19 मार्च : एक सच्ची नबूवती आवाज

Alethia4India
Alethia4India
19 मार्च : एक सच्ची नबूवती आवाज
Loading
/

“उन्होंने, ‘शान्ति है, शान्ति’ ऐसा कह कहकर मेरी प्रजा के घाव को ऊपर ही ऊपर चंगा किया, परन्तु शान्ति कुछ भी नहीं है।”  यिर्मयाह 8:11

जब हमारा सामना किसी गम्भीर रोग होता है, तो हममें से कोई भी नौसिखिए डॉक्टर से इलाज नहीं कराना चाहता। कल्पना करें कि आप ऐसे डॉक्टर के पास जाते हैं, जो माँस के सड़ जाने का इलाज केवल एक अच्छी सी पट्टी बाँधकर कर देता है, आपको आपकी परेशानी के बदले में कुछ अच्छे शब्द लिखकर देता है और आपको एक सुखद शाम की शुभकामनाएँ देता है। इससे आपको पहले से अच्छा महसूस हो सकता है, किन्तु इससे समस्या का समाधान नहीं होगा और जल्द ही आपकी हालत पहले से भी खराब हो जाएगी!

पुराने नियम के समय में, भविष्यद्वाक्ताओं का कार्य परमेश्वर के वचन को बोलना और परमेश्वर के लोगों को उसकी वाचा का पालन करने के लिए प्रेरित करना होता था। परमेश्वर अपना वचन भविष्यद्वक्ताओं के मुँह में डालता था, और वे वही घोषणा करते थे जो परमेश्वर कहता था, न कि जो उनके अपने मन में आता था। और प्रायः उनका सन्देश होता था, सावधान हो जाओ! न्याय आने वाला है।  यह बिल्कुल भी सुखद घोषणा नहीं थी!

क्योंकि परमेश्वर का सन्देश इतना चुनौतीपूर्ण था, इस कारण झूठे भविष्यद्वक्ता बहुत हो गए थे और एक तरह से जो कुछ वे चाहते थे, वह सब उनको प्राप्त हो जाता था। उन्हें भविष्यद्वक्ता के रूप में जाना जाता था और वे बड़ी-बड़ी बातें बोल सकते थे और साथ ही वे लोगों को वे बातें भी कह सकते थे, जो वे सुनना चाहते थे। झूठा भविष्यद्वक्ता उस नौसिखिए डॉक्टर के समान होता था, जो लोगों से कहता था कि सब कुछ ठीक हो जाएगा, जबकि वास्तव में स्थिति निराशाजनक होती थी। यह सुनना अच्छा लगता है कि सब कुछ ठीक है और आपके देश में शान्ति का वास है, जब तक कि शत्रु दरवाज़े पर न दिखाई दे। तब यह आवश्यक हो जाता है कि आप तैयार रहें।

जबकि सच्चे भविष्यद्वक्ता परमेश्वर के आने वाले न्याय के बारे में बात करते थे, तौभी उनका सन्देश लोगों को अपने आप में सन्तुष्ट रहने के विरुद्ध चेतावनी भी देता था और उन्हें निराशा के विरुद्ध प्रोत्साहित भी करता था। परमेश्वर ने सर्वदा अपने लोगों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का आश्वासन दिया है, उनके लिए एक अति-उत्तम भविष्य की प्रतिज्ञा की है। न्याय से सामना होने पर उनकी एकमात्र आशा परमेश्वर से अलग  शरण मिलने में नहीं, बल्कि परमेश्वर में  शरण मिलने में होती थी।

हमारे समय में भी झूठे भविष्यद्वक्ता भरे पड़े हैं। उनके शब्द किसी समारोह के सामान्य प्रारम्भिक वक्ता की झूठी प्रशंसा में सुनाई दे जाते हैं, जैसे कि “आप इस समाज के अब तक के सबसे बढ़िया युवा लोग हैं। भविष्य आपके हाथों में है। आप उड़ान भरने के लिए तैयार हैं!” परन्तु इसी तरह की उथली बातें बहुत सी कलीसियाओं में भी बोली जाती हैं, जिनकी शिक्षा में अस्पष्ट सामान्य बातें और श्रोताओं के लिए कथित रूप से प्रेरणादायक आधे-अधूरे सत्य शामिल होते हैं; और आधा-सत्य, आधा-झूठ भी होता है।

हमें अपने समय में भी सच्ची भविष्यद्वाणी की आवाज की उतनी ही आवश्यकता है, जितनी यिर्मयाह के समय में परमेश्वर के लोगों को थी। हमारी कलीसियाओं, हमारे राष्ट्र और पूरे संसार को ऐसे लोगों की आवश्यकता है जो सच बोलने का साहस रखते हैं, भले ही इससे उपहास और अस्वीकृति मिले, जैसे कि पाप के बारे में बोलना, इस बात पर जोर देना कि परमेश्वर के कुछ नैतिक मानक हैं, न्याय की चेतावनी देना, यीशु के भविष्य में पुनः आगमन की घोषणा करना और इस प्रकार केवल उसकी ओर संकेत करने में सक्षम होना, जो बचा सकता है।

परमेश्वर से प्रार्थना करें कि वह ऐसे व्यक्तियों को खड़ा करे जो परमेश्वर के वचन से और परमेश्वर के आत्मा की अधीनता में अपने श्रोताओं को चुनौती देने के लिए तैयार हों। प्रार्थना करें कि जब आप ऐसी आवाज के माध्यम से परमेश्वर के वचन का सच में प्रचार होते हुए सुनें, तो आप आत्म-सन्तुष्टि से अपने आप को बचा सकें, सुनने के लिए तैयार हों, और परमेश्वर में अर्थात् अपनी एकमात्र आशा में शरण लेने के लिए तैयार रहें। और प्रार्थना करें कि आपके आस-पड़ोस में और आपके कार्यस्थल में आप वही आवाज बन सकें।       

1 थिस्सलुनीकियों 5:1-11

Leave A Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *