27 मार्च : बलिदान द्वारा बचाए गए

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27 मार्च : बलिदान द्वारा बचाए गए
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“और जिन घरों में तुम रहोगे उन पर वह लहू तुम्हारे लिए चिह्न ठहरेगा; अर्थात् मैं उस लहू को देखकर तुम को छोड़ जाऊँगा, और जब मैं मिस्र देश के लोगों को मारूँगा, तब वह विपत्ति तुम पर न पड़ेगी और तुम नष्ट न होगे।”  निर्गमन 12:13

प्रभु-भोज में क्या होता है? क्यों मसीही लोग रोटी खाते हैं और प्याले में से पीते हैं?

इन प्रश्नों के उत्तर ढूँढते हुए, हममें से बहुत से लोग मूसा की ओर देखने के बारे में नहीं सोचते। यदि हम उसकी कहानी के विवरण में बहुत अधिक ध्यान केन्द्रित करने लगेंगे तो हमारे पास केवल सरकंडों, जलती हुई झाड़ी और विपत्तियों का एक सीमित दृष्टिकोण होगा। परन्तु यदि हम अपने आप को थोड़ा पीछे खींच लें, तो हम परमेश्वर की पूरी योजना की महिमा को देखेंगे और उसके भागीदार बनने में सक्षम हो सकेंगे।

अपनी प्रजा इस्राएल के कूच की प्रक्रिया को आरम्भ करने के लिए न्याय करने हेतु देश से होकर जाते हुए, परमेश्वर ने मिस्र पर दस विपत्तियों में से अन्तिम विपत्ति भेजी और प्रत्येक मिस्री का पहिलौठे मार दिया गया। इस्राएल के पहिलौठे भी मारे जाने के खतरे में थे, क्योंकि वे पाप से निर्दोष नहीं थे, और पाप मृत्यु की ओर ले जाता है (रोमियों 6:23)। परन्तु परमेश्वर ने फसह के द्वारा उनके बचाव का एक उपाय प्रदान किया। जब प्रभु ने बलि के मेमने का लहू द्वार की चौखट पर देखा, जिसे जूफा के पौधे से लगाया गया था (निर्गमन 12:22), तो वह उस घराने को लाँघकर आगे बढ़ गया।

पुराने नियम में परमेश्वर द्वारा इस प्रकार लाँघकर जाना उसके उद्धार का महान कार्य था। इसमें और इसके द्वारा परमेश्वर ने अपने लोगों को एक महत्त्वपूर्ण सिद्धान्त सिखाया कि परमेश्वर प्रतिस्थापन द्वारा बचाता है।  उसने इन लोगों को इसलिए बचाया क्योंकि उनके स्थान पर पशुओं की बलि दी गई थी। जिस प्रकार मूसा लिखता है कि मिस्र में उस रात “एक भी ऐसा घर न था जिसमें कोई मरा न हो” (निर्गमन 12:30)। एक पुत्र मरा था या एक मेमना मरा था। परमेश्वर के लोग अपने पापों के लिए मृत्यु के पात्र थे, परन्तु क्योंकि उन्होंने दूसरे के बलिदान पर भरोसा किया, जैसा कि परमेश्वर ने आज्ञा दी थी और जिसे परमेश्वर ने प्रदान किया था, वे बचा लिए गए। पुराने नियम के इतिहास में प्रत्येक वर्ष परमेश्वर के लोग इस घटना की ओर देखा करते और उस महान सत्य को याद करते कि परमेश्वर प्रतिस्थापन द्वारा बचाता है।

वे सभी वर्ष और वे सभी पर्व उस क्षण के महत्त्व को रेखांकित करते हैं, जब बपतिस्मा देने वाला यूहन्ना यीशु को आते देखकर कहता है, “देखो, यह परमेश्‍वर का मेमना है जो जगत का पाप उठा ले जाता है” (यूहन्ना 1:29)। ठीक फसह के मेमने की तरह, यहाँ कोई ऐसा व्यक्ति था जो अपने लोगों को पाप से बचाने और अपने लोगों को स्वतन्त्र करने के लिए परमेश्वर का प्रावधान था।

इस्राएल का कूच मानवजाति के महान कूच का पूर्वाभास है। जब परमेश्वर के न्याय के योग्य पुरुष या स्त्रियाँ क्रूस पर उनके लिए बहाए गए लहू पर भरोसा करते हैं, तो उन्हें पाप से मुक्ति मिल जाती है। हर बन्धन टूट जाता है, ठीक वैसे ही जैसे इस्राएलियों की जंजीरें तब टूट गई थीं जब उन्हें दासत्व से मुक्त कराया गया था।

अगली बार जब आप प्रभु-भोज के बारे में सोच रहे हों, तो मूसा, जलती हुई झाड़ी और विपत्तियों की कहानी पर विचार कीजिएगा। फिर उनके बीच के सम्बन्धों को समझिएगा और याद रखिएगा कि हम प्रभु-भोज इसलिए लेते हैं क्योंकि यीशु हमारा बलिदान है। वह परमेश्वर का मेमना है। वह आपका प्रतिस्थापन है। आपको किसी न्याय से डरने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि उसका आपकी वर्तमान स्थिति पर कोई प्रभाव नहीं है, वह क्रूस पर चुकाया जा चुका है और उसका समाधान किया जा चुका है। आप प्रतिज्ञा के देश की ओर जा रहे हैं।       यूहन्ना 19:16ब-37

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