18 मई : कृपा और प्रबन्ध

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18 मई : कृपा और प्रबन्ध
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“तब वह भूमि तक झुककर मुँह के बल गिरी, और उससे कहने लगी, ‘क्या कारण है कि तू ने मुझ परदेशिन पर अनुग्रह की दृष्‍टि करके मेरी सुधि ली है?’”  रूत 2:10

केवल वह दिल उस अनुग्रह को प्राप्त करने पर उचित रूप से आश्चर्यचकित होगा, जो यह जानता है कि वह अनुग्रह को पाने के योग्य नहीं है।

रूत कड़ी मेहनत करने वाली महिला थी। जिस तरह से उसने बोअज़ के खेत में काम करने वाले मजदूरों के पीछे मकई बीनने का काम किया, उसने प्रेरित पौलुस द्वारा थिस्सलुनीकियों की कलीसिया को दी गई शिक्षा का उदाहरण प्रस्तुत किया: “चुपचाप रहने और अपना–अपना काम–काज करने और अपने-अपने हाथों से कमाने का प्रयत्न करो; ताकि बाहर वालों से आदर प्राप्त करो, और तुम्हें किसी वस्तु की घटी न हो” (1 थिस्सलुनीकियों 4:11-12)। एक विदेशी भूमि में विधवा होकर और अपनी विधवा सास के साथ रहते हुए भी, रूत ने आत्म-दया में बैठकर किसी चमत्कारी हस्तक्षेप का इन्तज़ार नहीं किया। इसके बजाय, उसने हाथ में आए अवसर को अपनाया—अर्थात खेतों में जाकर बचे हुए अनाज को इकट्ठा करना—ताकि वह अपना और नाओमी का पालन-पोषण कर सकें। उसने न केवल अपने लिए प्रबन्ध करने की जिम्मेदारी ली, बल्कि अपने कार्य को मेहनत और दृढ़ता के साथ किया, जिसमें उसे पूरा दिन बहुत कम आराम के साथ काम करना पड़ा (रूत 2:7)। इन सब में रूत ने न तो पुरस्कार की माँग की और न ही यह महसूस किया कि उसे कोई कृपा मिलनी चाहिए। 

अपने प्रयासों के लिए खुद को बधाई देने या बोअज़ के खेत में काम करने के निर्णय का श्रेय लेने के बजाय, उसने अपने श्रम को अपनी जिम्मेदारी माना। इसलिए जब बोअज़ ने उसे कृपा और आशीर्वाद दिया (रूत 2:8-9), तो उसने आश्चर्य और आभार के साथ इसका जवाब दिया। वह जानती थी कि वह उससे कुछ पाने की हकदार नहीं थी, और इसलिए उसने इसे एक उपहार के रूप में स्वीकार किया। 

विनम्रता और आभार एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। एक आभार-हीन दिल घमण्ड से भरा होता है, लेकिन एक विनम्र दिल हमेशा आभारी होता है। 

बोअज़ की कृपा और सुरक्षा ने परमेश्वर द्वारा हमें दी जाने वाली शाश्वत कृपा और सुरक्षा की पूर्व सूचना दी, जो हमें बोअज़ के भावी वंशज, यीशु मसीह के माध्यम से मिलती है। रूत की तरह हम भी दीन होकर उसके जीवन की कहानी में हमारे शाश्वत जीवन की कहानी की गूंज सुन सकते हैं। जैसे बोअज़ ने रूत को भोजन और पानी दिया (रूत 2:9, 14), हम उनके चेहरों को एक अन्य पुरुष और महिला के चेहरे में बदलते देख सकते हैं—अर्थात यीशु और सामरी महिला के चेहरे में, जहाँ परमेश्वर के पुत्र ने उसे शाश्वत जल दिया जो उसकी आत्मिक प्यास को बुझा सकता था (यूहन्ना 4:1-45)। बोअज़ ने उस दिन रूत की शारीरिक आवश्यकताओं को पूरा किया; मसीह हमारी हर एक आवश्यकता को शाश्वत रूप से पूरा करता है। वह हम सब के लिए जीवन का जल और जीवन की रोटी है। 

“क्या कारण है कि तू ने मुझ परदेशिन पर अनुग्रह की दृष्‍टि करके मेरी सुधि ली है?” यही प्रश्न निरन्तर हमारी जुबान पर रहना चाहिए: “प्रभु यीशु, आपने मुझ पर कृपा दृष्टि क्यों की, कि आप मुझसे प्रेम करते हैं, जबकि मैं एक पापी हूँ?” इसका उत्तर सरल है: अनुग्रह। हम चाहे अपने परिवारों, अपनी कलीसियाओं और अपने प्रभु के लिए कुछ भी करें, हम केवल और केवल परमेश्वर के अनुग्रह के कारण ही कृपा प्राप्त करते हैं। आपके पास कोई और स्थिति नहीं है, और आपको किसी और की आवश्यकता भी नहीं है। परमेश्वर की कृपा से दिए गए प्रावधान के कारण आप गा सकते हैं, “मसीह पर, पक्की चट्टान पर, मैं खड़ा हूँ; बाकी सारी भूमि दलदल भरी रेत है।”[1] आज आपके दिल को इस अनुग्रह से आश्चर्यचकित होकर गाने दें।

इफिसियों 2:11-22

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