“अतः जैसा पवित्र आत्मा कहता है, ‘यदि आज तुम उसका शब्द सुनो, तो अपने मन को कठोर न करो, जैसा कि क्रोध दिलाने के समय और परीक्षा के दिन जंगल में किया था। जहाँ तुम्हारे बापदादों ने मुझे जाँचकर परखा और चालीस वर्ष तक मेरे काम देखे।’” इब्रानियों 3:7-9
इस्राएलियों के प्रतिज्ञा के देश में प्रवेश करने से पहले परमेश्वर ने उन्हें कनान में बारह जासूस भेजने का आदेश दिया था। उन जासूसों में से दो, यहोशू और कालेब, अपनी “अल्पसंख्यक रिपोर्ट” के लिए प्रसिद्ध हैं, जिसमें उन्होंने यह निष्कर्ष निकाला कि देश अधिकार में ले लिए जाने के लिए तैयार था। लेकिन लोगों ने उनकी बात नहीं मानी, और परमेश्वर पर अविश्वास दर्शाया। परमेश्वर पर विश्वास करने के सारे प्रमाण मौजूद होने के बावजूद उन्होंने अपनी समझ पर भरोसा करने का फैसला ले लिया।
सन्देह के उस पल में लोगों में यह डर आ गया कि यदि वे कालेब और यहोशू की बात मान कर परमेश्वर की शक्ति पर भरोसा करते हुए एक शक्तिशाली शत्रु पर विजय प्राप्त करने के लिए कदम बढ़ाएँगे, तो वे मारे जाएँगे (गिनती 13:25-14:4)। परमेश्वर ने तुरन्त न्याय-दण्ड भेजा: परमेश्वर द्वारा दिए गए प्रतिज्ञा के देश का आनन्द लेने के बजाय एक पूरी पीढ़ी ने अपना जीवनभर मरुभूमि में बिता दिया और उस आनन्द का अनुभव नहीं कर पाए जो परमेश्वर ने उन्हें दिया था (गिनती 14:21-23)।
इस्राएलियों की तरह आप और मैं भी अविश्वास की ओर प्रवृत्त हो सकते हैं। इब्रानियों का लेखक हमें चेतावनी देता है, “हे भाइयो, चौकस रहो कि तुम में ऐसा बुरा और अविश्वासी मन न हो, जो तुम्हें जीवते परमेश्वर से दूर हटा ले जाए” (इब्रानियों 3:12)। ऐसी चेतावनी नहीं दी जाती यदि हमारे हृदय पाप और अविश्वास के खतरे में न होते! हम पाप करना चाहते हैं। हम अपनी ही राह पर चलना चाहते हैं। हम विश्वास करना नहीं चाहते।
अविश्वास हमें इस प्रकार कठोर कर देता है कि जब बाइबल पढ़ी जाती है, तो परमेश्वर का वचन हमारे हृदय और मन में उस बीज की तरह नहीं आता जो तैयार भूमि में बोया जाता है, इसके बजाय हमारे हृदय और मन उस तिरछी छत की तरह हो जाते हैं, जिस पर वर्षा की बूँदें नहीं रुकतीं। जितना अधिक बाइबल सिखाई जाती है, हम पर उसका प्रभाव उतना ही अधिक उस कठोर सतह के जैसे हो जाता है, जिसके पार कुछ भी नहीं जा सकता।
इसलिए सावधान रहें, ताकि आपका हृदय पवित्रशास्त्र के सत्यों के प्रति अभेद्य न हो जाए। सावधानी बरतें कि आप ऐसे व्यक्ति न बन जाएँ जो बाइबल का बचाव करता है, दूसरों से इसके बारे में बात करता है, और उद्धरण देता है, लेकिन साथ ही अपने हृदय को परमेश्वर द्वारा कही गई बातों के खिलाफ कठोर करता रहता है।
हम ऐसे अविश्वास से अपनी रक्षा कैसे कर सकते हैं? दूसरों को यह याद रखने के लिए प्रेरित करें कि परमेश्वर ने मसीह के द्वारा क्या किया है, और उनसे यह भी कहें कि वे आपके लिए भी ऐसा ही करें (कुलुस्सियों 3:16)। और उसी आत्मा से, जिसने पवित्रशास्त्र को लिखा है, कहें कि वह आपके हृदय में काम करे जब आप उसकी आवाज़ सुनते हैं। जब आपको परमेश्वर की शक्ति और देखभाल की याद दिलाई जाती है, और आत्मा आपके अन्दर काम करता है, तो आपका हृदय परमेश्वर के वचन के बीजों को ग्रहण करने के लिए कोमल हो जाएगा।
लूका 13:18-35
पूरे वर्ष में सम्पूर्ण बाइबल पढ़ने के लिए: भजन 18–19; प्रेरितों 13:1-25 ◊