11 जून : खुला कान, तत्पर इच्छा

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11 जून : खुला कान, तत्पर इच्छा
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“तब प्रभु ने उससे कहा, ‘उठकर उस गली में जा जो ‘सीधी’ कहलाती है, और यहूदा के घर में शाऊल नामक एक तरसुसवासी को पूछ; क्योंकि देख, वह प्रार्थना कर रहा है।’” प्रेरितों 9:11

बाइबल में, प्रेरितों 9 से पहले हनन्याह का कोई उल्लेख नहीं है, और इसके बाद भी केवल एक संक्षिप्त उल्लेख (प्रेरितों 22:12) है। इन दोनों उल्लेखों के अनुसार वह कोई महान व्यक्ति नहीं था, जिसने संसार के मापदण्डों के अनुसार कोई महान कार्य किए थे। फिर भी, परमेश्वर ने उसके भीतर एक विश्वासपूर्ण हृदय देखा और उसे शाऊल (जो बाद में पौलुस के नाम से जाना गया) के जीवन-परिवर्तन की प्रक्रिया में अद्‌भुत रीति से उपयोग किया।

हनन्याह की तरह शायद आपने भी अपने जीवन में कोई महान कार्य नहीं किए होंगे, अद्‌भुत स्थानों पर नहीं गए होंगे, या कोई बड़ी प्रसिद्धि प्राप्त नहीं की होगी। लेकिन परमेश्वर ऐसे व्यक्तियों को चुनता है और उन्हें अपनी इच्छा को पूरा करने के लिए उपयोग करता है। हमारा भाग बस इतना है कि हम हनन्याह की तरह हों, अर्थात कान खुले रखें और अपनी इच्छा को परमेश्वर को सुनने और उसकी आज्ञा को मानने के लिए तैयार रखें।

इस पद में जो मुख्य बात है वह यह नहीं है कि परमेश्वर ने हनन्याह से कैसे बात की, बल्कि यह है कि हनन्याह ने कैसे प्रतिक्रिया दी: “हाँ, प्रभु।” उसका कान परमेश्वर को सुनने के लिए तैयार था। क्या आपके कान भी ऐसे हैं? क्या आप परमेश्वर को उसके वचन के माध्यम से बोलते हुए सुनते हैं? क्या आपके हृदय की अवस्था ऐसी है कि जो कुछ भी वह आपको करने के लिए बुला रहा है, आप कहेंगे, “हाँ, प्रभु”?

जब हम विचार करते हैं कि परमेश्वर ने हनन्याह से क्या करने को कहा और किसके लिए कहा, तो उसका परमेश्वर को दिया गया उत्तर उल्लेखनीय प्रतीत होता है। उसने “इस मनुष्य [शाऊल] के विषय में बहुतों से सुना है कि इसने यरूशलेम में तेरे पवित्र लोगों के साथ बड़ी–बड़ी बुराइयाँ की हैं” और वह जानता था कि दमिश्क में भी शाऊल को “प्रधान याजकों की ओर से अधिकार मिला है कि जो लोग तेरा नाम लेते हैं, उन सब को बाँध ले” (प्रेरितों 9:13-14)। फिर भी उसने शाऊल और उसकी गतिविधियों के प्रति किसी भी डर या नफरत के बावजूद परमेश्वर के बुलावे का पालन करने का निर्णय लिया। उसने सुना, और उसने कार्य किया।

हम कितनी बार परमेश्वर के बुलावे के जवाब में अपनी निष्क्रियता के लिए बहाने बनाते हैं? हम कितनी बार अपने डर के पीछे छिपते हैं या अत्यधिक सावधानी से जीते हैं और यह भूल जाते हैं कि “परमेश्‍वर ने हमें भय की नहीं पर सामर्थ्य और प्रेम और संयम की आत्मा दी है” (2 तीमुथियुस 1:7)? हनन्याह ने अपने आज्ञापालन के माध्यम से इस शक्तिशाली आत्मा का प्रदर्शन किया।

हमारी संस्कृति बड़े नामों, बड़ी उपलब्धियों, और बड़ी रेटिंग्स की परवाह करती है। परमेश्वर के पास वही प्राथमिकताएँ नहीं हैं। हनन्याह का कोई बड़ा नाम या भारी लोकप्रियता नहीं थी; उसके पास बस परमेश्वर की आवाज़ सुनने के लिए एक खुला कान था और उसकी आज्ञा का पालन करने की इच्छाशक्ति थी। इसके परिणामस्वरूप उसका जीवन परमेश्वर की सेवा में उपयोगिता के लिए समर्पित हुआ। और उस दिन, इसका अर्थ यह हुआ कि वह पहला ऐसा व्यक्ति था जिसने पौलुस के पास जाकर उसे “भाई” कहकर परमेश्वर का प्रेम और अनुग्रह उसपर प्रकट किया (प्रेरितों 9:17)। इस प्रकार, भले ही वह बाइबल में केवल एक छोटा सा पात्र हों, फिर भी आप और मैं उनसे बहुत कुछ सीख सकते हैं।

हो सकता है कि इस जीवन में मसीह के प्रति आपकी विश्वासयोग्यता के लिए आपको कोई पहचान न मिले। हो सकता है कि आप उसकी सेवा में जोखिम उठा रहे हों और बलिदान कर रहे हों और महसूस कर रहे हों कि इससे कुछ ज्यादा अन्तर नहीं आ रहा और इस पर कोई ध्यान नहीं दे रहा। लेकिन यह संसार आपको जो कुछ भी दे सकता है, उससे कहीं बेहतर है कि जब आप स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करेंगे, तो आप परमेश्वर से यह सुनेंगे, “धन्य, हे अच्छे और विश्वासयोग्य दास” (मत्ती 25:21)। उसकी सेवा में किया गया कोई भी अच्छा कार्य कभी व्यर्थ नहीं जाता। वह इसे उद्धार की महान गाथा में बुन देता है।

यशायाह 6:1-13

पूरे वर्ष में सम्पूर्ण बाइबल पढ़ने के लिए: यिर्मयाह 18–19; मत्ती 23:23-39 ◊

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