9 अप्रैल : सब नामों से ऊँचा नाम

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9 अप्रैल : सब नामों से ऊँचा नाम
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“मनुष्य के रूप में प्रगट होकर अपने आप को दीन किया, और यहाँ तक आज्ञाकारी रहा कि मृत्यु, हाँ, क्रूस की मृत्यु भी सह ली। इस कारण परमेश्‍वर ने उसको अति महान भी किया, और उसको वह नाम दिया जो सब नामों में श्रेष्ठ है।” फिलिप्पियों 2:8-9

एक प्रकार से बाइबल के सन्देश का सर्वोत्तम सार और इस सृष्टि का सबसे बुनियादी सत्य बस यह है: यीशु मसीह प्रभु है।

अधिकांश धर्मशास्त्री इस बात पर सहमत हैं कि जिस “नाम” का उल्लेख पौलुस ने पद 9 में किया है, केवल “प्रभु” ही हो सकता है (फिलिप्पियों 2:11)। यहाँ “प्रभु” के लिए प्रयुक्त यूनानी शब्द कुरियोस है, जिसका उपयोग यहोवा (याहवेह) के दिव्य नाम के रूप में 6,000 से अधिक बार सेप्टुआजिण्ट (पुराने नियम का यूनानी अनुवाद) में किया गया है—वह नाम जिसे आजकल अधिकांश अंग्रेजी बाइबलों में “प्रभु” के रूप में अनुवादित किया गया है। पौलुस पहले हमें यीशु के पृथ्वी पर रहने के दौरान उसकी दीनता के बारे में याद दिलाता है और फिर परमेश्वर के दिव्य नाम का उपयोग करके यीशु की दिव्यता को प्रमुख रूप से उजागर करता है।

याहवेह नाम चार व्यंजनाक्षरों (YHWH) से मिलकर बना है, जिसे इब्रानी में मूल रूप से उच्चारित करना असम्भव है—और ऐसा जानबूझकर किया गया था, क्योंकि यहूदी इस दिव्य नाम को अपने मुँह से उच्चारण करने का साहस नहीं करते थे। फिर भी, यह अद्वितीय परमेश्वर याहवेह पृथ्वी पर अवतरित हुआ और मसीह के रूप में स्वयं को मनुष्यों के सामने प्रकट किया। वह विनम्रता से क्रूस पर मर गया, और फिर उसे उच्चतम स्थान—उसका उचित स्थान—दिया गया और उस नाम से नवाजा गया जो “सब नामों से ऊँचा नाम है।” एक टिप्पणीकार ने कहा, “उसने अपरिभाष्य नाम को बदलकर एक ऐसा नाम बना दिया जिसे मनुष्य उच्चारित कर सके और जो पूरी दुनिया में जिसकी कामना की जा सके।” जिसने यह नाम धारण किया, परमेश्वर की दिव्यता उसमें “दया के वस्त्रों में सुसज्जित है।”[1]

पुराने नियम की भविष्यवाणी इस विचार को बार-बार मजबूत करती है। यशायाह 45 में, परमेश्वर एक ऐसी विशेषता का वर्णन करता है, जो केवल उसके स्वयं पर लागू होती है: “मुझे छोड़ कोई और दूसरा परमेश्‍वर नहीं है, धर्मी और उद्धारकर्ता परमेश्‍वर मुझे छोड़ और कोई नहीं है” (यशायाह 45:21)। पौलुस, जो पहले मसीह और उसके अनुयायियों का कट्टर विरोधी था, इस विशेष विवरण को मसीह पर लागू करता है, और उसकी दिव्यता का प्रभावशाली उद्‌घोष करता है। वह यह इंगित करता है कि यीशु को सार्वजनिक रूप से उसी महिमा से नवाजा गया है, जो उसके पृथ्वी पर हमारी खातिर अपमान सहने के लिए आने से पहले भी उचित रूप में उसकी थी। अब वह पिता के दाहिने हाथ विराजमान है। उसकी महिमा उन सभी के लिए दृष्टिगोचर है, जो उसे उद्धारकर्ता के रूप में जानते हैं। उसकी पहचान अस्पष्ट या संदिग्ध नहीं है।

एकमात्र उद्धारकर्ता केवल परमेश्वर है—और वह उद्धारकर्ता यीशु ही है, जिसके बारे में कहा गया था, “तू उसका नाम यीशु रखना, क्योंकि वह अपने लोगों का उनके पापों से उद्धार करेगा” (मत्ती 1:21)। वर्षों बाद, जब पौलुस की आँखें यीशु के बारे में सत्य के लिए खुल चुकी थीं, तौभी फिलिप्पियों को लिखे गए उसके शब्दों में हम श्रद्धा और प्रेम का अनुभव महसूस कर सकते हैं। यीशु मसीह प्रभु है। उसका नाम सब नामों से ऊँचा है। पौलुस ने इस सत्य से परिचित होने के बावजूद इस पर कभी भी लापरवाही नहीं दिखाई। हमें भी ऐसा नहीं करना चाहिए। अब रुकें और हर शब्द को इस अद्‌भुत व्यक्ति की प्रशंसा में एक श्रद्धा भरी स्तुति के रूप में आने दें: यीशु, अपने लोगों का उद्धारकर्ता . . . मसीह, लम्बे समय से प्रतिज्ञा किया गया राजा . . . प्रभु है, जो अवर्णनीय, प्रकट परमेश्वर है। और आप उसे “भाई” कह सकते हैं (इब्रानियों 2:11)।

 प्रकाशितवाक्य 1:9-20

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