22 नवम्बर : स्वर्ग का चित्र

“मैंने दृष्‍टि की, और देखो, हर एक जाति और कुल और लोग और भाषा में से एक ऐसी बड़ी भीड़, जिसे कोई गिन नहीं सकता था, श्वेत वस्त्र पहने और अपने हाथों में खजूर की डालियाँ लिए हुए सिंहासन के सामने और मेमने के सामने खड़ी है, और बड़े शब्द से पुकारकर कहती है, ‘उद्धार के लिए हमारे परमेश्‍वर का, जो सिंहासन पर बैठा है, और मेमने का जय–जय कार हो!’” प्रकाशितवाक्य 7:9-10

स्वर्ग के बारे में हमारे कई विचार और गीत वास्तव में बाइबल कम आधारित हैं और विक्टोरियन युग के ईसाई धर्म तथा यूनानी दार्शनिक प्लेटो की शिक्षा पर आधारित ब्रह्मांड-दृष्टिकोण पर अधिक आधारित हैं। कुछ कलाकारों ने जैसा दिखाया है कि हम बादलों पर बैठकर वीणा बजाते रहेंगे—ऐसा स्वर्ग में नहीं होगा। हम इससे कहीं अधिक बेहतर काम करेंगे। पवित्रशास्त्र हमें दिखाता है कि हम परमेश्वर की स्तुति और मेमने की आराधना करेंगे।

प्रकाशितवाक्य की पुस्तक हमें मेमने के चारों ओर के प्रशंसा के सतत बढ़ते हुए घेरे को देखने के लिए आमन्त्रित करती है। पहले घेरे में हम चार जीवित प्राणी और चौबीस प्राचीनों को देखते हैं, जो धूप चढ़ाते हैं और स्तुति का नया गीत गाते हैं (प्रकाशितवाक्य 5:8-9)। दूसरे घेरे में, पद 11-13 में, हजारों-हजार स्वर्गदूत उसे आदर देते हैं, और फिर समस्त सृष्टि के सारे प्राणी इस गीत में सम्मिलित हो जाते हैं।

इसके बाद, प्रकाशितवाक्य की पुस्तक उन लोगों को उजागर करती है, जो मेमने के लहू से छुड़ाए गए हैं (7:4, 9)। उन्हें 1,44,000 की निश्चित संख्या में और एक ऐसी भीड़ के रूप में दर्शाया गया है, जिसे कोई गिन नहीं सकता। वे एक ओर इस्राएल की बारह जातियों से हैं, और दूसरी ओर हर जाति और भाषा के लोगों का समूह हैं। ये विवरण एक-दूसरे के विरोधी लग सकते हैं, लेकिन परमेश्वर के दृष्टिकोण से यह बिल्कुल संगत है। निश्चित संख्या पूर्णता और समाप्ति को दर्शाती है; परन्तु मनुष्य की दृष्टि से वह भीड़ इतनी विशाल है कि उसे गिना नहीं जा सकता।

परमेश्वर की दृष्टि में, जो लोग छुड़ाए गए हैं, वे उसके चुने हुए बेटे और बेटियाँ हैं, और हर जाति का प्रतिनिधित्व करते हुए। वह हर एक को व्यक्तिगत रूप से जानता है। फिर भी, उसकी प्रजा सभी लोगों में से बुलाई गई है। यह परमेश्वर की पूर्ण और सम्पूर्ण विजय का दृश्य है—और उसकी प्रजा उसकी जयजयकार करते हुए उसकी विजय में आनन्दित होती है।

इसलिए, हालाँकि इस दृश्य का आरम्भ चार जीवों और चौबीस प्राचीनों से होता है, लेकिन यह हजारों-हजारों की भीड़ तक पहुँचता है, जैसा कि पौलुस कहता है: “जो स्वर्ग में और पृथ्वी पर और पृथ्वी के नीचे हैं, वे सब यीशु के नाम पर घुटना टेकें” (फिलिप्पियों 2:10, विशेष बल दिया गया है)। हमारी स्तुति उस अनगिनत भीड़ की स्तुति से जुड़ जाएगी, और हम सभी यह घोषणा करेंगे कि मसीह वह मेमना है जो बलिदान हुआ, कि उसके लहू से हमारे पाप धो दिए गए हैं, कि हम धार्मिकता को धारण किए हुए हैं, और कि उसकी संगति में हम अनन्तकाल तक जीवित रहेंगे।

एक दिन हम मसीह के चारों ओर इस स्तुति के घेरे में शामिल होंगे, और हमारा प्रिय दूल्हा विजयी सिंह और दीन मेमने के रूप में आगे बढ़ेगा। लेकिन हमें तब तक प्रतीक्षा करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि हम अभी भी उसकी ओर अपनी दृष्टि लगाए हुए आराधना का गीत गा सकते हैं। एक दिन आप उसके सामने खड़े होंगे और उसे देखेंगे! और तब तक, आप प्रतिदिन उस दिन की ओर बढ़ते जा रहे हैं।

प्रकाशितवाक्य  7:1-17

पूरे वर्ष में सम्पूर्ण बाइबल पढ़ने के लिए: 2 इतिहास 4– 6; लूका 5:17-39 ◊

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