12 सितम्बर : हमें उसने जन्म दिया है

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12 सितम्बर : हमें उसने जन्म दिया है
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उसने अपनी ही इच्छा से हमें सत्य के वचन के द्वारा उत्पन्न किया।” याकूब 1:18

प्रसिद्ध टेलीविजन मेजबान जॉनी कार्सन ने एक बार एक खिझे हुए किशोर और एक निराश पिता के बीच एक बातचीत का वर्णन किया, जब वे एक-दूसरे से लड़ रहे थे। जब किशोर दरवाजा बन्द करने और बाहर जाने ही वाला था कि वह चिल्लाया, “मैंने दुनिया में जन्म लेने के लिए नहीं कहा था!” इसके जवाब में पिता ने भी चिल्लाते हुए कहा, “और यदि तुमने कहा भी होता, तो मैं कह देता ‘नहीं’!”

हममें से किसी ने भी जन्म लेने के लिए नहीं कहा। और वास्तव में, हममें से किसी ने भी नया जन्म लेने के लिए भी नहीं कहा। याकूब इस विनम्र सत्य की ओर इशारा करता है कि हमारा आध्यात्मिक जन्म वह नहीं था जिसे हमने परमेश्वर से करने को कहा। परमेश्वर की भलाई के कारण मसीह में हमारा नया जन्म उसका चुनाव था, और न तो हमारी विवशता का इस पर कोई प्रभाव पड़ा और न ही हमारी दिखावटी भलाई ने इसमें कोई योगदान दिया। उसने अपनी स्वतन्त्र, सर्वोच्च इच्छा के अनुसार ही कार्य किया। जैसा यीशु ने कहा, “हवा जिधर चाहती है उधर चलती है और तू उसका शब्द सुनता है, परन्तु नहीं जानता कि वह कहाँ से आती और किधर को जाती है? जो कोई आत्मा से जन्मा है वह ऐसा ही है” (यूहन्ना 3:8)।

आत्मा के कार्य के बिना, जो हमें मसीह के दर्शन कराता है, हमारे मूर्ख हृदय अंधे रहते हैं, और पाप हमारी नैतिकता की समझ पर मृत्यु-तुल्य प्रभाव डालता है। स्वभाव से हम पाप के शिकंजे में खोए हुए हैं, हमें अपनी स्थिति का समाधान जानने की बहुत आवश्यकता होती है, लेकिन हम यह भी नहीं देख पाते कि हमारी स्थिति वास्तव में है क्या। लेकिन भले ही हम अनुग्रह के द्वारा विश्वास से परमेश्वर के परिवार के सदस्य बन चुके हैं, तौभी हम कभी-कभी यह मानने के लिए प्रवृत्त होते हैं कि हमारा उद्धार उस काम का परिणाम है जो हमने किया है—कि हमने एक चुनाव किया, और हमें पाप से मुँह मोड़ने और बालकों जैसा विश्वास रखकर परमेश्वर की ओर मुड़ने का चुनाव करते रहना है। सत्य यह है कि परमेश्वर ने “अपनी ही इच्छा से हमें . . . उत्पन्न किया,” और जब हमने यह सुना, तब उसने हमें “सत्य के वचन” का प्रत्युत्तर देने के लिए सक्षम किया। जब हम इन टुकड़ों को आपस में जोड़ते हैं, तो हमें पता चलता है कि हम जो उसे चुनते हैं, वह केवल इसलिए सम्भव है क्योंकि उसने हमें पहले चुना।

जैसा कि एलेक मोट्यर ने कहा, “हमारे नए जन्म में हमारा किसी प्रकार का साधन या योगदानकर्ता बनना उतना ही असम्भव है, जितना कि हमारा प्राकृतिक जन्म लेने में होना। प्रारम्भिक चयन से लेकर पूरा होने तक, सारा काम उसका है . . . और जब तक उसकी इच्छा नहीं बदलती, उसका शब्द नहीं बदलता, या उसका सत्य गलत साबित नहीं होता, तब तक मेरा उद्धार खतरे में नहीं पड़ सकता और न ही खो सकता है।”[1]

यह जानकर कैसी सुरक्षा, शान्ति और आराम मिलता है कि यीशु मसीह के माध्यम से परमेश्वर की भलाई न केवल आपको पश्चात्ताप और विश्वास की ओर ले आई, बल्कि आपको विश्वास में बनाए भी रखेगी! यदि आपका विश्वास और उद्धार आप पर निर्भर होते, तो वे कभी सुरक्षित नहीं होते और आप हमेशा चिन्तित रहते। लेकिन यह उस पर निर्भर है और “न अदल बदल के कारण उस पर छाया पड़ती है” (याकूब 1:17)। आपने जन्म लेने के लिए नहीं कहा; उसने यह इच्छा की। इसलिए आप निश्चिन्त हो सकते हैं कि आप उसके बच्चे हैं—अब, कल, हर दिन और सदा के लिए।

  यहेजकेल 36

◊ पूरे वर्ष में सम्पूर्ण बाइबल पढ़ने के लिए: न्यायियों 13–15; यूहन्ना 5:1-24


[1] द मैसेज ऑफ एक्लेज़िआस्टेस: द बाइबल स्पीक्स टूडे (आई.वी.पी. अकेडेमिक, 1985), पृ. 60.

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