27 जनवरी : वह कुचले हुए नरकटों के लिए आया था

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27 जनवरी : वह कुचले हुए नरकटों के लिए आया था
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“कुचले हुए नरकट को वह न तोड़ेगा और न टिमटिमाती बत्ती को बुझाएगा; वह सच्चाई से न्याय चुकाएगा।”  यशायाह 42:3

प्राचीन काल के बड़े राजनेता शासन करने के लिए अपनी शक्ति पर आश्रित रहते थे। (बहुत से लोग आज भी लोग ऐसा करते हैं।) फारस के राजा कुस्रू महान को इस प्रकार वर्णित किया जाता था जैसे कुम्हार गीली मिट्टी को लताड़ता है, वैसे ही वह हाकिमों को कीच के समान लताड़ देगा (यशायाह 41:25 देखें)। फिर भी उसी समय में यशायाह ने उस आने वाले सेवक के बारे में भविष्यद्वाणी की, जो उस समय के हाकिमों के बिल्कुल विपरीत होगा।

वह सेवक, अर्थात यीशु भला, संवेदनशील और दयालु है। जिन लोगों को दूसरे लोग त्याग देना चाहते हैं और ठुकरा देना चाहते हैं, वह उन्हें अपनाने के लिए इच्छुक और सक्षम है। यह कितना अधिक आशा-दायक वचन है!

कुचले हुए नरकट के चित्रण में हम यीशु की हमारे प्रति संवेदनशीलता के महत्त्व को देख सकते हैं। आप कुचले हुए नरकट के सहारे टिक नहीं सकते, और न ही आप उससे संगीत बजा सकते हैं। फिर भी यीशु उन लोगों को उठाता है, जिन्हें अन्य लोग एक ओर कर देते हैं और उनके जीवन में और उनके जीवनों के द्वारा एक मधुर धुन बजाता है। हो सकता है कि आज आप अपने आप को बुरी तरह से दबा हुआ, दूसरों के व्यवहार से टूटा हुआ या अतीत में की गई गलतियों से आहत महसूस कर रहे हों। हो सकता है कि आप लगभग यह विश्वास करने लगे हों कि आप टूटे हुए और बेकार हैं। परन्तु आपके लिए एक महिमामय समाचार यह है कि वह सेवक कुचले हुए नरकटों को उठाता है, और वह ऐसा बड़े ध्यान से करता है।

यीशु सुलगती हुई बत्तियों को भी अपनाता है। वह उन्हें बुझाता नहीं है; परन्तु इसके विपरीत वह टिमटिमाते हुए टुकड़े को लेता है और उसे चमकती हुई ज्योति में बदल देता है। हो सकता है कि आपको यह विश्वास दिला दिया गया हो कि आपके अच्छे दिन अब बीत चुके हैं; कि आप एक बुझती हुई पुरानी मोमबत्ती हैं, केवल एक टिमटिमाती और बुझती हुई लौ हैं। आप अपने आप से यह कहने लगते हैं कि यदि तुम अभी तक इसका हल नहीं निकाल सके हो, तो शायद तुम्हारे लिए कोई आशा नहीं है। परन्तु एक बार फिर शुभ समाचार यह है कि सुलगती हुई बत्तियाँ इस सेवक में आशा पाती हैं, जो हमें फिर से प्रज्ज्वलित करने आया है।

यीशु उन लोगों में असाधारण रुचि रखता है जिनका कहीं कोई नाम नहीं, अर्थात उन कुचले हुए नरकटों और सुलगती हुई बत्तियों में। वह उन्हें छुटकारा देता है और संसार में प्रकाश लाने और अपने नाम की स्तुति के लिए उनका उपयोग करता है। वास्तविकता तो यह है कि किसी न किसी तरह से हम सभी कुचले हुए नरकट और टिमटिमाती बत्तियाँ ही हैं। क्या हम अपनी दीन-हीन स्थिति को पहचानने के लिए तैयार हैं ताकि हम उस सेवक की भलाई और दयालुता को जान सकें? अन्ततः . . .

वह कभी भी धुआँ देते हुए रेशे को नहीं बुझाता, परन्तु उसे आग की लपटों में बदल देता है;

वह कुचले हुए नरकट को कभी नहीं तोड़ता, न ही सबसे निकृष्ट नाम का तिरस्कार करता है। [1]
लूका 7:11-17

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