“तू मन ही मन यह विचार न कर कि मैं ही राजभवन में रहने के कारण और सब यहूदियों में से बची रहूँगी। क्योंकि जो तू इस समय चुपचाप रहे, तो और किसी न किसी उपाय से यहूदियों का छुटकारा और उद्धार हो जाएगा, परन्तु तू अपने पिता के घराने समेत नष्ट होगी। क्या जाने तुझे ऐसे ही कठिन समय के लिए राजपद मिल गया हो?” एस्तेर 4:13-14
जब एस्तेर हामान की षड्यन्त्रपूर्ण योजना के विषय में राजा से बात करने में हिचकिचाई, तब मोर्दकै का उत्तर—एक टीकाकार के शब्दों में—“परमेश्वर के हस्तक्षेप की वास्तविकता और आवश्यकता पर आधारित” था। मोर्दकै जानता था कि परमेश्वर अपनी वाचा पूरी करेगा और यदि एस्तेर मौन रहती, तो इस काम के लिए वह किसी और को खड़ा कर देता। परन्तु साथ ही, उसने एस्तेर से यह भी कहा कि सम्भव है कि परमेश्वर ने उसे ठीक इसी समय पर, ठीक इसी स्थान पर अपने लोगों के हित में कार्य करने के लिए ही पहुँचाया हो। एस्तेर ने सौन्दर्य प्रतियोगिता तो जीत ली थी और रानी भी बन गई थी; परन्तु न उसकी नाक उस स्थान पर उसने रखी थी, न उसकी आँखों का रंग उसने तय किया था, और न ही उसकी टाँगों की लम्बाई उस पर निर्भर थी। यह सब परमेश्वर ने किया था। मोर्दकै भविष्य की निश्चित जानकारी का दावा नहीं कर रहा था, परन्तु वह इतना अवश्य जानता था कि परमेश्वर ने एस्तेर को एक विशिष्ट स्थान पर रखा है और सम्भवतः एक विशिष्ट उद्देश्य के लिए ही रखा है।
इसी प्रकार, चाहे हमें कभी-कभी महसूस न हो, परन्तु परमेश्वर ने हममें से प्रत्येक को भी एक विशिष्ट स्थान पर, एक विशिष्ट उद्देश्य के लिए रखा है। उसने हमें ठीक वहीं स्थिर किया है जहाँ उसकी इच्छा है और “उन भले कामों के लिए . . . जिन्हें परमेश्वर ने पहले से हमारे करने के लिए तैयार किया” ठीक स्थान पर रखा है (इफिसियों 2:10)। इसलिए किसी नए अवसर, नई जगह, या नई योग्यता की आकांक्षा करने के स्थान पर, हमें पहचानना चाहिए कि सम्भव है कि परमेश्वर की योजना हमारी वर्तमान स्थिति से ही पूरी हो रही हो और हमें बस अपने उसी स्थान पर उसकी महिमा के लिए जीना है।
परमेश्वर की सेवा के लिए कोई आदर्श स्थान नहीं है—आदर्श स्थान वही है जहाँ उसने आपको रखा है। इस दृष्टि से झाड़ू लगाना भी दिव्य कार्य बन जाता है। सम्भव है कि आप एस्तेर जैसी रानी न हों, परन्तु आपका स्थान और आपकी भूमिका महत्त्वपूर्ण है। यह सोच हमें उस भय से मुक्त करती है कि जीवन कहीं और सफल होगा और साथ ही हमें यह प्रेरणा देती है कि हम यहीं, अभी, इसी क्षण में, परमेश्वर की आज्ञा का पालन करें। परमेश्वर ने आपको जहाँ भी स्थापित किया है, वहीं पर रहते हुए आज उसके पूर्व-निर्धारित उद्देश्यों का पालन करें। आज जब आप अपने कार्यालय, अपने विद्यालय, अपने नगर, अपने पड़ोस में जाएँ, तो इस भजन-पंक्ति को अपनी प्रार्थना बनाएँ:
तेरे ही नाम में, हे प्रभु, मैं अपने प्रतिदिन के परिश्रम के लिए निकलता हूँ।
तेरे सिवा किसी को जानना, किसी को सोचना, किसी को बोलना, किसी को करना, मेरा निश्चय नहीं।
जिस कार्य को तेरी बुद्धि ने मेरे लिए ठहराया है, उसे मैं प्रसन्नता से पूरा करूँ;
अपने प्रत्येक कार्य में तेरी उपस्थिति पाऊँ, और तेरी अच्छी एवं सिद्ध इच्छा को सिद्ध करूँ।
1 कुरिन्थियों 7:25-35
◊ पूरे वर्ष में सम्पूर्ण बाइबल पढ़ने के लिए: भजन 57–59; प्रेरितों 21:18-40