1 जुलाई : हमारे लिए

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“हाय, हाय, उन लोगों ने सोने का देवता बनवाकर बड़ा ही पाप किया है। तौभी अब तू उनका पाप क्षमा कर—नहीं तो अपनी लिखी हुई पुस्तक में से मेरे नाम को काट दे।” निर्गमन 32:31-32

जब इस्राएली बन्धन से छुड़ाए गए, तो परमेश्वर ने उन्हें निर्देश दिया कि वे अपने मिस्री स्वामियों और मकान मालिकों से सोना, चांदी और वस्त्र माँगें, ताकि वे इन सब वस्तुओं को अपने साथ वाचा के देश में ले जा सकें। यही सामग्री उस तम्बू के निर्माण के लिए उपयोग में लाई जाने वाली थी, जिसमें परमेश्वर अपने लोगों के बीच वास करने वाला था।

इस्राएली लोग अभी बहुत दूर नहीं गए थे कि मूसा को परमेश्वर से मिलने सीनै पर्वत पर बुलाया गया। लेकिन जब मूसा को अपेक्षा से अधिक समय लग गया, तो लोग अधीर हो गए और उसके भाई हारून से बोले, “अब हमारे लिए देवता बना” (निर्गमन 32:1)। तब हारून ने उनसे कहा, “तुम्हारी स्त्रियों और बेटे-बेटियों के कानों में जो सोने की बालियाँ हैं उन्हें उतारो, और मेरे पास ले आओ” (निर्गमन 32:2), और उसने उस सोने से एक सोने का बछड़ा बनाया: “तब लोग कहने लगे, हे इस्राएल, तेरा परमेश्वर जो तुझे मिस्र देश से छुड़ा लाया है, वह यही है” (निर्गमन 32:2, 4)। परमेश्वर ने उन्हें वह सब दे दिया था, जो उसके कार्य के लिए अनिवार्य था, लेकिन उन्होंने अपने स्वार्थ एवं इच्छाओं को पूरा करने के लिए उसके उपहारों का दुरुपयोग किया और अपने हाथों से बनाए हुए एक झूठे देवता की उपासना करने लगे। हम शायद सोने का बछड़ा न बनाएँ, लेकिन हम भी वही गलती कर सकते हैं, जब हम परमेश्वर की दी हुई आशिषों का उपयोग अपने ही स्वार्थी उद्देश्यों के लिए करते हैं।

जब मूसा वापस आया, तो उसने जो कुछ देखा उससे बहुत दुखी हुआ। वह परमेश्वर के सामने दीन होकर झुका और इस्राएलियों के लिए प्रार्थना करते हुए कहा, तू वह परमेश्वर है जिसने अपनी प्रजा के साथ वाचा बाँधी है। कृपया अपनी वाचा को बनाए रख! यद्यपि हमने तेरी दी हुई वस्तुओं का उपयोग झूठे देवताओं की रचना के लिए किया है, फिर भी हमें अकेला मत छोड़। कृपया अपने हाथों के कार्य को मत त्याग (निर्गमन 32:11-13)।

यह आश्चर्यजनक है कि स्वयं निर्दोष होने के बावजूद मूसा ने स्वयं को प्रजा के साथ इतना अधिक जोड़ लिया। और यह तो और भी अद्‌भुत है कि वह स्वयं परमेश्वर की “पुस्तक” में से मिटाए जाने के लिए भी तैयार था, बजाय इसके कि वह लोगों को परमेश्वर द्वारा त्यागे जाते हुए देखे।

मूसा की इस प्रार्थना में हम उस सच्चाई की झलक पाते हैं, जो अन्ततः नए नियम में पूरी हुई। जब उसके बच्चों की बात आती है, तो परमेश्वर कोई काम अधूरा नहीं छोड़ता। मसीह हमारे लिए मध्यस्थी करता है, और “परमेश्वर की जितनी प्रतिज्ञाएँ हैं, वे सब उसी में ‘हाँ’ के साथ हैं” (2 कुरिन्थियों 1:20)। अर्थात, परमेश्वर की प्रतिज्ञाएँ—कि वह अपनी प्रजा को थामे रखेगा और उस भले काम को पूरा करेगा जो उसने आरम्भ किया है—यीशु मसीह में पूरी होती हैं।

हम “स्वभाव से ही भटकने वाले हैं” और “अपने प्रेमी परमेश्वर को छोड़ने के लिए प्रवृत्त रहते हैं।”[1] हम वही लोग हैं जो परमेश्वर की दी हुई आशिषों का उपयोग अपनी मूर्तियों के पीछे चलने में करते हैं। हमें एक मध्यस्थ की आवश्यकता है—और हमारे पास एक है! प्रभु यीशु को त्याग दिया गया, ताकि हमें हमारे पापों की क्षमा मिल सके। जब हम अपने पापों को यीशु के सामने स्वीकार कर लेते हैं, तो हम उसी के पास आते हैं जो पहले ही हमारे लिए हस्तक्षेप कर चुका है। आपके लिए उसका जो अद्‌भुत प्रेम है, वह आपके हृदय को मूर्तियों के पीछे भागने से लौटा लाए, और जो कुछ आपके पास है, उसे उस परमेश्वर की सेवा में लगाएँ जिसने आपको सब कुछ दिया है।

  याकूब 4:4-10

पूरे वर्ष में सम्पूर्ण बाइबल पढ़ने के लिए: व्यवस्थाविवरण 13–15; प्रेरितों 4:1-22 ◊


[1] रॉबर्ट रॉबिंसन, “कम, दाओ फाउण्ट ऑफ एव्री ब्लेसिंग” (1758).

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