“पौलुस ने अरियुपगुस के बीच में खड़े होकर कहा, ‘हे एथेंस के लोगो . . . जिसे तुम बिना जाने पूजते हो, मैं तुम्हें उसका समाचार सुनाता हूँ।’” प्रेरितों 17:22-23
परमेश्वर की सैद्धान्तिक शिक्षा को समझे बिना हम यीशु के सुसमाचार का प्रचार नहीं कर सकते। जैसा कि जे.बी. फिलिप्स अपनी पुस्तक योर गॉड इज़ टू स्मॉल में लिखते हैं, “आज बहुत से लोग आन्तरिक असन्तोष में और किसी विश्वास के बिना जी रहे हैं . . . वे अपने वयस्क मस्तिष्क से ऐसा परमेश्वर नहीं खोज पाए हैं जो जीवन को समझाने के लिए पर्याप्त रूप से बड़ा हो।”[1] इसलिए जब हम परमेश्वर के चरित्र, उसकी महानता और उसकी महिमा के बारे में बात करें, तो हमें प्रत्येक उपयुक्त शब्द का उपयोग करना चाहिए।
जब पौलुस ने सुसमाचार का प्रचार किया, तो उसने धार्मिक लोगों, आम जनता और बुद्धिजीवियों सभी के पास जाकर यह सन्देश दिया, क्योंकि वह जानता था कि परमेश्वर का शुभ समाचार सभी के लिए पर्याप्त है और हर किसी की चिन्ताओं का उत्तर है (प्रेरितों 17:24-31)। हम पौलुस के इस दृष्टिकोण से सीख सकते हैं, जिसमें उसने परमेश्वर के स्वभाव के पाँच महत्त्वपूर्ण पहलुओं को स्पष्ट किया:
•परमेश्वर सृष्टिकर्ता है। इस संसार को उसी ने बनाया है, जबकि वह स्वयं अजन्मा और अजर-अमर है। वह अपनी सृष्टि से अलग और समय से परे है। वह मात्र एक शक्ति नहीं है—यहाँ तक कि सबसे बड़ी शक्ति भी नहीं—और न ही उसे किसी रूप में बाँधा या नियन्त्रित किया जा सकता है।
•परमेश्वर पालनहार है। वही है जो जीवन और श्वास का दाता है। वह पालनहार परमेश्वर मनुष्यों के हाथों की सेवा पर निर्भर नहीं है, न ही उसे किसी प्रकार के पोषण की आवश्यकता है।
•परमेश्वर शासक है। वह राष्ट्रों पर अधिकार रखते है। इतिहास, भूगोल, सरकारें—पूरी सृष्टि—सब उसके नियन्त्रण में है। कोई भी घटना हमारे परमेश्वर को चौंका नहीं सकती; वह मनुष्य के पापपूर्ण कार्यों तक को अपनी योजना में सम्मिलित कर सकता है। इसके अलावा, एक शासक के रूप में, उसने हर व्यक्ति को एक निश्चित स्थान और समय में रखा है, ताकि हम परमेश्वर को खोजें, उसे पाएँ और उसके पवित्र नाम की स्तुति करें।
•परमेश्वर पिता है। मनुष्य उसके “वंशज” हैं (प्रेरितों 17:28), और इस अर्थ में कि उसने आदम से लेकर प्रत्येक मनुष्य को जीवन दिया है, वह हर मनुष्य का पिता है (लूका 3:38)। उसने हम सबको अपने स्वरूप में बनाया है। हम नैतिक प्राणी हैं, जिनमें सही और गलत का ज्ञान है और हम वास्तव में केवल तभी फल-फूल सकते हैं, जब हम उसके साथ सम्बन्ध में होते हैं।
•परमेश्वर न्यायी है। उसे पूरी पृथ्वी पर अधिकार प्राप्त है। एक न्याय का दिन आएगा, जो निष्पक्ष और अन्तिम होगा, जब हर अन्याय का निपटारा किया जाएगा और हर बुराई को सुधारा जाएगा। वास्तव में, परमेश्वर पहले ही अपने पुत्र यीशु के द्वारा इस संसार में हस्तक्षेप कर चुका है, और यीशु के पुनरुत्थान के द्वारा उसने उसे न्यायाधीश के रूप में नियुक्त क दिया है। यह परमेश्वर की कृपा और धैर्य है कि उसने न्याय के दिन की घोषणा पहले से कर दी है, ताकि हम उस दिन से पहले पश्चाताप कर लें और उससे क्षमा प्राप्त करें।
परमेश्वर किसी की भी मात्र धार्मिक अभिरुचि के लिए ही पर्याप्त नहीं है—बल्कि वह उससे कहीं अधिक महान है। वह आपके और मेरे लिए, हमारी हर चिन्ता और दुख के लिए पर्याप्त रूप से बड़ा है। वह हर बौद्धिक जिज्ञासा को सन्तुष्ट करने और हर भावनात्मक अभिलाषा को पूरा करने के लिए पर्याप्त रूप से बड़ा है—और अन्ततः, वह जीवन जीने के लिए भी पर्याप्त रूप से बड़ा है। आप परमेश्वर को जितना अधिक सही रूप में जानेंगे, उतना ही अधिक खुशी से आप उसकी आज्ञा का पालन करेंगे और उसके विषय में आनन्द से भरकर आत्मविश्वास से बातें करेंगे।
यशायाह 44:6-8
◊ पूरे वर्ष में सम्पूर्ण बाइबल पढ़ने के लिए: भजन 113–115; 2 कुरिन्थियों 2
[1] योर गॉड इज़ टू स्मॉल: ए गाईड फॉर बिलिवर्स ऐण्ड स्कैप्टिक्स अलाईक (टचस्टोन, 2004), पृ. 8.