“देखो, मैं अपने दूत को भेजता हूँ, और वह मार्ग को मेरे आगे सुधारेगा, और प्रभु, जिसे तुम ढूँढ़ते हो, वह अचानक अपने मन्दिर में आ जाएगा; हाँ, वाचा का वह दूत, जिसे तुम चाहते हो, सुनो, वह आता है, सेनाओं के यहोवा का यही वचन है।” मलाकी 3:1
परमेश्वर के लोग प्रतीक्षा करने वाले लोग हैं।
बेबीलोन में अपनी बँधुआई से परमेश्वर के लोगों के लौटने के बाद “लघु भविष्यद्वक्ता” हाग्गै, जकर्याह और मलाकी उनके पास परमेश्वर का वचन लेकर आए। उनका सन्देश वैसा ही था, जैसा उनके पहले के भविष्यद्वक्ताओं ने लोगों के बन्दी बनाए जाने से पहले कहा था कि तुम इस्राएली लोग मूर्ख हो! तुम वाचा को तोड़ते रहते हो। और यदि तुम वाचा को तोड़ते रहोगे, तो परमेश्वर न्याय लेकर आएगा।
लेकिन लघु भविष्यद्वक्ताओं का सन्देश केवल न्याय के बारे में नहीं था। उसमें आशा भी थी।
वे भले ही शारीरिक रूप से देश में लौट आए थे, किन्तु आत्मिक रूप से वे लोग अभी भी बँधुआई में थे। इस्राएल का जो कुछ बचा था, अर्थात् यहूदा, इस आशा को थामे रहा कि परमेश्वर अपनी प्रतिज्ञा को पूरा करेगा, जिससे कि उसके लोग उसकी आशिषों का आनन्द उठा सकें। परन्तु परमेश्वर का राज्य अभी भी उस तरह से नहीं आया था, जैसा कि पहले के भविष्यद्वक्ताओं ने घोषित किया था क्योंकि परमेश्वर का राजा अभी तक नहीं आया था। इसलिए लोग प्रभु के लौटने और उद्धार की सभी प्रतिज्ञाओं को पूरा करने की प्रतीक्षा कर रहे थे।
पुराने नियम का अन्तिम भविष्यद्वक्ता, मलाकी, दृढ़ता से कहता रहा कि वह राजा आएगा, परन्तु उसके बाद भी 400 वर्षों तक चुप्पी बनी रही। लोग पैदा होते रहे, अपने सामान्य कार्यों को करते रहे, कारोबार करते रहे, मर गए, और यह चक्र इसी प्रकार चलता रहा। हो सकता है कि उन्होंने एक-दूसरे से पूछा हो, “उन शब्दों का क्या हुआ कि ‘मैं अपने दूत को भेजूँगा, और वह मार्ग को मेरे आगे सुधारेगा’? उस प्रतिज्ञा को तो सदियाँ बीत चुकी हैं।”
अन्ततः हो सकता है कि उनमें से कुछ लोग बाजार की ओर जा रहे होंगे जब विचित्र कपड़े पहने और विचित्र भोजन खाने वाला एक असामान्य सा दिखने वाला व्यक्ति सड़कों पर दिखाई दिया होगा, जो पुराने नियम में लिखी बातें बोल रहा था, “देख, मैं अपने दूत को तेरे आगे भेजता हूँ, जो तेरे लिए मार्ग सुधारेगा। जंगल में एक पुकारने वाले का शब्द सुनाई दे रहा है कि प्रभु का मार्ग तैयार करो, और उसकी सड़कें सीधी करो” (मरकुस 1:2-3)। इन शब्दों के साथ यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले ने पीढ़ियों की चुप्पी तोड़ दी। कई वर्षों की प्रतीक्षा के बाद परमेश्वर अपनी प्रतिज्ञाओं को पूरा करने में विश्वासयोग्य रहा, जैसा कि वह सदा से है। उसने अपने दूत और अपने राजा दोनों को भेजा कि सभी लोग उसकी आशीष का अनुभव कर सकें, अर्थात्, यीशु मसीह के द्वारा उद्धार की पूर्ति का अनुभव कर सकें।
हमारे दिनों में परमेश्वर के लोग अभी भी प्रतीक्षा कर रहे हैं। हम जानते हैं कि यीशु आ चुका; हम यह भी जानते हैं कि वह आने वाला है। परमेश्वर का राज्य अभी तक अपनी पूर्ण महिमा में नहीं आया है। इस कारण, तात्कालिक आनन्द की प्राप्ति के इच्छुक इस संसार में हम धीरज के साथ प्रतीक्षा करने वाले लोग हैं और एक ऐसे संसार में जहाँ लोगों की आशा तीव्रता से भंग हो जाती है, हम धीरज के साथ आशा रखने वाले लोग हैं। जब ऐसा लगे कि परमेश्वर आपके जीवन में अपनी प्रतिज्ञाओं को पूरा करने में बहुत अधिक समय ले रहा है, तब भी आशा मत खोइए। पीढ़ी से पीढ़ी तक वह विश्वासयोग्य रहा है और यीशु को भेजने के द्वारा उसने प्रत्येक प्रतिज्ञा को पूरा करने वाले का परिचय भी दे दिया है। आप उसकी समरूपता में विश्राम कर सकते हैं। “हाँ,” यीशु कहता है, “मैं शीघ्र आने वाला हूँ” (प्रकाशितवाक्य 22:20)। वह वही करेगा जो उसने कहा है। 2 पतरस 3:1-13