26 मई : परमेश्वर का अपरिवर्तनीय वचन

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26 मई : परमेश्वर का अपरिवर्तनीय वचन
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“विश्‍वास ही से अब्राहम ने, परखे जाने के समय में, इसहाक को बलिदान चढ़ाया; और जिसने प्रतिज्ञाओं को सच माना था और जिससे यह कहा गया था, ‘इसहाक से तेरा वंश कहलाएगा,’ वही अपने एकलौते को चढ़ाने लगा।” इब्रानियों 11:17-18

जीवन कभी-कभी भारी महसूस हो सकता है। हर दिन नए चुनौतीपूर्ण क्षण लेकर आता है, जबकि पुरानी समस्याएँ बिना हल हुए जारी रहती हैं। यह आसान है कि हम अपने विश्वास को हमारी परिस्थितियों की समझ की कमी के कारण ठोकर खाकर गिरने दें—यह ऐसा है मानो विश्वास की छड़ी को यह कहते हुए जमीन पर फेंक देना, “मैं थक चुका हूँ, अब मैं और नहीं दौड़ सकता।” ऐसे क्षणों में, परमेश्वर का वचन हमें यह याद रखने के लिए प्रोत्साहित करता है कि मसीही विश्वास एक दृढ़ विश्वास है जो दृढ़ रहता है। यह सम्भव है कि हम परमेश्वर के आदेशों का पालन करते रहें, भले ही हमारे चारों ओर सब कुछ उसकी प्रतिज्ञाओं के विपरीत प्रतीत होता हो।

क्रूस से पहले, शायद पूरे पवित्रशास्त्र में अब्राहम के जीवन से अधिक अभूतपूर्व क्षण कहीं और नहीं मिलता। यह वह क्षण था जो पूरी तरह से परमेश्वर के आदेश से हुआ था: “[परमेश्वर] ने कहा, ‘अपने पुत्र को अर्थात अपने एकलौते पुत्र इसहाक को, जिससे तू प्रेम रखता है, संग लेकर मोरिय्याह देश में चला जा; और वहाँ उसको एक पहाड़ के ऊपर जो मैं तुझे बताऊँगा होमबलि करके चढ़ा।’. . . जब वे उस स्थान को जिसे परमेश्‍वर ने उसको बताया था पहुँचे; तब अब्राहम ने वहाँ वेदी बनाकर लकड़ी को चुन चुनकर रखा, और अपने पुत्र इसहाक को बाँध कर वेदी पर की लकड़ी के ऊपर रख दिया। फिर अब्राहम ने हाथ बढ़ाकर छुरी को ले लिया कि अपने पुत्र को बलि करे” (उत्पत्ति 22:2, 9-10)। अब्राहम के लिए परमेश्वर का आदेश स्पष्ट था—फिर भी यह परमेश्वर की प्रतिज्ञा के विपरीत प्रतीत होता था कि “पृथ्वी की सारी जातियाँ अपने को [अब्राहम के] वंश के कारण धन्य मानेंगी” और “जो तेरा वंश कहलाएगा वह इसहाक ही से चलेगा” (व 18; 21:12)। परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं की पूर्ति इसहाक के जीवित रहने पर निर्भर थी। यदि इसहाक मर जाता, तो यह प्रतिज्ञा कैसे पूरा होती?

फिर भी अब्राहम ने आज्ञा मानी। हालाँकि उसकी परिस्थितियाँ उसे परमेश्वर के वचन पर सन्देह करने और प्रश्न पूछने के लिए उकसा सकती थीं, लेकिन फिर भी अब्राहम ने विश्वास से कहा, इसमें भी परमेश्वर की कोई योजना है। उसकी प्रतिज्ञा यह थी कि इसहाक के माध्यम से सभी राष्ट्रों को आशीर्वाद मिलेगा। इसलिए उसे उठाने के लिए परमेश्वर उसे मरे हुओं में से जीवित करेगा (इब्रानियों 11:19)। यही कारण है कि जब अब्राहम बलि चढ़ाने के लिए निकला था, तो उसने अपने सेवकों से कहा था, “गदहे के पास यहीं ठहरे रहो; यह लड़का और  मैं वहाँ तक जाकर और दण्डवत करके फिर तुम्हारे पास लौट आएँगे” (उत्पत्ति 22:5, विशेष बल दिया गया है)। विश्वास का क्या अद्‌भुत अभिव्यक्ति है! यह न भूलें: जब अब्राहम को आदेश दिया गया, तो उसने उसका पालन किया। हालाँकि यह परमेश्वर द्वारा की गई प्रतिज्ञाओं के सीधे विरोध में प्रतीत होता था, अब्राहम ने अपना काम किया, और उसने परमेश्वर को अपना काम करने का अवसर दिया।

हम भी ऐसा कर सकते हैं। अपनी परिस्थितियों को, चाहे वे कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों, अपने आज्ञाकारिता को कम करने या परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं पर सवाल उठाने का कारण न बनने दें। अब्राहम और इसहाक के उस पहाड़ पर चढ़ने और उतरने के शताब्दियों बाद, परमेश्वर के अपने पुत्र ने उसी पहाड़ के किनारे से कब्र से जी उठकर यह साक्षात्कार दिया कि परमेश्वर अपनी प्रतिज्ञाओं को पूरा करता है। इसलिए आप आज जिस भी चुनौती का सामना करेंगे, उसमें आप आत्मविश्वास, आशा और प्रार्थना के साथ कह सकते हैं, “मैं आगे बढ़ सकता हूँ। मैं समाप्त नहीं हुआ। परमेश्वर अपना काम करेगा और इसलिए मैं अपना काम करूँगा।”

उत्पत्ति 22:1-19

पूरे वर्ष में सम्पूर्ण बाइबल पढ़ने के लिए: 2 राजाओं 12–14; मत्ती 14:1-21 ◊

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