1 सितम्बर : उदारता से भरपूर

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1 सितम्बर : उदारता से भरपूर
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“फिर मूसा ने इस्राएलियों की सारी मण्डली से कहा, ‘जिस बात की आज्ञा यहोवा ने दी है वह यह है। तुम्हारे पास से यहोवा के लिए भेंट ली जाए, अर्थात् जितने अपनी इच्छा से देना चाहें वे यहोवा की भेंट करके ये वस्तुएँ ले आएँ।’” निर्गमन 35:4-5

परमेश्वर के लोग उसके अनुग्रह के प्रत्युत्तर में आभार से भरकर दान देते हैं।

या कम से कम, हमें ऐसा अवश्य करना चाहिए। लेकिन अक्सर हमारे दान देने के कारण बहुत अलग होते हैं। कई लोग दान देने को एक ऐसा कार्य मानते हैं, जिसे करना उनके लिए अनिवार्य है या कर्तव्य है। ऐसा वे शायद उनकी सामाजिक स्थिति या दूसरों की धारणा के कारण करते हैं। कुछ लोग अपराध-बोध की भावना से दान देते हैं और अपने बुरे कर्मों का प्रायश्चित करने का प्रयास करते हैं। अन्य लोग भय से दान देते हैं, यह सोचकर कि “मेरे लिए दान देना ही अच्छा है, नहीं तो परमेश्वर मुझे आशीर्वाद नहीं देगा।”

लेकिन बाइबल में दिया गया दान देने का सिद्धान्त इससे बहुत अलग है।

जब इस्राएली मरुभूमि में परमेश्वर के लिए पवित्र निवास स्थान स्वरूप तम्बू बनाने की तैयारी कर रहे थे, तो मूसा ने इस कार्य के लिए सामग्री का संग्रह आरम्भ किया। उसकी अपील जबरदस्ती या छलपूर्वक नहीं थी; उसने बस लोगों से कहा कि परमेश्वर उन सभी से प्राप्त करने को तैयार हैं जो स्वेच्छा से देना चाहते हैं, और हर उदार व्यक्ति ने भेंट चढ़ाई। उन्होंने न केवल अपनी सम्पत्ति में से दिया, बल्कि अपने कौशल और योग्यताओं के आधार पर भी दिया, जो परमेश्वर ने उन्हें दिए थे—चाहे वह निर्माण कार्य हो, कपड़ा बुनाई हो, कारीगरी हो या कला हो।

बहुतों ने दिया, और उन्होंने अत्यधिक दिया। परिणामस्वरूप, मूसा को दूसरा निर्देश देना पड़ा और पूरी छावनी में सन्देश भेजना पड़ा: “क्या पुरुष, क्या स्त्री, कोई पवित्रस्थान के लिए और भेंट न लाए” (निर्गमन 36:6)। उन्हें यह एहसास था कि परमेश्वर ने ही उन्हें सब कुछ दिया था। परमेश्वर की भलाई की विशालता से प्रेरित होकर वे उदारता से भर उठे—यहाँ तक कि मूसा को उन्हें रोकने के लिए कहना पड़ा!

परमेश्वर को किसी भी चीज़ की आवश्यकता नहीं है, फिर भी वह उन लोगों से प्राप्त करने के लिए तैयार रहता है, जो उसके अनुग्रह से उसके अनेक आशीर्वादों के भागीदार हैं। परमेश्वर अपने अनुग्रह को प्रतिशत में नहीं देता; वह उसे प्रचुर मात्रा में उण्डेलता है—और अपने हृदय की इसी उदारता से उसने यीशु के माध्यम से अपने लोगों को एक के बाद एक आशीर्वाद दिया है। जब हम, जो उसके अनुग्रह के प्राप्तकर्ता हैं, अपने समय, धन, प्रतिभा या किसी भी अन्य चीज़ को प्रचुरता और कृतज्ञता से देते हैं, तो परमेश्वर की महिमा होती है।

परमेश्वर हमेशा उदार हृदयों की इच्छा रखता है। उसके पास अपने पुत्र के कार्य के माध्यम से लोगों को बचाने की योजना है, और वह ऐसे अनुयायियों की लालसा रखता है जो दान देने के द्वारा सुसमाचार के कार्य में शामिल होने के लिए तैयार हों। यह केवल अनुग्रह ही है जो किसी व्यक्ति को बलिदानी रूप से और प्रसन्नतापूर्वक देने के लिए प्रेरित करता है। यदि आपका देना—चाहे वह आपका समय हो, आपकी प्रतिभा हो या आपका धन—सीमित या अनिच्छा से हो रहा है, तो इस बात पर मनन करें कि परमेश्वर ने आपको कितना अधिक दिया है, विशेष रूप से प्रभु यीशु में। उसके अनुग्रह से प्रेरित हों, और आप कृतज्ञता से भर जाएँगे, जो उदारता में परिवर्तित होगी, तथा परमेश्वर की महिमा और स्तुति लाएगी।

यूहन्ना 12:1-8

पूरे वर्ष में सम्पूर्ण बाइबल पढ़ने के लिए: भजन 135–136; 2 कुरिन्थियों 11:1-15 ◊

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