विश्वास ही से हाबिल ने कैन से उत्तम बलिदान परमेश्वर के लिए चढ़ाया, और उसी के द्वारा उसके धर्मी होने की गवाही भी दी गई, क्योंकि परमेश्वर ने उसकी भेंटों के विषय में गवाही दी।” इब्रानियों 11:4
वह क्या है जो हमारे कार्यों को परमेश्वर के लिए सराहनीय बनाता है?
उत्पत्ति 4 में इस संसार में सबसे पहले जन्मे दो पुत्रों—कैन और हाबिल—की कहानी बताई गई है: “कुछ दिनों के पश्चात कैन यहोवा के पास भूमि की उपज में से कुछ भेंट ले आया, और हाबिल भी अपनी भेड़–बकरियों के कई एक पहलौठे बच्चे भेंट चढ़ाने ले आया और उनकी चर्बी भेंट चढ़ाई; तब यहोवा ने हाबिल और उसकी भेंट को तो ग्रहण किया, परन्तु कैन और उसकी भेंट को उसने ग्रहण न किया” (उत्पत्ति 4:3-5)। इसी बलिदान का उल्लेख इब्रानियों का लेखक करता है जब वह हाबिल और उसके विश्वास के बारे में हमें बताता है।
सबसे पहले वह यह कहता है कि “विश्वास से” ही हाबिल ने अपने भाई से उत्तम बलिदान चढ़ाया। और इसी बलिदान के कारण हाबिल “धर्मी ठहराया गया।” यदि हम यह अनुमान लगाते रहेंगे कि क्यों परमेश्वर ने हाबिल की भेंट को स्वीकार किया और कैन की भेंट को नहीं, तो हम खो जाएँगे। लेकिन हमें उन तथ्यों पर ध्यान देना चाहिए जो स्पष्ट रूप से बताए गए हैं—और जो जानकारी हमें दी गई है, उसका केन्द्र में यह तथ्य सुस्पष्ट रीति से बताया गया है: परमेश्वर हमारे कार्यों को इसलिए स्वीकार नहीं करता कि वे बाहरी रूप से कितने बड़े या प्रभावशाली हैं, बल्कि इसलिए क्योंकि वे एक आज्ञाकारी और समर्पित हृदय की सच्ची अभिव्यक्ति होते हैं।
हाबिल की भेंट इसलिए स्वीकार नहीं की गई थी क्योंकि वह पशु की बलि थी, जबकि कैन की भेंट पौधों की उपज थी। अन्तर भेंटों में नहीं, बल्कि भेंट चढ़ाने वालों में था। जॉन कैल्विन इस पर टिप्पणी करते हैं कि हाबिल की भेंट को इसलिए ग्रहण किया गया क्योंकि वह “विश्वास के द्वारा पवित्र की गई” थी।[1]
यह सिद्धान्त वही है, जो परमेश्वर ने अपने भविष्यद्वक्ताओं के द्वारा भी स्पष्ट किया है। उदाहरण के लिए, वह यशायाह में कहता है: “व्यर्थ अन्नबलि फिर मत लाओ; धूप से मुझे घृणा है। नए चाँद और विश्रामदिन का मनाना, और सभाओं का प्रचार करना, यह मुझे बुरा लगता है। महासभा के साथ ही साथ अनर्थ काम करना मुझसे सहा नहीं जाता” (यशायाह 1:13)। यह ऐसा है मानो परमेश्वर कह रहा हो: मुझे बछड़ों, बकरों और मेमनों की मिमियाहट में कोई रुचि नहीं है। मैं बलिदान से अधिक आज्ञाकारिता की लालसा करता हूँ (1 शमूएल 15:22 देखें)। यदि तुम इन कार्यों पर इस आशा से निर्भर हो कि वे तुम्हें मेरे लिए ग्रहणयोग्य बना देंगे, तो मैं तुम्हें यह स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि ऐसा कभी नहीं होगा।
“विश्वास बिना उसे प्रसन्न करना अनहोना है” (इब्रानियों 11:6)। हमारे अच्छे कार्य परमेश्वर के सामने स्वीकृति पाने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे उस स्वीकृति का फल हैं जो हमें विश्वास के द्वारा मिलती है। वे हमारी ओर से परमेश्वर के प्रेम का प्रत्युत्तर हैं, न कि उसके प्रेम को पाने का साधन। यदि आपके कार्य—हाबिल के समान—परमेश्वर की महिमा और प्रसन्नता के कारण बनते हैं, तो यह केवल इसलिए होगा क्योंकि वे आपके प्रेम, समर्पण और व्यक्तिगत विश्वास की बाहरी अभिव्यक्ति हैं। इसलिए आज, परमेश्वर की आज्ञाओं का पालन इस उद्देश्य से न करें कि आप उसके द्वारा स्वीकृत किए जाएँ या उसकी स्वीकृति बनाए रखें। वह स्वीकृति तो विश्वास के द्वारा पहले ही मिल चुकी है। साथ ही, इस कारण लापरवाही भी न बरतें कि आप पहले से ही स्वीकृत हैं। बल्कि, उसके प्रेम में अपनी स्थिति का आनन्द लें—और यही आनन्द आपकी आज्ञाकारिता के पीछे की प्रेरणा बने।
यशायाह 1:10-20
पूरे वर्ष में सम्पूर्ण बाइबल पढ़ने के लिए: आमोस 7–9; यूहन्ना 8:1-29 ◊
[1] कॉमैणट्रीज़ ऑन दि एपिस्ट्ल ऑफ पॉल दि अपोस्ट्ल टू द हिब्रूज़, अनुवादक जॉन ओवेन (कैल्विन ट्रांसलेशन सोसायटी, 1853), पृ. 267.