18 मार्च : विजयी सिंह

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18 मार्च : विजयी सिंह
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“तब मैं फूट फूटकर रोने लगा, क्योंकि उस पुस्तक के खोलने या उस पर दृष्टि डालने के योग्य कोई न मिला। इस पर उन प्राचीनों में से एक ने मुझ से कहा, ‘मत रो; देख, यहूदा के गोत्र का वह सिंह जो दाऊद का मूल है, उस पुस्तक को खोलने और उसकी सातों मुहरें तोड़ने के लिए जयवन्त हुआ है।’ तब मैं ने उस सिंहासन और चारों प्राणियों और उन प्राचीनों के बीच में, मानो एक वध किया हुआ मेमना खड़ा देखा।”  प्रकाशितवाक्य 5:4-6

हममें से कई लोगों ने बचपन में अपने माता-पिता से यह सुना होगा, “क्या तुम्हें . . . याद रहा?” इसका एक उदाहरण इस प्रकार है; जब भी मैं किसी के घर से लौटता था, तो मुझे प्रायः यह सुनने को मिलता था, “क्या तुम्हें धन्यवाद कहना याद रहा?” मुझे कोई नई बात बताए जाने की आवश्यकता नहीं होती थी; मुझे केवल याद रखना होता था। जब यीशु द्वारा उस स्वर्गिक वास्तविकता का दर्शन प्रेरित यूहन्ना ने देखा, तो वह आँसुओं में डूब गया क्योंकि वह डर गया कि कोई भी ऐसा नहीं है जो संसार के रहस्यों को देख सके और उसके पहली सदी के अनुभव की परेशानियों का अर्थ बता सके। किन्तु यूहन्ना को कोई नई जानकारी दिए जाने की आवश्यकता नहीं थी। उसे केवल वह याद दिलाए जाने की आवश्यकता थी, जो वह पहले से जानता था। उसने मूलभूत बातों को भूलकर गलती की थी।

यूहन्ना से कहा गया कि वह रोए नहीं, बल्कि उस व्यक्ति की ओर देखे जो पुस्तक को खोल सकता है। जब वह मुड़ा तो उसने “मानो एक वध किया हुआ मेमना खड़ा देखा।” मेमने के घाव मसीह की मृत्यु की याद दिलाते थे, जिनके द्वारा उसने उद्धार को जीता था। किन्तु यह मेमना खड़ा था, जो उसके पुनरुत्थान की विजय का प्रतीक था। यहाँ इस दर्शन में हम यीशु को देखते हैं, जो परम-दयालु और सर्वशक्तिमान है। वह मेमना है, और वह सिंह है। वह पूरे संसार की आराधना और आज्ञाकारिता के योग्य है और उसकी मांग करता है और उसे वह अवश्य मिलेगी।

यूहन्ना के आँसुओं का समाधान यीशु था, ठीक वैसे ही जैसे हमारे अपने भय के आँसुओं का समाधान भी वही है, विशेषकर तब जब हम महसूस करते हैं कि सारा संसार हमारे विरुद्ध हो गया है, हम थक चुके हैं, छोटे, निर्बल और अधिकारहीन हैं, और जब यह मान लेने का प्रलोभन हमारे सामने आता हैं कि यह संसार किसी के नियन्त्रण में नहीं है और इसमें केवल अराजकता का बोलबाला है।

हममें से कोई नहीं जानता कि कोई दिन क्या लेकर आएगा या किसी रात में क्या घटित हो जाएगा। ये रहस्य केवल परमेश्वर के अधिकार में हैं। परन्तु हम कितने महान अनुग्रह का अनुभव करते हैं, जब परमेश्वर हमारे कन्धे पर थपथपाकर हमें हमारी बाइबल की ओर मोड़ते हुए कहता है कि क्या तुम भूल रहे हो कि यहूदा के गोत्र का सिंह वास्तव में विजय प्राप्त कर चुका है, कि नियन्त्रण उसके हाथ में है, कि भविष्य उसके अधिकार में है, कि वह राजा है?  यीशु ने पहले ही यूहन्ना से कह दिया था, “मत डर; मैं प्रथम और अन्तिम और जीवता हूँ; मैं मर गया था, और अब देख मैं युगानुयुग जीवता हूँ; और मृत्यु और अधोलोक की कुंजियाँ मेरे ही पास हैं” (प्रकाशितवाक्य 1:17-18)।

इसलिए जब आप वर्तमान या भविष्य से निराश या पराजित या परेशान महसूस करें, तो माँग केवल यही है कि जो आप पहले से जानते हैं उसे याद रखें। यहूदा के सिंह की ओर देखें, जो हमारे लिए वध किया गया मेमना है। वह योग्य है और सक्षम है कि वह पुस्तकों को खोल सके और इस संसार के इतिहास को उसके अन्त की ओर, अर्थात् उसके पुनः आगमन और महिमा में हमारे प्रवेश की ओर ले जा सके।       

प्रकाशितवाक्य 5

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