“हे सिय्योन को शुभ समाचार सुनाने वाली, ऊँचे पहाड़ पर चढ़ जा; हे यरूशलेम को शुभ समाचार सुनाने वाली, बहुत ऊँचे शब्द से सुना, ऊँचे शब्द से सुना, मत डर; यहूदा के नगरों से कह, ‘अपने परमेश्वर को देखो!’” यशायाह 40:9
भविष्यद्वक्ता यशायाह के जीवनकाल में परमेश्वर के लोगों को एक पराए देश में बन्दी बना लिया गया था। वे निराश हो चुके थे, यहाँ तक कि प्रभु की स्तुति के गीत भी नहीं गा पा रहे थे (भजन संहिता 137:1-4 देखें)। फिर भी जब वे बँधुआई की उस स्थिति में थे, तब परमेश्वर अपने लोगों के पास शान्ति प्रदान करने वाले शब्दों के साथ आया (यशायाह 40:1), वह शान्ति जो केवल उसकी प्रतिज्ञा के पूरे होने में ही मिलती है: कि यहोवा का तेज प्रगट होगा और ऐसा केवल इस्राएल के लिए नहीं परन्तु सम्पूर्ण मानवजाति के लिए होगा।
यह शुभ समाचार ऐसा नहीं था कि इस बारे में चुप रहा जा सके। अवश्य था कि परमेश्वर के लोग विजयी जयघोष करते और अपनी आशा की महिमा से एक-दूसरे को मोहित कर देते। इसका वर्णन एक बार इस प्रकार भी किया गया था कि “जो लोग अन्धियारे में चल रहे थे” उन्होंने “बड़ा उजियाला देखा” (यशायाह 9:2)।
इस पतित संसार के अन्धकार और स्वर्ग के उजियाले के बीच का अन्तर एक अनोखा चित्रण है, जो यशायाह की पूरी पुस्तक में और निस्सन्देह पूरी बाइबल में दिखाई देता है। अन्धकार वह परिणाम है जो परमेश्वर के लिए उदासीनता होने, उसके विरुद्ध विद्रोह करने और उसके कहे अनुसार कार्य करने की अनिच्छा के होने से आता है। केवल एक ही ऐसा सन्देश है जो ऐसे अन्धकार में उजियाला लेकर आता है, जो हृदय और मन को तरोताजा कर देता है, और वह यह है “अपने परमेश्वर को देखो!”
यह सन्देश आज भी परमेश्वर के लोगों के लिए उतना ही प्रासंगिक है जितना कि यशायाह के समय में था। प्रायः अन्धकार बहुत अधिक लगता है और कभी-कभी उजियाला बहुत धुँधला दिखाई देता है। फिर भी, प्रायः इन अनिश्चित समयों में आशा का सन्देश भी प्रकट होता है। परमेश्वर ने प्रतिज्ञा की है कि “तब यहोवा का तेज प्रगट होगा और सब प्राणी उसको एक संग देखेंगे; क्योंकि यहोवा ने आप ही ऐसा कहा है” (यशायाह 40:5)। अन्ततः परमेश्वर ने इस प्रतिज्ञा को पूरा किया, जब उसने देह धारण किया और हमारे बीच में अपनी उपस्थिति ठहराई।
जब यूहन्ना ने अपना सुसमाचार लिखा, तो उसने उसी दृश्य को देखा जिसकी ओर यशायाह ने देख रहा था, और कहा कि “और वचन देहधारी हुआ; और अनुग्रह और सच्चाई से परिपूर्ण होकर हमारे बीच में डेरा किया, और हमने उसकी ऐसी महिमा देखी, जैसी पिता के एकलौते की महिमा” (यूहन्ना 1:14)। वह जगत की ज्योति था—वह स्वयं—और “ज्योति अन्धकार में चमकती है, और अन्धकार ने उसे ग्रहण न किया” (पद 5)। यशायाह उसका वर्णन कर रहा था जो आने वाला था। परन्तु हम यूहन्ना की तरह उस पूरे किए गए कार्य पर विचार करने में सक्षम हैं कि यही वह महिमा है, जिसकी प्रतिज्ञा की गई थी और जो अब प्रकाशित हुई है।
हमारे अन्धकार को मिटाकर और उद्धार को लेकर परमेश्वर हमारे पास आया है। आप अपने परमेश्वर को पहले चरनी में, फिर क्रूस पर, फिर कब्र से बाहर निकलते हुए और अब ऊँचे स्थान पर राज्य करते हुए देख सकते हैं। अन्धकार को देख पाना कठिन नहीं है, किन्तु फिर भी हमें ज्योति की ओर देखना चाहिए क्योंकि वहाँ हमें आशा मिलती है, जो भय को दूर करती है और वह शुभ समाचार मिलता है, जो इस योग्य है कि उसे सबको सुनाया जाए। इसलिए आज अपने परमेश्वर को देखें!