योजनाओं में मूर्खतापूर्ण मांगों और बुरी इच्छाओं को भी समेट लेता है! परमेश्वर हमारे चुनावों और गलतियों से बहुत बड़ा है। वह हर गलत कदम पर पूरी तरह से शासन करता है। चाहे हम इस्राएल की तरह कभी-कभी असफल हो जाते हैं, तौभी हम निश्चिन्त हो सकते हैं कि अपने उद्देश्यों को पूरा करते हुए परमेश्वर हमारी विफलताओं पर विजय प्राप्त करेगा। और आज हम किसी अन्य वस्तु या व्यक्ति की सेवा करने के बजाय खुशी-खुशी उसके राजा की आज्ञाओं का पालन कर सकते हैं।

2 शमूएल 7

◊ पूरे वर्ष में सम्पूर्ण बाइबल पढ़ने के लिए: भजन 20–22; प्रेरितों 13:26-52

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