11 सितम्बर : जीवन के साथ क्या करना है

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11 सितम्बर : जीवन के साथ क्या करना है
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“वह जिसमें पहले दुष्टात्माएँ थीं, उससे विनती करने लगा, ‘मुझे अपने साथ रहने दे।’ परन्तु उसने उसे आज्ञा न दी, और उससे कहा, ‘अपने घर जाकर अपने लोगों को बता कि तुझ पर दया करके प्रभु ने तेरे लिए कैसे बड़े काम किए हैं।’ वह जाकर दिकापुलिस में इस बात का प्रचार करने लगा कि यीशु ने मेरे लिए कैसे बड़े काम किए।” मरकुस 5:18-20

यदि हम पराए और अनजाने वातावरणों में मिशनरियों को भेजना मूल्यवान समझते हैं, और यदि हम उन लोगों की सराहना करते हैं जो अपना देश छोड़कर विदेश जाते हैं, तो हमें इस प्रश्न का सामना करना चाहिए: “मैं दूसरों को यीशु के विषय में बताने के लिए क्या कर रहा हूँ? अपनी गली, अपने कार्यस्थल, और अपने प्रभाव के क्षेत्रों के विषय में मैं क्या कर रहा हूँ? क्या मैं निर्भीक होकर उस स्वतन्त्रता और जीवन का प्रचार कर रहा हूँ जिसकी प्रतिज्ञा मसीह में की गई है?”

हमारा मसीही जीवन बहुत सहज और आरामदेह हो सकता है। हम सोच सकते हैं, “मैं एक ठीक-ठाक मनुष्य हूँ। हर रविवार कलीसिया में जाता हूँ। बाइबल से प्रेरणा पाता हूँ। अपने परिवार का ध्यान रखता हूँ।” परन्तु यह उस परिवर्तित जीवन का वर्णन नहीं है जिसके लिए मसीह ने हमें बुलाया था, जब उसने कहा कि जाओ और चेले बनाओ (मत्ती 28:18-19)। ऐसा जीवन वह नहीं है जिसने इतिहास भर में संसार में अविश्वासियों को परिवर्तित किया है। ऐसी आत्म-सन्तुष्टि विश्वास को केवल एक अतिरिक्त वस्तु समझती है—एक ऐसा निर्णय जो चलते-चलते रास्ते में ले लिया जाता है, जैसे कोई व्यक्ति केवल इसलिए जिम की सदस्यता ले लेता है क्योंकि वह जानता है कि यह उसके लिए अच्छा है।

मरकुस 5 के दुष्टात्माग्रस्त मनुष्य के समान, प्रभु और उद्धारकर्ता के रूप में मसीह का जोश के साथ प्रचार करने से पहले हमें यह गहराई से समझना होगा कि हम कितने असहाय हैं: अपने पाप के कारण बन्दी हैं और मृत्यु के देश में भटक रहे हैं। तभी हम उस स्वतन्त्रता, आनन्द और जीवन को पूरी तरह समझ पाएँगे जिनके लिए यीशु मसीह हमें छुटकारा दिया है। यदि हमने यह समझ लिया है कि मसीह ने हमारे लिए क्या किया है, तो हमें यह बताने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी कि ऐसा दयालु छुटकारा अपने तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि उसे साझा किया जाना चाहिए—चाहे पृथ्वी के छोर तक, या केवल अपने आस-पास के लोगों के साथ।

यीशु के विषय में बताने के लिए आपको न तो पुस्तकें पढ़ने की और न किसी कक्षा में जाने की आवश्यकता है। आप बस यह बता सकते हैं कि मसीह ने आपको कैसे सीधा खड़ा कर दिया। मरकुस 5 में यीशु ने उस मनुष्य से कहा कि वह अपने परिवार और मित्रों से आरम्भ करे। उस क्षेत्र में सुसमाचार के फैलने की उसकी योजना एक परिवर्तित जीवन से आरम्भ हुई। इसलिए सम्भव है कि आप अपने मित्रों के सभी प्रश्नों के उत्तर न दे सकें। सम्भव है कि आप त्रिएकता के सिद्धान्त के विषय में सब कुछ न जानते हों। परन्तु यदि आप मसीह में हैं, तो आप यह जानते हैं कि जहाँ पहले आप अन्धे थे, अब देखते हैं।

कलीसिया सुख-भ्रमण का स्थान नहीं, बल्कि जीवन-रक्षक नावों का स्टेशन है। हमारा कर्तव्य और हमारा सौभाग्य यह है कि हम उस छुटकारा पाए मनुष्य के समान करें: जीवन के समुद्र में निकल जाएँ और . . .

नाशमान को बचाओ, मरते हुओं की सुधि लो,

दया से उन्हें पाप और कब्र से छुड़ा लो;

भटके हुओं पर रोओ, गिरे हुओं को उठाओ,

उन्हें यीशु के विषय में बताओ, जो उद्धार करने में सामर्थी है। [1]

आज यीशु आपको किसके पास जाने के लिए बुला रहा है?

  लूका 8:26-39

पूरे वर्ष में सम्पूर्ण बाइबल पढ़ने के लिए: न्यायियों 11–12; यूहन्ना 4:31-54 ◊


[1] फैनी क्रॉस्बी, “रेस्क्यू द पेरिशिंग” (1869).

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