“यीशु ने उनसे कहा, ‘मेरे पीछे चले आओ, तो मैं तुम को मनुष्यों के पकड़ने वाले बनाऊँगा।’ वे तुरन्त जालों को छोड़कर उसके पीछे हो लिए।” मत्ती 4:19-20
क्या आपने कभी ऐसा किया है कि आप कहीं गए, मान लीजिए किसी रेस्टोरेंट, डॉक्टर के ऑफिस, या किसी दुकान में गए और वहाँ किसी कर्मचारी से पूछा कि वे जो कुछ करते हैं, वह वे क्यों करते हैं? शायद वे अपने परिवार का पालन-पोषण करने की कोशिश कर रहे हैं। हो सकता है कि उन्हें इस क्षेत्र में बचपन से गहरी रुचि रही हो। कई उत्तरों के बीच शायद आप कभी किसी को यह कहते हुए सुनें, “यह मेरा बुलावा है।” एक वास्तविक अर्थ में वे नए नियम के दृष्टिकोण से सेवाकार्य को सटीक रूप से व्यक्त करते हैं।
जो लोग मसीह में हैं, वे सभी सेवा के जीवन के लिए बुलाए गए हैं। ऐसा नहीं है कि मसीह के पास तो हम सभी बुलाए गए हैं, लेकिन केवल कुछ ही आगे बढ़कर सेवा करते हैं; सेवा मसीही शिष्यत्व का एक अभिन्न हिस्सा है। जब यीशु ने अपने शिष्यों को “मनुष्यों के मछुआरे” बनने के लिए कहा, तो वास्तव में वह उन्हें यह कह रहा था, मेरे पास तुम्हारे लिए एक काम है। मैं चाहता हूँ कि तुम मेरे सेवाकार्य में भाग लो।
चाहे एक मसीही को परमेश्वर के वचन का प्रचारक या शिक्षक होने के लिए, युवाओं के लिए बाइबल अध्ययन के अगुवे के रूप में, कलीसिया के बच्चों की कक्षा में स्वयंसेवक के रूप में, या फिर अपनी फैक्ट्री या दफ्तर में गवाह के रूप में, घर में बच्चों की परवरिश करने वाले माता-पिता के रूप में, या एक बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल करने वाले बच्चों के रूप में, या किसी अन्य भूमिका में बुलाया गया हो, परमेश्वर का सेवा का बुलावा समान रूप से लागू होता है। “पूर्णकालिक सेवकों” और “अल्पकालिक सेवकों” के बीच का अन्तर उनके महत्त्व का नहीं बल्कि केवल कार्य का अन्तर है। सबसे महत्त्वपूर्ण बात सेवा है।
बाइबल के दृष्टिकोण में सेवा महानता का रास्ता नहीं है; सेवा ही महानता है। “मनुष्य का पुत्र इसलिए नहीं आया कि उसकी सेवा टहल की जाए, पर इसलिए आया कि आप सेवा टहल करे, और बहुतों की छुड़ौती के लिए अपना प्राण दे” (मरकुस 10:45)। हम त्यागपूर्ण सेवा इस उम्मीद में नहीं करते कि हमारी “तरक्की” होगी, जैसे किसी नौकरी या शिक्षा के क्षेत्र में होती है, न ही हम सेवा इसलिए करते हैं ताकि एक दिन हम सेवा करना बन्द कर दें। यीशु कहता है, “यदि कोई बड़ा होना चाहे, तो सबसे छोटा और सबका सेवक बने” (मरकुस 9:35)। जब हमारे कार्य इस विरोधाभास को दर्शाते हैं, तब सारी महिमा परमेश्वर को मिलती है।
मसीही सेवा अन्ततः वह सेवाकार्य है, जो जी उठे प्रभु यीशु की सेवा है, जिसे उसके लोगों के बीच और उनके माध्यम से किया जाता है। प्रेरित पौलुस इसे स्पष्ट रूप से समझ गया था, इसीलिए उसने लिखा, “मैं मसीह के साथ क्रूस पर चढ़ाया गया हूँ, अब मैं जीवित न रहा, पर मसीह मुझमें जीवित है और मैं शरीर में अब जो जीवित हूँ तो केवल उस विश्वास से जीवित हूँ जो परमेश्वर के पुत्र पर है, जिसने मुझसे प्रेम किया और मेरे लिए अपने आप को दे दिया।” (गलातियों 2:20)।
यीशु ने हमारे लिए अपना जीवन दे दिया ताकि वह हमारे जीवन को हमसे ले सके और उसे अपने जीवन के रूप में हमारे माध्यम से जी सके। यदि आप इसे समझते हैं, तो आप सचमुच उसी तरह सेवा कर पाएँगे जैसा यीशु ने की—और आपका जीवन अत्यन्त मूल्यवान हो जाएगा, जोकि आपकी अपनी सेवा करते हुए कभी नहीं हो सकता। इसलिए आज हम अपनी बुलाहट में जीएँ।
मरकुस 9:30-37
◊ पूरे वर्ष में सम्पूर्ण बाइबल पढ़ने के लिए: भजन 16–17; प्रेरितों 12