“तूने अपने लहू से हर एक कुल और भाषा और लोग और जाति में से परमेश्वर के लिए लोगों को मोल लिया है, और उन्हें हमारे परमेश्वर के लिए एक राज्य और याजक बनाया; और वे पृथ्वी पर राज्य करते हैं।” प्रकाशितवाक्य 5:9-10
मैं वेल्स की रहने वाली मैरी फिशर नामक एक स्त्री के साथ बाइबल कॉलेज में था, जो मिशनरी बनने आई थी। वह शौना भाषा का अध्ययन कर रही थी, ताकि वह ज़िम्बाब्वे में युवा लड़के और लड़कियों को पढ़ा सके। उसके वहाँ पहुँचने के कुछ ही समय बाद, जिस विद्यालय में वह पढ़ा रही थी, उस पर आतंकी हमला हुआ। कई अन्य शिक्षकों और बच्चों के साथ-साथ मैरी भी बच नहीं पाई; उस हमले में उसकी जान चली गई।[1] यद्यपि उसकी मृत्यु दुखद थी, किन्तु उसके जीवन ने न केवल यहाँ, बल्कि अनन्त काल तक परमेश्वर की सेवा करने के सर्वोच्च आनन्द की साक्षी दी।
प्रकाशितवाक्य में मेमने के चारों ओर एकत्रित प्राचीनों के गीत में हमें यह स्मरण कराया जाता है कि मसीह की मृत्यु का उद्देश्य यह था कि हम परमेश्वर द्वारा मोल लिए जा सकें। हमें उस पाप से मुक्त किया गया है, जिसने हमें अपनी पकड़ में रखा था कि उसके लहू द्वारा मोल लिए जाने के बाद हम उसके लिए जीएँ। हमारी स्तुति परमेश्वर के लिए है। मैरी फिशर के समान हमारी सेवा भी परमेश्वर के लिए है।
जब पहली सदी के विश्वासियों ने अपने आस-पास देखा और जाना कि उनके कुछ मित्रों को उनके विश्वास के कारण बन्दी बना लिया गया है, तो वे मृत्यु पर मसीह के जयवन्त होने, उसके स्वर्गारोहण की जीत और उसकी वापसी की वास्तविकता को समझने का प्रयास करने लगे। जिस क्लेश का वे सामना कर रहे थे, उसे ध्यान में रखते हुए ये मसीही इस बात की स्मृति में प्रोत्साहन पा सके कि जब यीशु हमारे पापों के लिए प्रायश्चित्त कर रहा था तब भी उसका ध्यान हर समय पिता पर केन्द्रित था। उसने हमें परमेश्वर के लिए मोल लिया था।
हम मिशनरी आत्मकथाओं में बताई गई त्रासदियों को कैसे समझ सकते हैं या शहीदों की मृत्यु में दिखने वाली स्पष्ट आक्रामक अराजकता को कैसे समझा सकते हैं? मैरी फिशर की अन्तिम रिकॉर्डिंग इस बात में स्पष्टता प्रदान करती है। एक गायिका और गिटार वादक के रूप में वह अपनी कक्षा में बच्चों को फिलिप्पियों की कलीसिया को लिखे पौलुस के शब्दों पर आधारित एक गीत के बोल सिखा रही थी: “मेरे लिए जीवित रहना मसीह है, और मर जाना लाभ है” (फिलिप्पियों 1:21)।[2] यह गीत आगे कहता है कि उसके मार्ग पर चलना और उसका हाथ थाम लेना ही शान्ति और आनन्द का मार्ग है।