17 मार्च : प्रार्थना के द्वारा छुटकारा

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17 मार्च : प्रार्थना के द्वारा छुटकारा
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“मैं जानता हूँ कि तुम्हारी विनती के द्वारा, और यीशु मसीह की आत्मा के दान के द्वारा, इसका प्रतिफल मेरा उद्धार होगा।”  फिलिप्पियों 1:19

क्या आपके जीवन में ऐसे लोग हैं, जिनके लिए आप इसलिए प्रार्थना नहीं करते क्योंकि आपको लगता है कि उन्हें इसकी आवश्यकता नहीं है? हमारे सीमित मानवीय दृष्टिकोण में यह सहज बात हो सकती है कि हम उन लोगों को अनदेखा कर दें, जो बाहर से पूरी तरह व्यवस्थित दिखते हैं। किन्तु सच्चाई यह है कि हम सभी को दूसरों की प्रार्थनाओं की आवश्यकता होती है और हमें उन प्रार्थनाओं से लाभ भी होता है।

जब प्रेरित पौलुस जेल में था, तो उसने फिलिप्पियों की कलीसिया को लिखा और कहा कि वह जानता है कि उसका छुटकारा न केवल पवित्र आत्मा की सहायता से होगा, परन्तु परमेश्वर के लोगों की प्रार्थनाओं के द्वारा भी होगा। चाहे उसका तात्पर्य अपनी तात्कालिक कठिनाइयों से छुटकारा हो या उसे मसीह की उपस्थिति में ले जाने वाला अन्तिम उद्धार, पौलुस चाहता था कि फिलिप्पी में उसके मसीही मित्र यह जानें कि सेवाकार्य में बने रहने के लिए वह दूसरों की प्रार्थनाओं पर निर्भर था।

ऐसा उसने केवल इस मण्डली को ही नहीं कहा था। जब पौलुस ने रोम के मसीहियों को लिखा तब भी उसने यही बात कही थी, “हे भाइयो, हमारे प्रभु यीशु मसीह के और पवित्र आत्मा के प्रेम का स्मरण दिला कर मैं तुम से विनती करता हूँ कि मेरे लिए परमेश्‍वर से प्रार्थना करने में मेरे साथ मिलकर लौलीन रहो कि मैं . . . बचा रहूँ” (रोमियों 15:30-31)। वह चाहता था कि वे साथ मिलकर संघर्ष करें और ताजगी से भरे रहें। वह चाहता था कि उसकी सेवा संतों के लिए सहायक हो। वह चाहता था कि उसे उद्धार मिले। और उसने उनसे कहा कि यह सब उनकी प्रार्थनाओं के माध्यम से ही पूरा किया जा सकता है! जैसा कि प्रसिद्ध अंग्रेज प्रचारक सी.एच. स्पर्जन ने कहा था कि प्रार्थना वह रस्सी है जो परमेश्वर की उपस्थिति में लगी घंटियाँ बजाती है।[1] परमेश्वर के प्रावधान में यह उसकी पद्धति, उसकी योजना और उसकी शक्ति को खोल देती है।

परमेश्वर को पुकारो, यही वह बात है जो पौलुस हमें करने के लिए प्रेरित कर रहा है। यदि हम परमेश्वर के आत्मा को एक ऐसे तरीके से कार्य करते देखना चाहते हैं जिसे केवल अलौकिक कहा जा सकता है, तो हमें पहले गम्भीरता से, दीनता से और निरन्तर प्रार्थना करने के लिए तैयार होना होगा। पौलुस के शब्द हमें बताते हैं कि जब हम अन्य संतों के साथ मिलकर काम करते हैं, तो हम उनकी निर्बलताओं में उनकी सहायता कर सकते हैं। हम उनको साहस प्रदान किए जाने की प्रार्थना कर सकते हैं। हम उनके उद्धार में एक भूमिका निभा सकते हैं।

आप किसे जानते हैं, जिसे आपकी प्रार्थनाओं की आवश्यकता है? क्या आप लगन के साथ, साहसिक रूप से और हठ के साथ उनके लिए प्रार्थना करेंगे? और आप किसे जानते हैं जो बाहर से ऐसा नहीं दिखता कि उसे आपकी प्रार्थनाओं की आवश्यकता है? वास्तविकता यह है कि उन्हें भी इसकी आवश्यकता है! क्या आप उनके लिए भी इसी प्रकार प्रार्थना करेंगे?      

 फिलिप्पियों 1:3-11

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