7 सितम्बर : परमेश्वर की प्रजा

Alethia4India
Alethia4India
7 सितम्बर : परमेश्वर की प्रजा
Loading
/

“यहूदी वह नहीं जो प्रगट में यहूदी है; और न वह खतना है जो प्रगट में है और देह में है। पर यहूदी वही है जो मन में है; और खतना वही है जो हृदय का और आत्मा में है, न कि लेख का।” रोमियों 2:28-29

हर राज्य के नागरिक होते हैं, और परमेश्वर का राज्य भी अलग नहीं है। फिर, परमेश्वर के राज्य में नागरिक कौन हैं? परमेश्वर की प्रजा कौन हैं?

परमेश्वर की प्रजा वे लोग हैं, जिन्होंने यीशु मसीह में अपना विश्वास रखा है। ये लोग परमेश्वर के राज्य का हिस्सा अपनी बुद्धि, शक्ति, या किसी अन्य बाहरी कारण से नहीं हैं, बल्कि केवल और केवल इसलिए हैं, क्योंकि परमेश्वर ने उनसे प्रेम किया और उन्हें अपने पुत्र में विश्वास का उपहार दिया। यीशु ने फरीसियों को डाँटे क्योंकि वे सोचते थे कि अपने वंश के कारण वे परमेश्वर के परिवार का सदस्य हैं: “यीशु ने उनसे कहा, ‘यदि तुम अब्राहम की सन्तान होते, तो अब्राहम के समान काम करते’” (यूहन्ना 8:39)। और अब्राहम ने क्या किया? उसने परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं पर विश्वास किया; उसने “परमेश्वर पर विश्वास किया और यह उसके लिए धार्मिकता गिनी गई” (गलातियों 3:6)।

तो फिर, हम परमेश्वर के परिवार के पूर्ण सदस्य हमारे द्वारा किए गए किसी काम के कारण नहीं हैं, बल्कि परमेश्वर के आत्मा के कार्य से हैं, जो हमारे हृदयों को कायल करता है, हमें विश्वास करने के लिए प्रेरित करता है, और हमें पश्चाताप की ओर ले जाता है। हमें परमेश्वर की प्रजा में शामिल होने के लिए यहूदी कानून के आनुष्ठानिक नियमों का पालन करने या अब्राहम के शारीरिक वंशज होने की आवश्यकता नहीं है। रोमियों 2:29 में, पौलुस मूल रूप से यह पूछता है, अब्राहम की सन्तान कौन हैं? इसका उत्तर है: वही जो हृदय का खतना करवाता है।

जब हम इन सत्यों पर ध्यान करते हैं, तो हम यह सवाल कर सकते हैं कि क्या पौलुस को यहूदी होने का कोई लाभ लगता था। पौलुस ने यह स्पष्ट किया कि वास्तव में इसका एक अद्‌भुत लाभ था, क्योंकि यहूदियों ने परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं को सबसे पहले प्राप्त किया, जिससे उन्हें मसीह में पूरे होने वाली भविष्यवाणियों को समझने का एक अद्वितीय अवसर मिला (रोमियों 3:1-2)। लेकिन इस समझ से कोई भी परमेश्वर के राज्य का नागरिक नहीं बनता। यह अवसर केवल उन लोगों के लिए खुला और आरक्षित है, जो उसके राजा के अधीन होते हैं। चाहे हम यहूदी हों या अन्यजाति—हमारी पृष्ठभूमि चाहे जो भी हो, हम चाहे जहाँ भी पैदा हुए हों, और चाहे जैसे भी पले-बढ़े हों— परमेश्वर मसीह में विश्वास करने वाले सभी लोगों को उद्धार प्रदान करता है। परमेश्वर के राज्य में हमारी नागरिकता जाति या बाहरी बातों से नहीं जुड़ी होती, बल्कि मसीह में विनम्र, बालक जैसे विश्वास से जुड़ी होती है।

संसार भर में लोग यह जानने के लिए संघर्ष करते हैं कि उनका सही स्थान कहाँ है और वे किसी कम्पनी, समाज, मित्र मण्डल, या यहाँ तक कि अपने परिवार में अपनी स्थिति बनाए रखने के लिए भी संघर्ष करते हैं। परमेश्वर आपसे संघर्ष करने या प्रयास करने को नहीं कहता, बल्कि केवल आनन्द लेने को कहता है। यदि आप यीशु में विश्वास करके परमेश्वर की प्रजा के लोग हैं, तो आप उसके नाम से उद्धार पाए हैं, आप लज्जा से मुक्त हो गए हैं, और आप उसकी प्रजा हैं। यहीं पर आपको आपका सही स्थान मिलता है, यहीं पर आपको अपना घर मिलता है।

इफिसियों 2:11-22

पूरे वर्ष में सम्पूर्ण बाइबल पढ़ने के लिए: न्यायियों 1–3; यूहन्ना 2 ◊

Leave A Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *