“योना यहोवा के सम्मुख से तर्शीश को भाग जाने के लिए उठा, और याफा नगर को जाकर तर्शीश जानेवाला एक जहाज़ पाया; और भाड़ा देकर उस पर चढ़ गया कि उनके साथ यहोवा के सम्मुख से तर्शीश को चला जाए। तब यहोवा ने समुद्र में एक प्रचण्ड आँधी चलाई, और समुद्र में बड़ी आँधी उठी, यहाँ तक कि जहाज़ टूटने पर था।” योना 1:3-4
हम सृष्टि पर नियन्त्रण नहीं रखते। लेकिन परमेश्वर रखता है—और इसलिए वह हमारी सारी प्रशंसा और आराधना के योग्य है।
महासागरों पर—वास्तव में सम्पूर्ण सृष्टि पर—परमेश्वर का नियन्त्रण भजनकारों के कार्य में निरन्तर प्रशंसा का कारण था। जब हम भजनों को पढ़ते हैं, तो हम बार-बार पाते हैं कि सृष्टि की रचना पर, महासागरों पर, यहाँ तक कि उनके ज्वारों और लहरों के उतार-चढ़ाव पर भी परमेश्वर के नियन्त्रण रखने के परम सामर्थ्य की प्रशंसा करने में परमेश्वर के लोग आनन्दित होते हैं।
उदाहरण के लिए हम भजन 33 में देखते हैं कि “वह समुद्र का जल ढेर के समान इकट्ठा करता; वह गहिरे सागर को अपने भण्डार में रखता है” (पद 7)। यह एक नाटकीय चित्र है—और यह परमेश्वर की उत्कृष्टता और महिमा का हिस्सा है। जैसे हम एक जग नींबू पानी को हिला कर उसे एक बर्तन में से दूसरे बर्तन में डाल सकते हैं, वैसे ही सर्वशक्तिमान परमेश्वर पृथ्वी के सभी महासागरों को इकट्ठा करके मटकों में रख सकता है। इसलिए यह कितना सही और उचित है कि हम अपने सृष्टिकर्ता परमेश्वर की आराधना श्रद्धा और आदर के साथ करें!
इसी तरह, सृष्टि पर परमेश्वर की सत्ता हमें उसके प्रावधान पर विश्वास करने के लिए प्रोत्साहित करती है। योना की कहानी में आगे हम पाते हैं कि प्रभु ने “रेंड़ का पेड़ उगाकर बढ़ाया,” परमेश्वर ने “एक कीड़े को भेजा,” और “परमेश्वर ने पुरवाई बहाकर लू चलाई” ताकि वह योना और नीनवे के लोगों के लिए अपनी योजनाओं को पूरा कर सके (योना 4:6-8)। यह उस समय के और आज के परमेश्वर-विहीन लोगों की मानसिकता से बहुत अलग है।
योना के जहाज के चालक समुद्र को एक अप्रत्याशित और निरंकुश प्राचीन शक्ति मानते थे, जिसकी दया पर वे सभी बन्दी थे। उसी तरह, आज हम इस विचार का सामना करते हैं कि “प्रकृति माँ” एक ऐसी निर्दयी ताकत है, जिसे वश में नहीं किया जा सकता। लेकिन सच्चाई यह है कि सभी चीजें, सम्पूर्ण सृष्टि, परमेश्वर के सेवक हैं (भजन 119:91)। हम भाग्य के सागर में बहने या अंधी, निराकार शक्तियों के प्रहार सहने के लिए छोड़ नहीं दिए गए हैं। नहीं, परमेश्वर “तारों को गिनता, और उनमें से एक-एक का नाम रखता है” (भजन 147:4)।
केवल सर्वशक्तिमान सृष्टिकर्ता प्रभु ही सागर को ढेरों में इकट्ठा कर सकता है और सम्पूर्ण सृष्टि को अपने निर्देशों का पालन करने का आदेश दे सकता है। केवल यही नहीं, वह अपने आदेशों को अपने लोगों के भले के लिए निर्देशित करता है। वह बड़ा तूफान जिसे परमेश्वर ने समुद्र पर भेजा था, जब योना का जहाज तर्शीश की ओर जा रहा था, वह उसके ऊपर शाप नहीं था, बल्कि यह उसे अपने परमेश्वर के प्रति विश्वासपूर्वक आज्ञाकारिता में वापस लौटने के लिए एक पुकार थी। जो कुछ परमेश्वर ने योना पर भेजा, उससे परमेश्वर ने उसे बचाया भी। कितना अद्भुत है: परमेश्वर ने एक बड़ी आँधी की शक्ति को केवल एक भटके हुए बच्चे को घर वापस लाने के लिए बुलाया।
सचमुच, सभी चीजें परमेश्वर की महिमा और उसके लोगों के भले के लिए व्यवस्थित हैं—जिसमें आप भी शामिल हैं। यही वह परमेश्वर है जिसकी हम वन्दना करते हैं, यही वह परमेश्वर है जिस पर हम विश्वास करते हैं, और यही वह परमेश्वर है जिसे हम अपने जीवन अर्पित करते हैं। आज इस सत्य को अपनी जुबान पर रखें: “यहोवा महान और अति स्तुति के योग्य है, और उसकी बड़ाई अगम है” (भजन 145:3)।
भजन 145
पूरे वर्ष में सम्पूर्ण बाइबल पढ़ने के लिए: भजन 79– 80; प्रेरितों 28 ◊