“[परमेश्वर] ने उसको बाहर ले जा के कहा, ‘आकाश की ओर दृष्टि करके तारागण को गिन, क्या तू उनको गिन सकता है?’फिर उसने उससे कहा, ‘तेरा वंश ऐसा ही होगा।’ उसने यहोवा पर विश्वास किया; और यहोवा ने इस बात को उसके लेखे में धर्म गिना।” उत्पत्ति 15:5-6
यदि हमारे विश्वास की नींव दीर्घ प्रतीक्षा के समयों में भी अटल रहनी है, तो हमें इन दो सत्यों में दृढ़ विश्वास रखना होगा: पहला, कि परमेश्वर में सामर्थ्य है कि जो कुछ उसने प्रतिज्ञा किया है, वह उसे पूरा करे; और दूसरा, कि परमेश्वर स्वयं हमारे हर काल में हमारी प्रत्येक आवश्यकता के लिए पर्याप्त है।
अब्राहम का विश्वास उसके जीवन के प्रतीक्षा कक्ष में परखा गया। वह कई वर्षों तक एक परदेशी भूमि में रहा और परमेश्वर की प्रतिज्ञा के पूर्ण होने की बाट जोहता रहा कि उसका “निज पुत्र” संसार में आएगा (उत्पत्ति 15:4)। और यह उसकी प्रतीक्षा के बीच परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं पर विश्वास ही था, जिसे परमेश्वर ने “उसके लेखे में धर्म गिना।”
प्रेरित पौलुस जब अब्राहम के इस विश्वास का वर्णन करता है, तो वह लिखता है: “न अविश्वासी होकर परमेश्वर की प्रतिज्ञा पर सन्देह किया, पर विश्वास में दृढ़ होकर परमेश्वर की महिमा की; और निश्चय जाना कि जिस बात की उसने प्रतिज्ञा की है, वह उसे पूरा करने में भी समर्थ है” (रोमियों 4:20–21)। दूसरे शब्दों में, अब्राहम ने यह विश्वास किया कि कोई भी वस्तु, कोई भी शक्ति, परमेश्वर के वचन की पूर्ति में बाधा नहीं डाल सकती—यहाँ तक कि जब उसे यह भी दिखाई नहीं दे रहा था कि परमेश्वर अपनी प्रतिज्ञा को किस प्रकार पूरी करेगा। उसका विश्वास अन्धकार में एक अन्धी छलांग नहीं था; वरन् यह विश्वास परमेश्वर के चरित्र पर आधारित था।
आज के युग में, हम भी एक महान प्रतिज्ञा को थामे हुए हैं—कि प्रभु यीशु ने हमसे यह वादा किया है कि वह हमारे लिए एक स्थान तैयार कर रहा है और वह हमें अपने पास ले जाने के लिए लौटेगा (यूहन्ना 14:3)। इसलिए जब हम उसके वचन को थामते हैं, तो हमें स्वर्ग की आशा मिलती है। हमें यह पूर्ण निश्चय है कि यीशु व्यक्तिगत रूप से लौटेगा, वह दृश्य रूप से प्रकट होगा और वह अपने लोगों के लिए आएगा। ये प्रतिज्ञाएँ उतनी ही अटल और निश्चित हैं जितनी कि वह प्रतिज्ञा जो परमेश्वर ने अब्राहम को दी थी, जिसके पूर्ण होने के लिए उसे 25 वर्षों तक प्रतीक्षा करनी पड़ी।
इसके अतिरिक्त हम अब्राहम के अनुभव से यह भी सीखते हैं कि केवल परमेश्वर ही पर्याप्त है कि वह हमें प्रतीक्षा के समयों से निकाल कर अपने समय में अपने उद्देश्य की ओर ले चले। उत्पत्ति 17 में, परमेश्वर ने फिर से अब्राहम पर प्रगट होकर उसके विश्वास को दृढ़ किया। कैसे? अपने आपको प्रकट करके कि वह वास्तव में कौन है: “जब अब्राम निन्यानवे वर्ष का हो गया, तब यहोवा ने उसको दर्शन देकर कहा, ‘मैं सर्वशक्तिमान [एल-शद्दाई] परमेश्वर हूँ; मेरी उपस्थिति में चल और सिद्ध होता जा’” (उत्पत्ति 17:1)। इब्रानी शब्द “एल-शद्दाई” का अर्थ है: “परमेश्वर जो पर्याप्त है।” अर्थात, परमेश्वर ने अब्राहम को अपनी प्रतिज्ञाओं का आश्वासन अपने ही चरित्र के आधार पर दिया।
मसीही जीवन प्रतीक्षा का जीवन है। और परमेश्वर के प्रत्येक “अभी नहीं” और “थोड़ा ठहरो,” उसके उद्देश्य का भाग हैं। प्रतीक्षा का हर समय एक अवसर है कि आप परमेश्वर के वचन पर विश्वास करें। और जब आप प्रतीक्षा में हों, तब निश्चयपूर्वक यह जान लें कि वही परमेश्वर आपकी हर आवश्यकता को पूरा करने में सक्षम है। इसी में विश्राम पाएँ: जिस परमेश्वर पर आपने विश्वास किया है, वह अपनी प्रत्येक प्रतिज्ञा को पूरा करने में सक्षम है।
उत्पत्ति 17:1-8
◊ पूरे वर्ष में सम्पूर्ण बाइबल पढ़ने के लिए: जकर्याह 9–12; लूका 23:26-56