1 फरवरी : आनन्दपूर्ण आराधना

Alethia4India
Alethia4India
1 फरवरी : आनन्दपूर्ण आराधना
Loading
/

“निश्चय जानो कि यहोवा ही परमेश्‍वर है! उसी ने हम को बनाया, और हम उसी के हैं; हम उसकी प्रजा, और उसकी चराई की भेड़ें हैं।”  भजन संहिता 100:3

भजन संहिता की पुस्तक को हमारी आत्माओं के लिए दवा का सन्दूक भी कहा जा सकता है। हम इसमें कुचले हुओं के लिए विलाप के गीत, परीक्षाओं के समय में परमेश्वर को पुकारने तथा स्तुति और धन्यवाद की भेंटों को देख सकते हैं। जो कुछ भी आपको सताता हो, उसके लिए भजन संहिता में आपको मरहम मिल जाएगा।

स्तुति के भजनों में विशेष रूप से यह मूलभूत सत्य गुथा हुआ है कि यहोवा ही परमेश्वर है और हम उसी के हैं। परमेश्वर के लोगों के रूप में हमारा अस्तित्व ही इस बात का संकेत है कि वह कौन है। एक समय हम कुछ भी नहीं थे, परन्तु अब हम परमेश्वर की प्रजा हैं। एक समय हम पर दया नहीं हुई थी, परन्तु अब हम पर प्रतिदिन दया होती है (1 पतरस 2:10)।

मूल बात यह है कि हम अपने नहीं हैं। न ही कभी थे। हम एक सामर्थी सृष्टिकर्ता द्वारा निर्मित उसके स्वरूप को धारण करने वाले प्राणी हैं। वह कुम्हार है, जिसने हमें बनाया है और “हम उसके हैं।” इसके अतिरिक्त, हम छुटकारा पाए हुए पापी हैं, जिन्हें एक प्रेमपूर्ण उद्धारकर्ता द्वारा “दाम देकर मोल लिया गया है” (1 कुरिन्थियों 6:20)। वह ऐसा चरवाहा है, जिसने हमारे लिए अपना प्राण दिया और अब हमारी रखवाली करता है (यूहन्ना 10:11-15) और “हम उसके हैं।” हमें दो बार दाम देकर मोल लिया गया, एक बार सृष्टि के सृजन में और दूसरी बार छुटकारे के काम में, और हम उसके हैं।

इस कारण प्रभु यीशु मसीह में हमारे पास अब जो अवसर है, वह गर्व करने का नहीं परन्तु स्तुति करने का अवसर है। यह जानना कि यहोवा ही परमेश्वर है और हम उसी के हैं, हमें उसकी स्तुति करने और उसको धन्यवाद देने के लिए प्रेरित करेगा (भजन संहिता 100:3)।

जो कुछ अनमोल होता है, उसकी प्रशंसा किया जाना एक स्वाभाविक बात होती है। जिस वस्तु को लोग बहुमूल्य समझते हैं, वे स्वाभाविक रूप से उसकी प्रशंसा करते हैं। परमेश्वर हमारा रचयिता है और हमें छुटकारा दिलाने वाला है और इसलिए वह हमारी प्रशंसा पाने का अधिकारी और स्तुति के योग्य है। उससे अधिक कोई भी और कुछ भी आपकी स्तुति के योग्य नहीं है।

हमारी असामान्य परिस्थितियों में भी हमारे पास परमेश्वर की स्तुति करने के पर्याप्त कारण होते हैं, क्योंकि वह परमेश्वर है। अपने किसी प्रिय जन को खो देने पर या अपनी सांसारिक सुख-सुविधाएँ प्रदान करने वाली किसी नौकरी को खो देने पर भी हम उसकी स्तुति करने का चयन कर सकते हैं। जब हमारी आवाज़ आँसुओं के कारण रुकने लगे, जब हमारे दिल हमें निराश करने लगें, जब हमारी परिस्थितियाँ हमें निष्फल कर दें, जब जीवन हमें हतोत्साहित कर दे, तब भी उसकी “करुणा” जो “सदा के लिए” है (भजन संहिता 100:5), उसमें हम परमेश्वर में आनन्दपूर्ण आराधना और आभार से भरी स्तुति के लिए अन्तहीन कारण ढूँढ सकते हैं। वह सदैव आपका सामर्थी सृष्टिकर्ता और प्रेमी उद्धारकर्ता है।

एक मसीही व्यक्ति की विशिष्ट पहचान उसका आभार से भरा हृदय होता है। आज यह आपकी भी पहचान बन जाए।

भजन संहिता 148

Leave A Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *