23 अगस्त : एक आत्मा में सच्चा सामर्थ्य

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23 अगस्त : एक आत्मा में सच्चा सामर्थ्य
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“न तो बल से, और न शक्ति से, परन्तु मेरे आत्मा के द्वारा होगा, मुझ सेनाओं के यहोवा का यही वचन है।” जकर्याह 4:6

जीवन में किसी न किसी समय, जब हम कठिनाइयों का सामना करते हैं, हम सब यह पूछने के लिए प्रलोभित होते हैं, इस सब का फायदा क्या है? आगे बढ़ते रहने का प्रयत्न क्यों करें? मुझे यह सब कठिनाई या विरोध क्यों सहना पड़ता है? कभी-कभी ऐसा प्रतीत होता है कि कुछ इक्कीसवीं सदी की कलीसियाएँ और मसीही लोग मुख्यतः निराशा के भाव से ही जीते और कार्य करते हैं, न कि उस दिन में आनन्दित होकर जिसे प्रभु ने बनाया है (भजन 118:24)।

कुछ निराशा समझ में आने योग्य है। परन्तु हम निश्चय ही वहाँ सदा नहीं रहना चाहते—और न ही हमें वहाँ रहने की आवश्यकता है। हमारी निराशा हमें कभी बहकावे में न डाल दे कि परमेश्वर अब काम नहीं कर रहा। वास्तविकता यह है कि कभी-कभी परमेश्वर का कार्य सांसारिक दृष्टिकोण से उतना प्रभावशाली नहीं दिखता जितना हम चाहते हैं। परन्तु जहाँ “किसी को रथों का, और किसी को घोड़ों का भरोसा है,” वहाँ हम “अपने परमेश्‍वर यहोवा ही का नाम लेंगे” (भजन 20:7)। भीषण युद्ध के मध्य में रथों और घोड़ों जैसे युद्ध-साधन निश्चय ही भय उत्पन्न करते थे। फिर भी, चाहे ऐसा लगे कि अधिक सामर्थ्य वाला पक्ष ही सदा जीतता है, हमें कभी नहीं भूलना चाहिए कि परमेश्वर सदा अपने लोगों के बीच कार्य कर रहा है, और वही है जो विजय देगा—न तो बल से, न शक्ति से, परन्तु अपने आत्मा के द्वारा।

कोई भी वस्तु—न धन, न प्रभाव, न रणनीति, न क्षमता—हमारे जीवनों में और कलीसिया में आत्मा के कार्य का स्थान नहीं ले सकती। उदाहरण के लिए, नए नियम की कलीसिया के नेतृत्व को स्मरण करें। उसके अगुवे साहसी और सक्रिय पुरुष थे, कम से कम इस कारण से कि उन्होंने यीशु के साथ बहुत समय बिताया था। फिर भी, जब सुसमाचार के फैलने का समय आया, यीशु ने क्या किया? “उनसे मिलकर उन्हें आज्ञा दी, ‘यरूशलेम को न छोड़ो, परन्तु पिता की उस प्रतिज्ञा के पूरे होने की बाट जोहते रहो, जिसकी चर्चा तुम मुझ से सुन चुके हो’” (प्रेरितों 1:4)—और वह प्रतिज्ञा, निश्चय ही, पवित्र आत्मा था। पवित्र आत्मा के सामर्थ्य के बिना, प्रेरित लोग चाहे जितने भी सक्षम या दृढ़ क्यों न रहे हों, कहीं नहीं पहुँच सकते थे। पवित्र आत्मा के साथ, उन्होंने एक ऐसे आन्दोलन का आरम्भ किया जिसने संसार को बदल डाला।

आज के हमारे समय में, हमें स्मरण रखना चाहिए कि परमेश्वर के राज्य के लिए सच्चे लाभ कभी भी केवल समाज में ऊँचे पद, बड़े बैंक खाते, या बड़े अधिकार से नहीं आएँगे। इसके बजाय, हम परमेश्वर के आत्मा की प्रतीक्षा करते हैं कि वह जहाँ चाहे वहाँ चले और जैसे चाहे वैसे कार्य करे। आखिरकार, परमेश्वर के विचार हमारे विचार नहीं हैं, न ही हमारे मार्ग उसके मार्ग हैं। उसकी बुद्धि पृथ्वी से आकाश जितनी ऊँची है (यशायाह 55:8-9)। यदि भीतर-ही-भीतर आप अपने आप पर निर्भर हैं, तो यह स्मरण रखें: परमेश्वर का राज्य पवित्र आत्मा के कार्य के बिना न तो आपके अपने जीवन में, न आपकी गवाही के द्वारा और न ही आपके सेवाकार्य के द्वारा आगे बढ़ेगा। यदि भीतर-ही-भीतर आप निराश हैं, तो यह स्मरण रखें: परमेश्वर का राज्य आगे बढ़ेगा, यहाँ तक कि आपके अपने जीवन में, आपकी गवाही के द्वारा और आपके सेवाकार्य के द्वारा भी, क्योंकि पवित्र आत्मा कार्य कर रहा है। रथों पर या घोड़ों पर भरोसा न रखें, परन्तु अपने परमेश्वर यहोवा पर भरोसा रखें।

  भजन 115

◊ पूरे वर्ष में सम्पूर्ण बाइबल पढ़ने के लिए: भजन 113–115; 2 कुरिन्थियों 2

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