27 अगस्त : अनुग्रह प्राप्त करना

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27 अगस्त : अनुग्रह प्राप्त करना
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“परन्तु यहोवा के अनुग्रह की दृष्‍टि नूह पर बनी रही।” उत्पत्ति 6:8

आम धारणा में नूह एक आत्मिक योद्धा और विश्वास का नायक माना जाता है। परन्तु सच्चाई यह है कि वह भी एक साधारण मनुष्य था। वह भी बाकी सभी की तरह अपने दैनिक कार्यों में व्यस्त रहता था, अपनी जीविका कमाता था और अपने बच्चों का पालन-पोषण करता था।

नूह की कहानी आरम्भ होने से पहले पवित्रशास्त्र हमें बताता है: “यहोवा ने देखा कि मनुष्यों की बुराई पृथ्वी पर बढ़ गई है, और उनके मन के विचार में जो कुछ उत्पन्न होता है वह निरन्तर बुरा ही होता है। और यहोवा पृथ्वी पर मनुष्य को बनाने से पछताया, और वह मन में अति खेदित हुआ” (उत्पत्ति 6:5-6)। यहाँ कोई भेदभाव नहीं किया गया है। इसमें कोई अपवाद नहीं है कि सम्पूर्ण मानवजाति दुष्टता में लिप्त थी और नूह भी इससे अछूता नहीं था।

सन्देश स्पष्ट है: सभी ने पाप किया था। सभी परमेश्वर से विमुख हो गए थे। सभी को न्याय का सामना करना था। लेकिन तभी एक महत्त्वपूर्ण वाक्य आता है— “परन्तु . . . नूह . . .।” पाप और न्याय की वास्तविकता के बावजूद, परमेश्वर के अनुग्रह के कारण एक दिव्य परिवर्तन आता है। परमेश्वर का अनुग्रह, जो न तो समझाया जा सकता है और न ही कमाया जा सकता है, नूह पर प्रकट हुआ। यही एकमात्र बात थी जिसने उसे बाकी मनुष्यजाति से अलग किया। परमेश्वर ने नूह और उसके परिवार को अपने अनुग्रह के पात्र के रूप में चुना और उसके साथ एक ऐसा सम्बन्ध स्थापित किया, जो पहले अस्तित्व में नहीं था। इसी अनुग्रह के कारण, नूह “धर्मी पुरुष” बना, जो “परमेश्वर ही के साथ-साथ चला” (उत्पत्ति 6:9)।

नूह परमेश्वर से कोई विशेष अधिकार नहीं माँग सकता था। उसके स्वयं के किसी गुण या प्रयास के कारण नहीं, बल्कि परमेश्वर ने पूर्णतः अपनी कृपा से नूह के जीवन में अनायास ही हस्तक्षेप किया।

बहुत से लोग मानते हैं कि अनुग्रह केवल नए नियम में पाया जाता है और पुराने नियम में तो केवल आग, गन्धक, व्यवस्था और न्याय की ही बात होती है, और अनुग्रह केवल यीशु के आने पर ही आता है। परन्तु सच्चाई यह है कि अनुग्रह न केवल सृष्टि से पहले अस्तित्व में था, बल्कि पूरे इतिहास में न्याय के मध्य भी प्रकट होता रहा है। बाइबल के प्रत्येक पृष्ठ पर अनुग्रह प्रकट होता है।

पूरी बाइबल में ही अनुग्रह प्रकट होता रहता है। नूह ने परमेश्वर के वचन के प्रति आज्ञाकारिता में एक नाव का निर्माण किया, जबकि उसके पास केवल परमेश्वर का वचन ही था जिस पर वह भरोसा कर सकता था। जब हम अनुग्रह को उसकी पूर्णता में अनुभव करते हैं, तो यह हमें विनम्र बना देता है और परमेश्वर को महान करता है। यह हमें यह एहसास कराता है कि जीवन परमेश्वर और उसकी भलाई के बारे में है, न कि हमारे बारे में। यह हमें उसके वचन पर विश्वास करने और उसकी आज्ञाओं का पालन करने के लिए प्रेरित करता है।

आज आपको संसार से अलग करने वाली एकमात्र बात वही है जिसने नूह को उसकी पीढ़ी से अलग किया था—परमेश्वर का अवर्णनीय और अपरिवर्तनीय अनुग्रह। इसलिए आत्मिक घमण्ड और सांसारिक समझौते से सावधान रहें। हममें से कोई भी इतना बुद्धिमान नहीं है कि उद्धार के आनन्द को स्वयं समझ सके, और न ही इतना अच्छा कि उसे पाने के योग्य हो सके। आप और मैं इसके योग्य नहीं हैं—फिर भी, परमेश्वर ने हमारे जीवनों में हस्तक्षेप किया है। जब परमेश्वर का अनुग्रह हमारे हृदय को छू लेगा, केवल तब ही हम नूह की तरह इस संसार के मार्ग पर नहीं, बल्कि अपने सृष्टिकर्ता के मार्ग पर चलेंगे, और आज्ञाकारिता से भरी विनम्रता और आत्मविश्वास से भरी आशा के साथ जीवन जीएँगे। केवल अनुग्रह ही ऐसा प्रभाव डाल सकता है।

उत्पत्ति 6

◊ पूरे वर्ष में सम्पूर्ण बाइबल पढ़ने के लिए: भजन 120–122; 2 कुरिन्थियों 6

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