“उसके महात्म्य और पराक्रम के कामों, और मोर्दकै की उस बड़ाई का पूरा ब्योरा, जो राजा ने उसकी की थी, क्या वह मादै और फारस के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में नहीं लिखा है? यहूदी मोर्दकै, क्षयर्ष राजा ही के नीचे था, और यहूदियों की दृष्टि में बड़ा था, और उसके सब भाई उससे प्रसन्न थे, क्योंकि वह अपने लोगों की भलाई की खोज में रहा करता था और अपने सब लोगों से शान्ति की बातें कहा करता था।” एस्तेर 10:2-3
कभी-कभी इतिहास के क्रम में ऐसा होता है कि कोई एक व्यक्ति उठ खड़ा होता है, जिसकी उपस्थिति के बिना सब कुछ भिन्न होता। ऐसा ही एक व्यक्ति विंस्टन चर्चिल था—ब्रिटेन का पूर्व प्रधानमन्त्री, राजनेता और स्वतन्त्रता का रक्षक। इतिहास का कोई भी विद्यार्थी ईमानदारी से इस बात से इनकार नहीं कर सकता कि यदि चर्चिल आगे न बढ़ा होता, तो द्वितीय विश्व युद्ध और उसके परिणामों का इतिहास पूरी तरह भिन्न होता। यद्यपि प्रायः इतिहास की धारा किसी एक व्यक्ति के कार्यों की परवाह किए बिना आगे बढ़ती हुई प्रतीत होती है, फिर भी आप अपने ही देश और समाज में ऐसे लोगों के विषय में सोच सकते हैं जिन्होंने निर्णायक रूप से इतिहास की दिशा मोड़ दी।
पाँचवीं शताब्दी ईसा पूर्व में मोर्दकै ऐसा ही एक व्यक्ति था। उसके जीवन का पूरा ब्योरा मादै और फारस के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में लिखा गया, क्योंकि यदि वह न उठा होता, तो परिस्थितियाँ स्पष्ट रूप से भिन्न होतीं।
मोर्दकै फारसी नहीं था। वह यहूदी था और एक भिन्न परमेश्वर (एकमात्र सच्चे परमेश्वर) का आदर करता हुआ, फारसियों से भिन्न रीति से जीवन बिताता हुआ और भिन्न परम्पराओं का पालन करता हुआ एक यहूदी के रूप में ही जीवन व्यतीत करता था। फिर भी, यद्यपि वह इतना भिन्न था, वह फारसियों के द्वारा सम्मानित हुआ, इसलिए नहीं कि उसने दोहरी बात की या राजा क्षयर्ष की कृपा पाने का यत्न किया, बल्कि इसलिए कि उसमें पूर्ण सत्यनिष्ठा और नैतिक स्थिरता थी। मोर्दकै ने लोकप्रिय बनने का लक्ष्य नहीं रखा; उसने वही करने का निश्चय किया जो सही था—जो परमेश्वर ने उसे करने के लिए दिया था।
जब किसी को बड़े प्रभाव का पद दिया जाता है, तो प्रायः अन्य लोग ईर्ष्या के कारण उससे अप्रिय हो जाते हैं। अपने सहयहूदियों में मोर्दकै की स्थाई लोकप्रियता असामान्य थी। सम्भवतः इसका एक कारण यह था कि वह उनकी चिन्ता करता था। वह अपनी प्रजा से अलग-थलग या उदासीन नहीं हुआ, और अपने पद का उपयोग अपने स्वयं के समृद्धि के लिए नहीं बल्कि दूसरों के कल्याण के लिए करता रहा और “अपने लोगों की भलाई की खोज में रहा करता था।” जैसा कि एक व्याख्याकार ने इसे संक्षेप में कहा है, “मोर्दकै की स्थाई विरासत यह है कि उसने राजा की सेवा और अपनी प्रजा की सेवा को एक साथ जोड़ा, और किसी में भी समझौता नहीं किया। वह दोनों की सेवा करता है और दोनों के लिए बोलता है, दोनों की भलाई और शान्ति चाहता है।”[1]
मोर्दकै से सीखें। वही करने का लक्ष्य रखें जो सही है—जो परमेश्वर ने आपको करने के लिए दिया है, उस स्थान और उस समय में जिसे उसने आपके लिए ठहराया है। मोर्दकै के समान, आपकी विरासत ऐसी हो कि लोग पहचान सकें कि क्योंकि आपका मन परमेश्वर के लिए है, इसलिए आपका मन दूसरों के लिए भी है और इस प्रकार उनके हित में विश्राम, कल्याण, शान्ति और समृद्धि लाने के लिए जो कुछ आप कर सकते हैं, करते रहें। आपके काम इस संसार की इतिहास की पुस्तकों में लिखे जाएँ या न लिखे जाएँ—परन्तु अनन्तकाल में वे लिखे जाएँगे और मनाए जाएँगे।
एस्तेर 10:1–3
◊ पूरे वर्ष में सम्पूर्ण बाइबल पढ़ने के लिए: यहेजकेल 1–2; यूहन्ना 8:30-59
[1] डेब्रा रीड, एस्तेर, टिण्डेल ओल्ड टेस्टामेण्ट कॉमेण्ट्रीज़ (इण्टरवर्सिटी, 2008).