“क्योंकि हर एक अच्छा वरदान और हर एक उत्तम दान ऊपर ही से है, और ज्योतियों के पिता की ओर से मिलता है, जिसमें न तो कोई परिवर्तन हो सकता है, और न अदल बदल के कारण उस पर छाया पड़ती है।” याकूब 1:17
क्या आप कभी उपहार खरीदने गए हैं और आपको पता ही नहीं था कि उस व्यक्ति को किस वस्तु की आवश्यकता है या उसे क्या चाहिए? आपको नहीं पता था कि कौन से नाप का या रंग का स्वेटर खरीदना है या बच्चे का खिलौना उसकी आयु के अनुसार उपयुक्त है या नहीं, इसलिए अन्ततः आपने हार मान ली हो और कहा, “मैं कुछ तो खरीद ही लेता हूँ! वे इसे वैसे भी वापस ले लेंगे। कौन इतनी चिन्ता करे?”
उपहार देना सदैव उतना सरल या आनन्ददायक नहीं होता जितना होना चाहिए। सच तो यह है कि हममें से सबसे उत्तम लोग भी हर बार उत्तम उपहार नहीं दे सकते क्योंकि हममें कमियाँ हैं। हमारे पास उचित उपहार देने के लिए ज्ञान और समझ की कमी होती है, और कभी-कभी संसाधनों या इच्छा-शक्ति की भी कमी होती है। इस बात में हम परमेश्वर से पूरी तरह से अलग हैं, क्योंकि परमेश्वर उत्तम वरदान देने वाला है, और केवल उत्तम वरदान ही देता है। वह स्वभाव से ही भला है और उदारता से भरपूर है। वह बदले में कुछ भी उम्मीद किए बिना देता है और वह प्राप्त करने वाले व्यक्तियों की योग्यता के आधार पर अपनी भलाई को सीमित नहीं करता। और उसके द्वारा दिए गए किसी भी वरदान को कभी भी वापस करने की आवश्यकता नहीं होती।
न केवल परमेश्वर उत्तम रीति से उदार है, अपितु उस उदारता में कभी बदलाव नहीं आता। यहाँ तक कि संसार के सबसे भले माता-पिताओं के पास भी सही समय पर और सही तरीके से जाना पड़ता है, क्योंकि वे सदैव एक समान नहीं होते। बच्चे सीखते हैं कि वे अपने समय को कैसे चुनें। जब मेरे पिता बिजली कम्पनी के साथ बात करने के लिए फोन पर प्रतीक्षा कर रहे होते थे, तब एक किशोर के रूप में मुझे उनके हाव-भाव समझना सरल लगता था और सोचा करता था, “मुझे नहीं लगता कि मेरी कार के लिए दो नए टायर माँगने का अभी सही समय है।”
यद्यपि हमारे स्वर्गिक पिता के साथ हमें यह सोचने की आवश्यकता नहीं है कि उसके पास जाना ठीक है या नहीं। वह न तो अस्थिर स्वभाव का है और न ही जल्दी क्रोध करने वाला। हम हियाव रख सकते हैं कि वह सर्वदा उचित रीति से कार्य करेगा। हम उसे किसी भी बात में अनजान, असमर्थ, अनुपलब्ध या अनिच्छुक नहीं पाएँगे। मसीह के द्वारा वह हमारे हृदय की प्रार्थनाओं और हमारी प्रतिदिन की चिन्ताओं के लिए उपलब्ध और प्रतिक्रियाशील है।
हम परमेश्वर के बच्चे हैं, और हमारे लिए अपने प्रेम को व्यक्त करने के तरीकों में से एक है हमारे लिए उसके उत्तम वरदान। इसलिए उसके प्रत्येक बच्चे में पाया जाने वाला एक गुण कृतज्ञता होना चाहिए। यदि हम अपने पिता के चरित्र को जानते हैं तो हम आभारी होने के अतिरिक्त और क्या हो सकते हैं, तब भी जब उसके वरदान वे न हों जिन्हें हमने स्वयं चुना हो? इसलिए ध्यान से अपनी आशिषों को प्रतिदिन गिना करें। याद रखें कि सभी भली वस्तुएँ उसी की देन हैं। और उससे यह कहा करें:
महान है तेरी विश्वासयोग्यता, हे परमेश्वर मेरे पिता,
न किसी परिवर्तन के कारण तुझ पर छाया पड़ती है…
जो कुछ भी मुझे चाहिए था, तेरे हाथ ने दिया—
महान है तेरी विश्वासयोग्यता, प्रभु, मेरे लिए! [1]
भजन संहिता 103