“हे सब परिश्रम करने वालो और बोझ से दबे हुए लोगो, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूँगा।” मत्ती 11:28
जब भी आपको कोई निमन्त्रण मिलता है, तो हो सकता है कि आप अपने आप से एक ही तरह के प्रश्न पूछते हों कि यह किसकी ओर से है? यह किसके लिए है? यह महत्त्वपूर्ण क्यों है? यह पद पूरे नए नियम में सबसे प्यारे निमन्त्रणों में से एक प्रस्तुत करता है, परन्तु इसे भली-भाँति समझने के लिए हमें वही प्रश्न पूछने होंगे।
सबसे पहले, यह एक व्यक्तिगत निमन्त्रण है। यह किसी कार्यक्रम के लिए निमन्त्रण नहीं है, न ही यह हिन्दू धर्म, बौद्ध धर्म, कन्फ्यूशीवाद, न्यू एज-इज़म, मानवतावाद या किसी अन्य “वाद” के साथ जुड़ जाने के लिए किसी धर्म या दर्शन द्वारा दिया गया निमन्त्रण है, जो आज के समय के वैश्विक दृष्टिकोणों में पाया जाता है। यह स्वयं यीशु की ओर से एक निमन्त्रण है। वह हममें से प्रत्येक को यह निमन्त्रण दे रहा है कि “मेरे पास आओ।”
निमन्त्रण का महत्त्व इस बात में निहित है कि यह किसकी ओर से है। सुसमाचारों में यीशु यह घोषणा करता है कि वह कौन है, कि वह जगत का उद्धारकर्ता मसीह है, परमेश्वर का पुत्र है (यूहन्ना 4:25-26; 1 यूहन्ना 4:14 देखें)। इस पहचान के आधार पर यीशु इसके प्रति प्रत्युत्तर करने की माँग कर सकता था, परन्तु इसके विपरीत वह एक निमन्त्रण दे रहा है।
और वह किसे आने के लिए निमन्त्रण दे रहा है? “सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे हुए लोगों को।” यह निमन्त्रण सब लोगों के लिए है। यह किसी बड़े समूह में से किसी एक समूह को अलग नहीं कर रहा है, अपितु पूरी मानवता का वर्णन कर रहा है। हममें से प्रत्येक को ये शब्द सुनने की आवश्यकता है, क्योंकि ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है जो चिन्ताओं, दायित्वों, डर और असफलताओं से भरे प्रतीकात्मक ठेले को धकेलता न हो, जो उसके जीवन की रचना करते हैं।
यह सब महत्त्व की बात क्यों है? ऐसा इसलिए है, क्योंकि यीशु हमें “हमारी आत्माओं को विश्राम” देने के लिए निमन्त्रण दे रहा है। वह अनन्त के सन्दर्भ में एक ऐसे विश्राम के बारे में बोल रहा है, जो कभी विफल नहीं होगा। वह हमें भोज के लिए बुलाता है और वह हमसे भोज के अनुकूल परिधान लाने के लिए भी नहीं कह रहा। हम भोज में उसी प्रकार आते हैं जैसे हम हैं। परमेश्वर उन सभी “अच्छे कर्मों” रूपी परिधानों को लेता है, जिन्हें हममें से बहुत से लोग पहनना पसन्द करते हैं, और वह उनको चिथड़े कहता है और उन्हें एक ओर फेंक देता है। वह उन सभी “बुराइयों, गड़बड़ियों, और निराशाओं” रूपी परिधानों को भी लेता है और उन्हें भी एक ओर फेंक देता है। उनके स्थान पर वह हमें “धार्मिकता के वस्त्र” (यशायाह 61:10) पहनाता है, जो स्वयं यीशु मसीह के द्वारा प्रदान किए जाते हैं। जब हम यीशु के पास आते हैं और उससे हमको वह सब मिल जाता है जिसकी हमें आज आवश्यकता है और जिसकी हमें भविष्य में भी आवश्यकता पड़ सकती है, तो हम अपने आप को किसी प्रकार स्थापित कर लेने या अपने लिए स्वर्ग का मार्ग प्रशस्त करने के अपने प्रयास से विश्राम ले सकते हैं।
यह सभी निमन्त्रणों से बड़ा निमन्त्रण है। आज ही, पहली बार हो या फिर हजारवीं बार, अपने बोझ को उसके पास लेकर आएँ। उसका विश्राम ग्रहण करें।
जैसा मैं हूँ बगैर एक बात, पर तेरे लहू से हयात
और तेरे नाम से है नजात, मसीह, मसीह, मैं आता हूँ। [1]
मत्ती 11:25-30