“और बोअज़ बैतलहम से आकर लवने वालों से कहने लगा, ‘यहोवा तुम्हारे संग रहे;’ और वे उससे बोले, ‘यहोवा तुझे आशीष दे।’” रूत 2:4
आप एक व्यक्ति के “अभिवादन” से उसके बारे में बहुत कुछ जान सकते हैं।
जब बोअज़ अपने खेत में (और रूत की पुस्तक में) प्रवेश करता है और अपने मजदूरों को अभिवादन करता है, तो उसके चरित्र और परमेश्वर के साथ उसके सम्बन्ध की गहराई स्पष्ट हो जाती है।
बोअज़ परमेश्वर की उपस्थिति के प्रति जागरूकता के साथ जीता था, और यह उसके दैनिक कार्यों में दिखता था। यह बात पुराने नियम के कई सन्तों के बारे में भी सच थी। उन्होंने पवित्र और सांसारिक के बीच कोई भेद नहीं देखा; बल्कि, उनका मानना था कि सम्पूर्ण जीवन को परमेश्वर के सामने जीया जाना चाहिए। जब आप और मैं इसी तरह की श्रद्धा के साथ जीते हैं, तो हम अपने शब्दों और सम्बन्धों में एक क्रान्तिकारी परिवर्तन और आशीर्वाद अनुभव करते हैं।
ध्यान दें कि जब बोअज़ आया, तो उसने परमेश्वर का नाम आसानी से या अपशब्दों के रूप में नहीं लिया। उन्होंने सोच-समझकर और श्रद्धा के साथ परमेश्वर के नाम का उपयोग किया और अपने जीवन में परमेश्वर के अधिकार तथा घनिष्ठता को स्वीकारा। ऐसी श्रद्धा हमारी बातचीत में उथलेपन को रोकती है और हमें हर परिस्थिति में—लेटते हुए, उठते हुए, रास्ते पर चलते हुए, या दूसरों से बातचीत करते हुए— परमेश्वर का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित करती है (व्यवस्थाविवरण 6:7)।
अपने खेत में प्रवेश करते ही बोअज़ ने अपने मजदूरों को आशीर्वाद देकर उनके लिए एक अच्छा वातावरण तैयार कर दिया। उसके उदाहरण को हमें यह पूछने के लिए प्रेरित करना चाहिए, “मैं अपने कार्यस्थल में, अपने घर में, किराने की दुकान में, अपनी कलीसिया में कौन सा वातावरण बना रहा हूँ?” यदि आपके जीवन में प्रभु का आशीर्वाद और सन्तोष है, फिर चाहे आप सी.ई.ओ. हों या प्रशिक्षु, चाहे आपका काम हिसाब-किताब रखना हो या अनगिनत डायपर बदलना, आप अपने सभी कामों और शब्दों में परमेश्वर को सन्दर्भित करके आशीर्वाद पर आशीर्वाद लौटा सकते हैं।
यदि मसीह सचमुच आपके जीवन में प्रभु और उद्धारक के रूप में आ गया है, तो आपका विश्वास हर पल गूँजना चाहिए। “परमेश्वर के साथ समय” को केवल पन्द्रह मिनट की दैनिक बैठक के रूप में न लें, यह उम्मीद करते हुए कि यह आपको पूरे दिन सम्भाले रखेगा। आप कभी भी दूसरों को उस परमेश्वर की उपस्थिति में नहीं ले जा पाएँगे, जिनकी उपस्थिति में आप स्वयं नहीं जीते। अपनी बातचीत में उसका उल्लेख करें। अपने दिन की छोटी सफलताओं और कठिनाइयों में उसकी उपस्थिति और प्रतिज्ञाओं को याद करें। अपने दिनभर के समय में उसके साथ बातचीत करने की आदत बनाने का प्रयास करें। परमेश्वर की उपस्थिति के प्रति जागरूकता के साथ जीएँ, और यह आपके कार्यों और प्रतिक्रियाओं में दिखने लगेगा।
केवल, हे प्रभु, अपने प्रिय प्रेम में,
हमें ऊपर के पूर्ण विश्राम के लिए तैयार कर;
और मदद कर, कि आज और हर दिन,
हम प्रार्थना करते हुए तेरे समीप जीवन जी सकें।[1]
कुलुस्सियों 4:2-6